दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: नीट एक्जाम तक बरकार रहेगा टेलीग्राम बैन

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को दिल्ली उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा है। न्यायालय ने शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के ये फैसला उन लाखों छात्रों के हितों की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी परीक्षा की तैयारी और निष्पक्षता पर पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों ने सवालिया निशान लगा दिया था।

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जस्टिस तेजस कारिया की सिंगल पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और शुक्रवार को केंद्र सरकार के आदेश को वैध ठहराते हुए टेलीग्राम के अस्थायी बैन को चुनौती देने वाली याचिका को अस्वीकार कर दिया। इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मजबूत दलीलें पेश कीं, जबकि टेलीग्राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता कोर्ट में मौजूद रहे।

 नीट परीक्षा और पेपर लीक विवाद

नीट परीक्षा भारत की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें लाखों छात्र मेडिकल और डेंटल कोर्सेस में प्रवेश के लिए भाग लेते हैं।  हाल के वर्षों में पेपर लीक और अनुचित साधनों के उपयोग की घटनाओं ने पूरे परीक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए थे।

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केंद्र सरकार ने नीट यूजी 2025 से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी बैन लगाने का फैसला लिया, क्योंकि सूत्रों के अनुसार इस प्लेटफॉर्म पर पेपर लीक से संबंधित सामग्री, उत्तर कुंजी और गैर-कानूनी तरीकों से प्राप्त प्रश्नों का प्रसारण हो रहा था। सरकार का तर्क था कि, छात्रों के भविष्य और परीक्षा की निष्पक्षता को बचाने के लिए यह कदम आवश्यक था।

टेलीग्राम ने इस अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। याचिका में दावा किया गया कि, यह प्रतिबंध मनमाना, असंगत और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाला है।

टेलीग्राम का तर्क

टेलीग्राम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने तर्क दिया कि, केंद्र सरकार का आदेश कानूनी खामियों से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि, संबंधित कानून इस प्रकार के भेदभावपूर्ण या व्यापक प्रतिबंध का प्रावधान नहीं करता। टेलीग्राम का तर्क यह था कि, यदि आदेश का आधार ही गलत या अपर्याप्त है, तो उस आधार पर पारित कोई भी आदेश टिक नहीं सकता।

ध्रुव मेहता ने जोर देकर कहा, क्या यह आदेश भारत की अखंडता और संप्रभुता के हित में है? क्या नीट जैसी परीक्षा भारत की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करती है?” उन्होंने आगे तर्क दिया कि, प्लेटफॉर्म पर सैकड़ों अन्य गतिविधियां चल रही हैं बिजनेस, मार्केटिंग और सामान्य संवाद। व्हाट्सएप पर भी लोग खुलेआम मार्केटिंग करते हैं, फिर केवल टेलीग्राम को निशाना क्यों बनाया जा रहा है?

टेलीग्राम ने यह भी कहा कि समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देश की पुष्टि करने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने इसे लागू करते हुए व्यापक प्रतिबंध लगा दिया। याचिकाकर्ता की दलील थी कि, 150 मिलियन से अधिक भारतीय उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को केवल कुछ गलत तत्वों की वजह से रोका जाना उचित नहीं है।

सरकार ने दिया गोपनीयता का हवाला

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मजबूत दलील देते हुए टेलीग्राम की गोपनीयता नीति का हवाला दिया और कहा कि अकाउंट डिलीट करने पर सारे मैसेज, मीडिया और डेटा स्थायी रूप से मिट जाते हैं। इससे जांच एजेंसियों के लिए सबूत इकट्ठा करना मुश्किल हो जाता है।

तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि, विभिन्न रिपोर्टों में टेलीग्राम को आतंकवादी गतिविधियों, चाइल्ड पोर्नोग्राफी, ड्रग ट्रैफिकिंग और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए पसंदीदा प्लेटफॉर्म बताया गया है। इसकी आर्किटेक्चरल डिजाइन एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और सीमित मॉडरेशन के कारण सुरक्षा एजेंसियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

मेहता ने कहा कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समीक्षा समिति ने टेलीग्राम के अधिकारियों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया था और उनकी दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया गया था। यह मामला सार्वजनिक हित से जुड़ा है।  छात्रों की भावनाओं और उनके वर्षों की मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना राष्ट्र की प्राथमिकता है।

कोर्ट ने पूछे कई सवाल

सुनवाई के दौरान जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने दोनों पक्षों से कई प्रासंगिक सवाल पूछे। अदालत ने सरकार से पूछा, हम 150 मिलियन लोगों के अधिकारों को केवल इसलिए कैसे रोक सकते हैं, क्योंकि कुछ छात्र परीक्षा दे रहे हैं? क्या एक व्यक्ति या समूह के अधिकारों की रक्षा के लिए दूसरे नागरिकों के अधिकारों को कुचला जा सकता है?” तुषार मेहता ने जवाब दिया कि ,जब किसी क्षेत्र में इंटरनेट प्रतिबंध लगाया जाता है, तो आमतौर पर केवल 10 प्रतिशत लोग ही गलत गतिविधियों में शामिल होते हैं, लेकिन पूरे सिस्टम पर असर पड़ता है।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जो हुआ, हम सब जानते हैं। बहुत सारे छात्रों पर इसका असर पड़ा। न्यायालय ने सेक्शन 69ए (Information Technology Act) के तहत दी गई शक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को यह शक्ति उपलब्ध है, लेकिन इसका उपयोग आनुपातिक होना चाहिए। क्या पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करना एक घटना को रोकने का उचित तरीका है? अदालत ने लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति और सार्वजनिक हित को भी महत्वपूर्ण माना।

सहयोग को तैयार हुआ टेलीग्राम

दिल्ली उच्च न्यायालय के इस फैसले ने केंद्र सरकार को राहत दी है। यह फैसला परीक्षा सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है। टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स को अब अपनी मॉडरेशन नीतियों को और सख्त बनाना पड़ सकता है, खासकर भारत जैसे बड़े बाजार में।

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विशेषज्ञों का मानना है कि, यह मुकदमा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन की बहस को आगे बढ़ाएगा। टेलीग्राम ने दावा किया था कि, वह गैर-कानूनी सामग्री को हटाने के लिए सहयोग करने को तैयार है, लेकिन सरकार ने तर्क दिया कि प्लेटफॉर्म की मूल संरचना ही सहयोग की राह में बाधा बनती है।

छात्र समुदाय इस फैसले का स्वागत कर रहा है। नीट जैसी परीक्षाएं न केवल व्यक्तिगत भविष्य बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था से भी जुड़ी हैं। पेपर लीक जैसी घटनाएं हजारों योग्य छात्रों के सपनों को चूर कर देती हैं, इसलिए सरकार का यह कदम और अदालत का समर्थन परीक्षा सुधार की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।

अंतिम आदेश पर विचार करेगा कोर्ट

हालांकि, यह अस्थायी बैन था, लेकिन अदालत ने अंतिम आदेश पर भी विचार करने की बात कही है।  भविष्य में ऐसे मामलों में सरकारों को और अधिक पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी होगी। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी कि वे अवैध गतिविधियों का अड्डा न बनें। यह मामला केवल टेलीग्राम और सरकार के बीच नहीं, बल्कि डिजिटल युग में नियंत्रण, गोपनीयता और सुरक्षा के नाजुक संतुलन का प्रतीक बन गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला इस संतुलन को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो छात्रों के भविष्य की रक्षा के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को जवाबदेह बनाने का संदेश देता है।

 

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