
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने तय किया है कि, इस बार सपा पूरे प्रदेश के लिए एक ही घोषणा-पत्र जारी करने की पुरानी परंपरा को तोड़ेगी और अलग तरीके से मेनिफेस्टो जारी करेगी। मुलायम सिंह यादव के समय से चली आ रही यह परिपाटी अब बदलने जा रही है। पार्टी ने फैसला किया है कि, प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए अलग-अलग, एक्सक्लूसिव और ‘माइक्रो लेवल’ घोषणा-पत्र तैयार किए जाएंगे यानी 75 जिले होंगे और उनके लिए 75 अलग-अलग विजन दस्तावेज तैयार किए जाएंगे।
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पार्टी की रणनीति अब यह होगी कि मतदाताओं से ‘प्रदेश में क्या किया जाएगा’ के बजाय सीधे ‘आपके जिले में क्या नया लाया जाएगा’ के मुद्दे पर बात की जाए। इस नई योजना के तहत पार्टी ने जिला स्तर के नेताओं को निर्देश दिए हैं कि, वे अपने-अपने क्षेत्र की पांच सबसे बड़ी समस्याओं, अधूरे या बंद पड़े विकास प्रोजेक्ट्स और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाओं की पूरी जानकारी तैयार करें।
दो महीने पहले हुई थी रणनीतिक बैठक
आपको बता दें कि, यह फैसला करीब दो महीने पहले हुई सपा की एक अहम रणनीतिक बैठक में लिया गया था। इस बैठक में अखिलेश यादव के अलावा प्रदेश के सभी जिलाध्यक्ष मौजूद थे। बैठक में यह सुझाव दिया गया कि, पार्टी के चुनावी घोषणा-पत्र में हर जिले के स्थानीय मुद्दों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि जनता से पार्टी का सीधा और मजबूत जुड़ाव बन सके।

बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि, एक साझा घोषणा-पत्र में आमतौर पर केवल राज्य स्तर के बड़े और सामान्य मुद्दे ही जगह पाते हैं, जबकि पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों की समस्याएं आपस में काफी अलग हैं।
उनका मानना है कि, जनता तभी पार्टी से जुड़ाव महसूस करेगी, जब उसके अपने मुद्दों जैसे सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और रोजगार को घोषणा-पत्र में स्पष्ट रूप से जगह मिलेगी। पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस प्रस्ताव को तुरंत अपनी मंजूरी दे दी थी।
इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने सभी जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि, वे अपने-अपने जिलों से जुड़ी जानकारी पांच प्रमुख बिंदुओं रोजगार व उद्योग, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यटन व सड़क-परिवहन, पुलों का निर्माण, तथा किसानों व बुनकरों की समस्याएं के आधार पर इकट्ठा करें।
पश्चिमी देशों की तर्ज पर प्रयोग
राजनीति के जानकारों का कहना है कि, इस तरह की चुनावी रणनीति पश्चिमी देशों में पहले से प्रचलित है। उनके अनुसार, भारत में भी अब जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी का प्रभाव साफ दिखने लगा है। हाल के दिनों में युवा पीढ़ी ने अलग-अलग जिलों में स्थानीय समस्याओं को लेकर प्रदर्शन भी किए हैं, जो अमूमन ऐसी समस्याएं होती हैं जिनका समाधान अपेक्षाकृत आसान होता है। विश्लेषक कहते हैं कि, अखिलेश यादव द्वारा यूपी में यह मॉडल लागू करना एक सकारात्मक और समयानुकूल कदम है, क्योंकि इससे पहले किसी भी राजनीतिक दल ने जिला स्तर पर अलग घोषणा-पत्र जारी नहीं किया है।
जिलावार घोषणा-पत्र की पांच बड़ी विशेषताएं
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नए जिलावार घोषणा-पत्र की पांच प्रमुख बातें होंगी
पहली- स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान
हर जिले के घोषणा-पत्र की बुनियाद वहां की जरूरतों पर आधारित होगी, जिन जिलों में सड़क, सिंचाई, जलभराव, पेयजल या बिजली जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। वहां इन्हीं मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी तरह औद्योगिक जिलों में निवेश, पर्यटन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और धार्मिक नगरों में यात्री सुविधाओं पर विशेष जोर रहेगा।
