UP में बिजली बिल पर बवाल: ऊर्जा मंत्री ने UPPCL चेयरमैन को लिखा पत्र, पूछा- ‘बिना अनुमति कैसे लिया फैसला’

लखनऊ। इस समय उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है, ऊपर से भयंकर बिजली की कटौती हो रही है, साथ ही बिजली के बिल में 10 प्रतिशत का सरचार्ज लगा दिया गया, जो अब एक बड़े सियासी और प्रशासनिक विवाद में तब्दील हो गया है। उत्तर प्रदेश उपभोक्ता परिषद द्वारा इस फैसले पर तीखी आपत्ति जताने और मामले को विद्युत नियामक आयोग की चौखट तक पहुंचाने के बाद अब सूबे के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपना लिया है।

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10% लगाया सरचार्ज

जानकारी के मुताबिक, स्मार्ट मीटर विवाद दूर करने के दौरान विभाग ने बिजली के बिलों पर 10 प्रतिशत ‘फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज’  यानी अतिरिक्त अधिभार लगा दिया, जिसका जनता और विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया।

Energy Minister AK Sharma

अब इस पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस मनमाने फैसले से नाराज ऊर्जा मंत्री ने विभाग के चेयरमैन को पत्र लिखकर न सिर्फ जवाब तलब किया है, बल्कि पूरी कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में इस पत्र के सामने आने के बाद से हड़कंप मच गया है।

चेयरमैन को लिखा पत्र

ऊर्जा मंत्री ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन आशीष गोयल को बेहद सख्त लहजे में पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने सीधे तौर पर चेयरमैन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया और पूछा कि, जून 2026 के बिजली बिलों में उपभोक्ताओं पर चोरी-छिपे 10 फीसदी का अतिरिक्त सरचार्ज थोपने का यह बड़ा और संवेदनशील निर्णय उनकी जानकारी और लिखित अनुमति के बिना कैसे और किसके इशारे पर ले लिया गया?

मंत्री ने अपने पत्र में गहरी नाराजगी जताते हुए लिखा कि, इतने महत्वपूर्ण और नीतिगत फैसले, जिसका सीधा वित्तीय असर उत्तर प्रदेश के करोड़ों आम और गरीब उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है, उसकी भनक तक विभागीय मंत्री को क्यों नहीं लगने दी गई? उन्होंने हैरान करने वाला खुलासा करते हुए कहा कि, विभाग के इस मनमाने फैसले की जानकारी उन्हें किसी सरकारी फाइल या अधिकारी के माध्यम से नहीं, बल्कि मीडिया और दैनिक समाचार पत्रों की खबरों से मिली। ऊर्जा मंत्री ने इसे प्रशासनिक मर्यादा और स्थापित सरकारी प्रक्रिया का खुला उल्लंघन करार दिया है।

सख्त अल्टीमेटम दिया

प्रशासनिक तालमेल के इस बड़े अभाव पर सख्त रुख अपनाते हुए ऊर्जा मंत्री ने कॉरपोरेशन के चेयरमैन को भविष्य के लिए कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट और दो टूक निर्देश दिया है कि, भविष्य में जनता से जुड़े या राजस्व को प्रभावित करने वाले किसी भी छोटे-बड़े निर्णय को लागू करने से पहले विभागीय मंत्री को न सिर्फ अवगत कराना होगा, बल्कि उसकी अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

एके शर्मा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि, उनके इस निर्देश को केवल एक सामान्य पत्र न माना जाए, बल्कि इसे शासन का आदेश  मानते हुए तत्काल प्रभाव से इसका शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, अधिकारियों के ऐसे मनमाने और तानाशाही रवैये वाले फैसलों से सीधे तौर पर सरकार की जनहितैषी छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और जनता के बीच यह गलत संदेश जाता है कि, सरकार महंगाई बढ़ा रही है, जबकि सरकार को इस फैसले की जानकारी ही नहीं होती।

