इस एक गलती ने ले ली थी दिग्गज भारतीय क्रिकेटर की जान, आज भी आंखें नम कर देता है वो दर्दनाक पल

नई दिल्ली। देश ही नहीं दुनिया भर में पसंद किया जाने वाला क्रिकेट जहां एक तरफ अनगिनत खिलाड़ियों को शोहरत, दौलत और बेशुमार प्यार से मालामाल कर देता है, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे दर्दनाक पल भी देता है जो भुलाए नहीं भूलता। ये पल इतिहास के पन्नों पर काले अक्षरों में दर्ज हो जाते हैं। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में भी एक ऐसी ही घटना घटी थी जो आज भी हर क्रिकेट प्रेमी के दिल को झकझोर देती है। यह कहानी है पूर्व भारतीय क्रिकेटर रमन लांबा की, जिनकी मौत ने पूरे क्रिकेट जगत को स्तब्ध कर दिया था और सुरक्षा उपकरणों की अहमियत को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था।

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भारतीय क्रिकेट के चमकते सितारे थे रमन लांबा

रमन लांबा भारतीय क्रिकेट के उन चमकते सितारों में से एक थे, जिन्होंने अपनी बल्लेबाजी से देश और दुनिया में खूब नाम कमाया। वे एक आक्रामक और प्रतिभाशाली बल्लेबाज के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से 4 टेस्ट मैच और 32 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 102 रन दर्ज हैं। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 783 रन बनाए, जिसमें 1 शतक और 6 अर्धशतक शामिल हैं।

Cricketer Raman Lamba

घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड और भी शानदार रहा। उन्होंने 121 प्रथम श्रेणी मैचों में 8776 रन बनाए, जो उनकी बल्लेबाजी क्षमता और निरंतरता का प्रमाण है। लिस्ट ए क्रिकेट में भी उनके खाते में 2543 रन दर्ज हैं। इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि, रमन लांबा एक बेहद काबिल और अनुभवी क्रिकेटर थे। अगर उनका करियर लंबा होता तो शायद वे भारतीय क्रिकेट के इतिहास में और बड़ा नाम बनाते।

साल 1998 में रमन लांबा अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के बाद बांग्लादेश में एक लीग टूर्नामेंट खेल रहे थे। वे अबहानी क्रीड़ा चक्र टीम का हिस्सा थे। बांग्लादेश में उनकी लोकप्रियता काफी अधिक थी और वहां के दर्शक उनकी बल्लेबाजी के दीवाने थे। एक अनुभवी और स्थापित क्रिकेटर के रूप में उनकी उपस्थिति टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी, लेकिन शायद किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि यह दौरा उनके जीवन का आखिरी क्रिकेट सफर साबित होगा।

हेलमेट न पहनना बना बड़ी गलती

फरवरी 1998 का वह दिन क्रिकेट इतिहास के सबसे दुखद दिनों में से एक बन गया। एक मुकाबले के दौरान रमन लांबा को शॉर्ट लेग की पोजिशन पर फील्डिंग की जिम्मेदारी दी गई। शॉर्ट लेग क्रिकेट की सबसे खतरनाक फील्डिंग पोजिशनों में से एक मानी जाती है क्योंकि फील्डर बल्लेबाज के बेहद करीब खड़ा होता है और तेज शॉट की स्थिति में बचने का समय बेहद कम होता है। ऐसी पोजिशन पर हेलमेट पहनना न केवल जरूरी बल्कि अनिवार्य माना जाता है।

उस ओवर में कुछ ही गेंदें बाकी थीं। बताया जाता है कि, टीम के कप्तान ने रमन लांबा को हेलमेट पहनने की सलाह दी थी। कप्तान को शायद यह एहसास था कि, इस पोजिशन पर बिना हेलमेट के खड़े होना कितना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन रमन लांबा ने यह सोचकर हेलमेट नहीं पहना कि ओवर में केवल कुछ ही गेंदें बची हैं और इतनी कम गेंदों के लिए हेलमेट पहनने की जरूरत नहीं है। उनका यह छोटा सा फैसला, जो शायद उन्हें उस समय बहुत मामूली लगा, बाद में उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी और आखिरी गलती साबित हुआ।

सिर पर गेंद लगने से हुआ हादसा

मैच के दौरान बल्लेबाज ने एक जोरदार और तेज शॉट खेला। गेंद इतनी तेजी से आई कि, रमन लांबा के पास बचने का कोई मौका नहीं था। गेंद सीधे उनके सिर पर जाकर लगी। इस अचानक और जोरदार चोट से वे तुरंत मैदान पर गिर पड़े। मैदान पर मौजूद खिलाड़ी, अधिकारी और दर्शक सभी सकते में आ गए।

Cricketer Raman Lamba

शुरुआत में ऐसा लगा कि, चोट उतनी गंभीर नहीं है और वे जल्द ही ठीक हो जाएंगे,   लेकिन कुछ समय बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। जब डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि सिर पर लगी इस गंभीर चोट के कारण उनके मस्तिष्क में खून जमने लगा था। यह एक बेहद खतरनाक और जानलेवा स्थिति थी। इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद भी ली गई। हर संभव कोशिश की गई कि, इस प्रतिभाशाली क्रिकेटर की जान बचाई जा सके। लेकिन इतनी गंभीर चोट के सामने डॉक्टरों की सारी कोशिशें नाकाम रहीं।

शोक में डूबा क्रिकेट जगत

तमाम कोशिशों और इलाज के बावजूद रमन लांबा को बचाया नहीं जा सका। 23 फरवरी 1998 को उनका निधन हो गया। उनकी मौत की खबर जैसे ही फैली, पूरा क्रिकेट जगत शोक में डूब गया। भारत में उनके परिवार, दोस्त, साथी खिलाड़ी और प्रशंसक सभी स्तब्ध रह गए। एक ऐसे खिलाड़ी का इस तरह अचानक चले जाना जिसने अपनी बल्लेबाजी से लाखों दिल जीते थे, किसी के लिए भी स्वीकार करना आसान नहीं था।

रमन लांबा की उम्र उस समय केवल 38 वर्ष थी। जीवन के इस पड़ाव पर जब एक इंसान के पास अनुभव भी होता है और जोश भी, तब उनका इस दुनिया से चले जाना क्रिकेट जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति थी।

 

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