दूसरी- बड़े प्रोजेक्ट्स को रोजगार से जोड़ना
पार्टी का वादा केवल सड़क, पुल या भवन जैसे ढांचागत निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इन परियोजनाओं को सीधे स्थानीय रोजगार सृजन से जोड़ा जाएगा। इससे पहले आगरा में आयोजित ‘विजन इंडिया’ कार्यक्रम में अखिलेश यादव आगरा को आईटी सिटी, फिरोजाबाद को ग्लास सिटी और मथुरा को हेरिटेज सिटी के रूप में विकसित करने का विजन पेश कर चुके हैं। इसके अलावा आगरा-मथुरा क्षेत्र में यमुना रिवरफ्रंट और फतेहपुर सीकरी की झील के पुनर्जीवन जैसी योजनाओं से भी स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की मंशा जताई गई है।
तीसरी- युवा, शिक्षा और सरकारी नौकरियों पर विशेष ध्यान
घोषणा-पत्र के एजेंडे में जेन-जी और युवा वर्ग को केंद्र में रखा गया है। इसमें पेपर लीक रोकने के सख्त प्रबंध, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए पारदर्शी नीति और सरकारी नौकरियों में नए अवसर शामिल किए जाएंगे। साथ ही बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू करने, नए कॉलेज, विश्वविद्यालय, आईटी हब, स्किल सेंटर और रोजगार केंद्र स्थापित करने का वादा भी घोषणा-पत्र का हिस्सा होगा।
चौथी- क्षेत्रवार किसानों की समस्याओं का समाधान
घोषणा-पत्र का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्पित होगा। हर क्षेत्र के किसानों की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार वहां की नीतियां तैयार की जाएंगी।
पांचवीं- स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों को नई ऊर्जा
हर जिले के पारंपरिक व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लाई जाएंगी, जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश के बुनकरों की समस्याएं, कन्नौज का इत्र उद्योग, मुरादाबाद का पीतल-बर्तन कारोबार और सहारनपुर का लकड़ी के फर्नीचर उद्योग। ये सभी सपा के जिला घोषणा-पत्र का अहम हिस्सा बनेंगे।
प्रत्याशियों के पास होगा ठोस रोडमैप
पार्टी की योजना के अनुसार, इस नई रणनीति से “हम प्रदेश में क्या करेंगे” के बजाय “हम आपके जिले के लिए क्या करेंगे” का नजरिया लेकर पार्टी जनता के बीच जाएगी। इससे विधानसभा चुनाव लड़ने वाले सपा प्रत्याशियों के पास स्थानीय मुद्दों पर जनता से सीधी बातचीत करने के लिए एक ठोस और लिखित रोडमैप उपलब्ध होगा। हर जिले की अलग जरूरतों को रिकॉर्ड में रखकर जनता के सामने प्रस्तुत करने से पार्टी और आम लोगों के बीच बातचीत के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
काम के आधार पर मांगेंगे वोट
सपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता जूही सिंह ने इस रणनीति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी का घोषणा-पत्र पूरी तरह माइक्रो लेवल का होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में आज अस्पताल तक उपलब्ध नहीं हैं, ढेरों स्कूल बंद पड़े हैं और आशा ज्योति केंद्र भी खाली पड़े हुए हैं। उनके अनुसार, सपा की सरकार बनने पर इन सभी को पुनर्जीवित किया जाएगा।
जूही सिंह ने कहा कि पार्टी का एकमात्र उद्देश्य जमीनी स्तर की समस्याओं को समझना और उनका स्थायी समाधान निकालना है। उन्होंने 2012 से 2017 के बीच अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता आज भी उन्हें याद करती है, और पार्टी अपने स्तर पर लगातार लोगों की मदद कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2027 में प्रदेश में जनता की सरकार बनेगी।
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