
रात को गहरी नींद में सोते हुए अचानक बड़बड़ाना, कुछ शब्द बोलना या अस्पष्ट आवाज़ें निकालना यहF नज़ारा लगभग हर घर में कभी न कभी देखने को मिल जाता है। परिवार के सदस्य अक्सर इसे मज़ाक में लेते हैं या एक सामान्य बात समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नींद में बड़बड़ाना कई बार शरीर और मस्तिष्क की जटिल प्रक्रियाओं से जुड़ा होता है, जिसे समझना ज़रूरी है।
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सोते हुए भी सक्रिय रहता है दिमाग
नींद के दौरान भी हमारा मस्तिष्क पूरी तरह सुस्त नहीं पड़ता, बल्कि यह अलग-अलग स्तर पर काम करता रहता है। यही वजह है कि, नींद के दौरान लोग सपने देखते हैं। कुछ मामलों में सपने देखने के साथ-साथ बोलने, बुदबुदाने या हल्की आवाज़ें निकालने जैसी गतिविधियां भी होने लगती हैं। सवाल यह उठता है कि, क्या यह केवल एक व्यक्तिगत आदत है या किसी अंतर्निहित समस्या का संकेत।
क्या कहलाती है यह स्थिति
चिकित्सा भाषा में नींद के दौरान बड़बड़ाने की स्थिति को “सोमनीलोक्वी” कहा जाता है। यह एक तरह का स्लीप डिसऑर्डर है, जिसे “पैरासोमनिया” नामक श्रेणी में रखा जाता है। पैरासोमनिया के अंतर्गत नींद के दौरान होने वाली असामान्य शारीरिक गतिविधियां, हरकतें और व्यवहार आते हैं- जैसे नींद में चलना, दांत पीसना या बड़बड़ाना।

राहत की बात यह है कि, अधिकतर मामलों में सोमनीलोक्वी पूरी तरह हानिरहित मानी जाती है। यह किसी गंभीर बीमारी का लक्षण नहीं होती, बल्कि नींद और सपनों से जुड़ी एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। कई बार व्यक्ति सपने में जो देखता या महसूस करता है, उसी की प्रतिक्रिया में वह वास्तविक जीवन में भी बोलने लगता है। कुछ मामलों में यह केवल बोलने तक सीमित नहीं रहता, व्यक्ति पैर हिलाना, हाथ फेंकना या शरीर को हरकत देना जैसी गतिविधियां भी करने लगता है।
आखिर क्यों बड़बड़ाते हैं लोग नींद में
विशेषज्ञों के अनुसार, नींद में बड़बड़ाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें सबसे आम कारण है सपने देखना। जब मस्तिष्क गहरी नींद की अवस्था में सपनों की प्रक्रिया से गुज़रता है, तो कई बार व्यक्ति का शरीर उस सपने के प्रति प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप बड़बड़ाना होता है।
इसके अलावा, दिनभर की भावनाओं और अनुभवों को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया भी इसका एक बड़ा कारण मानी जाती है। दरअसल, सोते समय मस्तिष्क दिनभर में इकट्ठा हुई जानकारियों, यादों और भावनाओं को छांटने और समझने का काम करता है। इसी प्रक्रिया के दौरान कई बार अनजाने में मुंह से शब्द निकलने लगते हैं।
तनाव और चिंता भी है वजह
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि, नींद में बड़बड़ाने की सबसे प्रमुख वजह तनाव और चिंता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक दबाव, काम का बोझ और रोज़मर्रा की चिंताएं इंसान के दिमाग पर गहरा असर डालती हैं। दिनभर जिन बातों को लेकर व्यक्ति परेशान रहता है। वही विचार रात को सोते समय भी उसके अवचेतन मन में सक्रिय बने रहते हैं, जिसके चलते नींद में बड़बड़ाने की समस्या सामने आती है।
बुरे सपने या दुःस्वप्न भी इस समस्या की एक बड़ी वजह माने जाते हैं। जब कोई व्यक्ति डरावना या तनावपूर्ण सपना देखता है, तो डर, घबराहट या अचानक उपजी चिंता के कारण वह नींद में ही बोलने या चिल्लाने जैसी प्रतिक्रिया देने लगता है।
कब हो जाना चाहिए सतर्क
आमतौर पर कभी-कभी नींद में बड़बड़ाना पूरी तरह सामान्य माना जाता है और इसके लिए घबराने की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन अगर यह समस्या लगातार हर रात हो रही हो, या इसके साथ बार-बार बुरे सपने आना, नींद में चलना या नींद पूरी न हो पाना जैसी समस्याएं भी जुड़ी हों, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या स्लीप स्पेशलिस्ट से सलाह लेना बेहतर होता है, क्योंकि यह किसी गहरे मानसिक तनाव, नींद की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।
इन आदतों को सुधारने से मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि, जीवनशैली में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके नींद में बड़बड़ाने की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
तय समय पर सोना
रोज़ाना एक निश्चित समय पर सोना और जागना शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित रखता है। समय पर न सोना इस समस्या के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।
पर्याप्त नींद लेना
नींद की कमी सीधे तौर पर बड़बड़ाने और अन्य नींद संबंधी विकारों को बढ़ावा देती है। हर वयस्क को रोज़ाना कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए।
सोने से पहले उत्तेजक पदार्थों से परहेज़
शराब, चाय और कॉफी जैसे पदार्थों का सेवन नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। विशेषज्ञ सोने से कुछ घंटे पहले इनके सेवन से बचने की सलाह देते हैं।
शांत और आरामदायक माहौल
बेडरूम का वातावरण शांत, अंधेरा और तापमान के लिहाज़ से आरामदायक होना चाहिए, ताकि नींद बाधित न हो।
सोने से पहले मन को शांत करना
सोने से ठीक पहले किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या ध्यान करना दिमाग को रिलैक्स करने में मदद करता है, जिससे गहरी और बेहतर नींद आती है।
तनाव प्रबंधन
चूंकि तनाव और चिंता इस समस्या की प्रमुख वजह हैं, इसलिए योग, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
नींद में बड़बड़ाना ज़्यादातर मामलों में एक हानिरहित और सामान्य प्रक्रिया है, जो सपनों, भावनात्मक प्रक्रिया और कभी-कभी तनाव से जुड़ी होती है। हालांकि, अगर यह समस्या बार-बार हो रही हो या इसके साथ अन्य लक्षण भी जुड़े हों, तो चिकित्सीय सलाह लेना ही समझदारी है। बेहतर जीवनशैली, समय पर नींद और तनाव प्रबंधन के ज़रिए इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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नोट- यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए कृपया योग्य चिकित्सक से सलाह लें।