संविदा कर्मियों की छंटनी का भी मुद्दा उठाया

बिजली की दरों में बढ़ोतरी के अलावा ऊर्जा मंत्री ने इस पत्र के जरिए विभाग के एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को भी उठाया है। ये मुद्दा है कुशल और अनुभवी संविदा कर्मचारियों की कथित छंटनी। उन्होंने कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, उनके द्वारा बार-बार मौखिक और लिखित रूप से मना किए जाने के बावजूद बिजली विभाग में बरसों से अपनी सेवाएं दे रहे अनुभवी तकनीकी कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का सिलसिला लगातार जारी है।

मंत्री ने अपने दावे को पुख्ता करने के लिए पत्र में उदहारण भी पेश किया। उन्होंने बताया कि, सहारनपुर जिले के बेहट डिवीजन में पिछले 15 वर्षों से काम कर रहे लाइनमैन सुंदर सैनी को बिना किसी ठोस वजह के नौकरी से हटा दिया गया और उनकी जगह पर एक नए और अनुभवहीन कर्मचारी की नियुक्ति कर दी गई। मंत्री ने इस विशिष्ट मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

ईमानदार बिजली कर्मियों की पीठ थपथपाई

उन्होंने चेतावनी दी कि, चिलचिलाती गर्मी के इस मौसम में हजारों कुशल कर्मचारियों को एक सोचे-समझे अभियान के तहत नौकरी से बाहर निकालना तकनीकी, प्रशासनिक और राजनैतिक दृष्टि से विभाग के लिए एक बेहद गंभीर और आत्मघाती समस्या पैदा कर सकता है।

Energy Minister AK Sharma

ऊर्जा मंत्री ने अपने पत्र में एक तरफ जहां भीषण गर्मी, लू और आंधी-तूफान जैसे बेहद कठिन व जानलेवा हालातों में मुस्तैदी से काम करने वाले ईमानदार बिजली कर्मियों की पीठ थपथपाई और उनके कार्य को सराहनीय बताया। वहीं, दूसरी तरफ उन्होंने उन कर्मचारियों को भी आड़े हाथों लिया जिनकी घोर लापरवाही के कारण जनता को बिजली संकट का सामना करना पड़ा।

उन्होंने लिखा कि, कुछ गैर-जिम्मेदार और कामचोर कर्मचारियों के कारण पूरी सरकार की छवि धूमिल हो रही है। मंत्री ने ऐसे लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि, विभाग की आगामी ट्रांसफर नीति में ऐसे दागी मामलों को विशेष तौर पर ध्यान में रखा जाए और इन्हें दंडित किया जाए।

समीक्षा बैठक में नहीं आये चेयरमैन

पत्र के सबसे अंतिम और सबसे विस्फोटक हिस्से में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने यूपीपीसीएल के चेयरमैन आशीष गोयल की व्यक्तिगत कार्यशैली और उनकी प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बेहद तीखे और गंभीर सवाल खड़े किए। मंत्री ने याद दिलाया कि, मई के महीने में जब पूरे प्रदेश में भीषण आंधी-तूफान और लू के कारण बिजली आपूर्ति का बुनियादी ढांचा चरमरा गया था और चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ था, तब स्थिति की समीक्षा के लिए एक आपातकालीन और तत्काल बैठक बुलाई जानी आवश्यक थी।

मंत्री ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, जब उस संकट काल में समीक्षा बैठक के लिए चेयरमैन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो पता चला कि, वे मुख्यालय में मौजूद नहीं है और कई दिनों तक राज्य से बाहर रहे। इस अत्यंत आपातकालीन स्थिति में विभागीय मंत्री को स्वयं आगे बढ़कर पूरी बैठक को ऑनलाइन आयोजित करना पड़ा। मंत्री ने संकट के समय मुख्यालय छोड़ने को जनहित के खिलाफ और एक बेहद गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताया। उन्होंने चेयरमैन को कड़ा निर्देश जारी किया है कि भविष्य में मुख्यालय छोड़ने या लखनऊ से बाहर जाने से पहले वे अनिवार्य रूप से ऊर्जा मंत्री को इसकी लिखित जानकारी देंगे।

 

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