
नई दिल्ली। लोन दिलाने के नाम पर दिहाड़ी मजदूरों से आधार और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज लेकर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाने का मामला दिल्ली में सामने आया है। पुलिस के मुताबिक इन खातों से जुड़े साइबर अपराध के मामलों में करीब 7.3 करोड़ रुपये के लेन-देन की जांच की जा रही है। मामले में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक बैंक शाखा का मैनेजर भी शामिल है।
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लोन के बहाने शुरू हुआ खेल
पुलिस ने जांच की शुरुआत एक निजी बैंक की त्रि नगर शाखा से जुड़े खाते की पड़ताल से की थी। जांच आगे बढ़ी तो मयंक कपूर का नाम सामने आया। आरोप है कि वह दिहाड़ी मजदूरों को आसानी से लोन दिलाने का झांसा देता था। इसी बहाने वह उनके पहचान से जुड़े दस्तावेज और तस्वीरें इकट्ठा कर लेता था।

पुलिस का कहना है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल मजदूरों की जानकारी के बिना बैंक खाते खुलवाने में किया जाता था। मजदूरों को यह अंदाजा तक नहीं था कि उनकी पहचान किसी और काम में इस्तेमाल हो रही है। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो सका है कि जुटाए गए दस्तावेजों में से कितनों का इस्तेमाल खाते खोलने में हुआ।
छापेमारी में क्या-क्या मिला
जांच के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में दस्तावेज और सामान बरामद हुए। इनमें 60 पैन कार्ड, 63 आधार कार्ड, 11 सिम कार्ड, 7 डेबिट कार्ड, 7 चेक बुक और 55 पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं।
इसके अलावा पुलिस ने सात मोबाइल फोन, 60 हजार रुपये नकद, 150 ग्राम सोना और एक लैपटॉप भी बरामद किया है। पुलिस अब इन सभी चीजों की मदद से यह पता लगाने में जुटी है कि संदिग्ध खातों का इस्तेमाल किस तरह हुआ और पैसों का लेन-देन किन लोगों के बीच किया गया।
37 खाते, 99 शिकायतें
पुलिस जांच में अब तक करीब 37 ऐसे बैंक खाते मिले हैं, जिनका संबंध देशभर में दर्ज 99 साइबर अपराध की शिकायतों से बताया जा रहा है। यानी इन खातों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में हुई ठगी की रकम को इधर-उधर करने में किए जाने का शक है।
जांच के दौरान पुलिस को एक और अहम बात पता चली। कई खाताधारक कभी बैंक की शाखा में गए ही नहीं थे। उनके पते की जानकारी भी सही नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने 17 और संदिग्ध खातों की पहचान की।
फोन और डिवाइस से मिला सुराग
पुलिस ने फोन नंबर और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से जुड़े सुरागों के आधार पर मयंक कपूर को बाबा हरिदास नगर इलाके से गिरफ्तार किया। पूछताछ और जांच में आगे चलकर बैंक के भीतर की भूमिका पर भी सवाल उठे।
बैंक मैनेजर पर भी आरोप
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि खाते खुलवाने में बैंक के भीतर से किसने मदद की। पुलिस के मुताबिक सरस्वती विहार शाखा के मैनेजर शोभित अग्रवाल पर गंभीर आरोप हैं। उन पर खाताधारकों की गैरमौजूदगी में खाते खुलवाने और फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप है। यह भी आरोप है कि उन्होंने मयंक कपूर की मुलाकात त्रि नगर शाखा के मैनेजर से कराई।
पुलिस ने इस मामले में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें मयंक कपूर और शोभित अग्रवाल भी शामिल हैं। त्रि नगर शाखा के मैनेजर की तलाश अभी जारी है।
पैसे का क्या हुआ
पुलिस को शक है कि लेन-देन से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा बैंक अधिकारियों तक पहुंचाया गया। बाकी रकम को ट्रस्ट वॉलेट के जरिए क्रिप्टोकरंसी यूएसडीटी में बदल दिया गया। इससे रकम का पता लगाना और मुश्किल हो जाता है। पुलिस इस पूरे लेन-देन की कड़ियां जोड़ने में लगी है और मामले की जांच अभी जारी है।
मजदूरों के लिए बड़ा सबक
यह मामला इस बात की चेतावनी है कि अपने दस्तावेज किसी को भी सौंपना कितना जोखिम भरा हो सकता है। जिनके नाम पर खाते खुले, वे मजदूर अनजाने में साइबर ठगी के जाल में फंस सकते हैं और कल को उन्हें भी पुलिस पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है।
दस्तावेज देने से पहले रखें ये सावधानियां
सबसे पहले जांच लें कि जिस कंपनी या व्यक्ति को आप लोन के नाम पर दस्तावेज दे रहे हैं, वह फर्जी तो नहीं है।
यह भी पूछें और समझ लें कि आपके आधार कार्ड, पैन कार्ड या दूसरे दस्तावेज किस काम के लिए लिए जा रहे हैं।
दस्तावेज की कॉपी पर उसका मकसद और तारीख जरूर लिखें, ताकि उसका इस्तेमाल किसी और काम में न हो सके।
किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
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