
चमोली। अपनी अलौकिक सुन्दरता के लिए दुनिया भर में मशहूर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां नौ जून दिन मंगलवार की देर शाम एक निहंग सिख श्रद्धालु रहस्यमय परिस्थितियों में अचानक लापता हो गए। लापता श्रद्धालु की पहचान निहंग गब्बर सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
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चलाया जा रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
इस रहस्यमय गुमशुदगी की खबर मिलते ही चमोली प्रशासन और वन विभाग में हड़कंप मच गया। फिलहाल, लापता निहंग श्रद्धालु की सुरक्षित तलाश के लिए वन विभाग और राज्य आपदा प्रतिवादन बल की संयुक्त टीमों द्वारा समूचे दुर्गम घाटी क्षेत्र में युद्धस्तर पर एक सघन सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

यह मामला महज एक आम पर्यटक या श्रद्धालु के रास्ता भटकने या लापता होने का नहीं है, बल्कि इस घटनाक्रम में एक ऐसा बेहद चौंकाने वाला और सूक्ष्म मोड़ आ गया है, जिसने पुलिस, खुफिया एजेंसियों और वन विभाग के अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए। दरअसल, जब लापता श्रद्धालु के दिए गए दस्तावेजों और जानकारियों की बारीकी से जांच की गई, तो एक ऐसी पहेली सामने आई जिसने सबको हैरान कर दिया।
पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो बीती 9 जून को निहंग गब्बर सिंह फूलों की घाटी की ऐतिहासिक और खूबसूरत वादियों में घूमने निकले थे। उन्होंने घाटी के मुख्य प्रवेश द्वार पर वन विभाग के सरकारी एंट्री रजिस्टर में बाकायदा अपना नाम, पता, आधार कार्ड की जानकारी और मोबाइल नंबर दर्ज कराया था। इस औपचारिक कागजी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद वे घाटी के खूबसूरत और संकरे ट्रेकिंग रूट पर आगे बढ़ गए। फूलों की घाटी का नियम है कि, दिनभर घूमने के बाद सभी पर्यटकों को शाम होने से पहले बेस कैंप या मुख्य द्वार पर वापस लौटना होता है।
नहीं दर्ज हुआ एक्जिट
लेकिन, जब 9 जून की शाम ढलने लगी और सन्नाटा पसरने लगा, तब भी निहंग गब्बर सिंह वापस बेस कैंप नहीं लौटे। वन विभाग के कर्मचारियों ने जब एंट्री रजिस्टर का मिलान किया, तो पाया कि गब्बर सिंह का एग्जिट दर्ज नहीं हुआ है। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए वन विभाग के प्रशासन में तुरंत हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए बिना एक पल गंवाए वन विभाग की टीम और एसडीआरएफ के जवानों को तुरंत अलर्ट किया गया।
9 जून की ही देर रात तक रेस्क्यू टीमों ने टॉर्च और आधुनिक उपकरणों के सहारे घाटी के अत्यंत दुर्गम, पथरीले रास्तों और संभावित खतरनाक स्थानों पर भारी बारिश और ठंड के बीच सघन खोजबीन अभियान चलाया, लेकिन रात के घने अंधेरे में टीमों को कोई सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद अगले दिन, यानी 10 जून की सुबह की पहली किरण के साथ ही रेस्क्यू टीमों ने दोबारा जांच अभियान शुरू किया, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला।
तीन साल पहले ही घर से गायब हो गया था निहंग श्रद्धालु
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच असली चौंकाने वाली तस्वीर तब सामने आई , जब वन विभाग के अधिकारियों ने गब्बर सिंह को ढूंढने के लिए उनके द्वारा रजिस्टर में दर्ज कराई गई जानकारियों और संपर्क सूत्रों की तस्दीक करना शुरू किया। फूलों की घाटी के वन क्षेत्राधिकारी चेतन कांडपाल ने इस संबंध में मीडिया को एक बेहद हैरान करने वाली आधिकारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्य प्रवेश द्वार पर श्रद्धालु द्वारा जो मोबाइल नंबर लिखवाया गया था, वह जांच में पूरी तरह से गलत और मिसमैच पाया गया।
जब वन अधिकारियों ने उस लिखे हुए नंबर पर संपर्क किया, तो फोन उठाने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि जिस निहंग गब्बर सिंह की तलाश उत्तराखंड की वादियों में की जा रही है, वह व्यक्ति 3 साल पहले ही घर छोड़कर जा चुका है। उसके परिवार को भी उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
शुरुआत में वन विभाग को लगा कि शायद नंबर गलत होने की वजह से कोई गलतफहमी पैदा हो रही है, लेकिन कहानी का यह मोड़ यहीं खत्म नहीं हुआ। मामले की तह तक जाने के लिए वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने तुरंत उस आधार कार्ड के विवरण का सहारा लिया, जिसे गब्बर सिंह ने प्रवेश करते समय रजिस्टर में दर्ज कराया था। जब उस आधिकारिक विवरण के जरिए सरकारी डेटाबेस और हरियाणा पुलिस के रिकॉर्ड से गहनता से तस्दीक की गई, तो आधिकारिक तौर पर भी यह 100 फीसदी सच साबित हो गया।
सतर्क हुई एजेंसियां और प्रशासन
आधिकारिक रिकॉर्ड से यह पूरी तरह साफ हो गया कि हरियाणा के रहने वाले निहंग गब्बर सिंह वास्तव में पिछले 3 सालों से अपने घर-परिवार से दूर थे और लापता चल रहे थे। इस पुख्ता और आधिकारिक खुलासे ने चमोली प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं कि जो व्यक्ति पिछले तीन सालों से हर जगह गुमशुदा था, वह अचानक 9 जून को उत्तराखंड की इस बेहद सुरक्षित और प्रतिबंधित वन क्षेत्र की वादियों में क्यों आया है।

इस सनसनीखेज खुलासे और शुरुआती जांच के आधार पर वन अधिकारियों और स्थानीय पुलिस का यह मानना है कि 3 साल पहले लापता हुए गब्बर सिंह 9 जून को अचानक फूलों की घाटी पहुंचे थे। वहां उन्होंने एक आम नागरिक और श्रद्धालु की तरह बकायदा नियमों का पालन करते हुए अपनी एंट्री तो कराई, लेकिन इसके बाद जब वे घाटी के घने और विस्तृत वन क्षेत्र के भीतर घूमने गए, तो वहां से वे एक बार फिर उसी तरह रहस्यमय ढंग से ओझल हो गए, जैसे 3 साल पहले अपने घर से हुए थे।
सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या वे जानबूझकर दोबारा गायब हुए हैं, या फिर घाटी के किसी दुर्गम रास्ते, गहरी खाई या घने जंगलों में उनके साथ कोई प्राकृतिक हादसा पेश आया है?
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