कर्नाटक हत्याकांड: जमीन विवाद पर एक परिवार के 5 सदस्यों समेत 6 को उतारा मौत के घाट

कर्नाटक। कर्नाटक के विजयपुरा जिले में जमीन विवाद को लेकर हुई बर्बर हिंसा से पूरे क्षेत्र में सनसनी फ़ैल गई है। जिले के चडाचन पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत गोविंदपुरा गांव में शुक्रवार दोपहर एक ही परिवार के पांच सदस्यों समेत कुल छह लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। इस घटना में दो अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। हमलावरों ने हंसिया और अन्य धारदार हथियारों का इस्तेमाल कर इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद पूरे गांव में भय और तनाव का माहौल छा गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

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ये हैं मृतकों के नाम

पुलिस के अनुसार यह वारदात शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे से 2:30 बजे के बीच हुई। मृतकों की पहचान दुंडप्पा रेवनसिद्दप्पा निराले (65), शिवपुत्र रेवनसिद्दप्पा निराले (58), चंद्रकांत उर्फ चंदू रेवनसिद्दप्पा निराले (55), राहुल शिवपुत्र निराले (25), समर्थ शिवपुत्र निराले (23) और शब्बीर बाबूसाब अत्तर (45) के रूप में की गई है। इनमें अधिकांश एक ही परिवार के सदस्य हैं।

killing of 6 people

गंभीर रूप से घायल हुए अरविंद कटागे (72) और जेसीबी ऑपरेटर संदीप माने (33) को विजयपुरा शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों ने दोनों की हालत को गंभीर बताते हुए कहा है कि उनकी जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

लंबे समय से चल रहा था जमीन विवाद

प्रारंभिक जांच से पता चला है कि, इस सामूहिक हत्याकांड की असली वजह 25 एकड़ जमीन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद है। पुलिस अधीक्षक लक्ष्मण निंबर्गी ने मीडिया को बताया कि, निराले परिवार ने हाल ही में नीवरगी के तेली परिवार से यह जमीन खरीदी थी। हालांकि, यह जमीन पिछले करीब 15 वर्षों से विभिन्न विवादों में फंसी हुई थी। तेली परिवार इस जमीन पर कब्जा और खेती दोनों ही नहीं कर पा रहा था। स्वामित्व, कब्जे और पुराने दावों को लेकर दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी गहरी होती गई।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जमीन के मालिकाना हक को लेकर कई बार कोर्ट-कचहरी भी हो चुकी थी। कई वर्षों से यह मामला लंबित था। हाल ही में जब निराले परिवार के सदस्य खरीदी गई जमीन पर कब्जा लेने और कुछ कार्य शुरू करने पहुंचे, तभी विरोधी पक्ष के लोगों ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। हमलावरों की संख्या और उनकी तैयारी दोनों ही काफी थी। उन्होंने धारदार हथियारों से पीड़ितों पर लगातार वार किए।

दूर-दूर तक सुनाई दी चीख पुकार

घटना की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि, कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि घायलों की चीख-पुकार दूर तक सुनाई दे रही थी।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि, इस घटना का संबंध वर्ष 2015 में हुए एक हत्या मामले से भी हो सकता है। उस समय शिवानंद पाटिल नामक एक युवक की हत्या हुई थी, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव और दुश्मनी और गहरी हो गई थी। पुलिस का कहना है कि, पुराने विवाद और नई जमीन खरीद के बाद उत्पन्न स्थिति ने मिलकर इस हिंसक रूप को लिया। हालांकि, अभी तक इस संबंध में ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं, लेकिन जांच की दिशा इस ओर भी है।

हंसिया-कुल्हाड़ी में की गई हत्या

घटना स्थल पर पहुंची पुलिस टीमों ने बताया कि, हमले में हंसिया, कुल्हाड़ी और अन्य धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ है। कुछ स्थानीय लोगों ने गोलीबारी की भी आशंका जताई थी, लेकिन प्रारंभिक जांच में शवों पर गोली लगने के कोई स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं। मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारण, वार की संख्या और इस्तेमाल किए गए हथियारों की पुष्टि हो सकेगी।

पुलिस की जांच और छानबीन

विजयपुरा पुलिस ने मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। कई टीमों को आरोपियों की तलाश में लगाया गया है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि, सभी संभावित कोणों से जांच की जा रही है। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी जल्द गिरफ्तार किए जाएंगे।

घटना के बाद गोविंदपुरा गांव और आसपास के इलाकों में भारी तनाव है। लोग घरों के अंदर रहने को मजबूर हैं। महिलाएं और बच्चे डर के साए में हैं। प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश की है। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं और स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन विवाद की समस्या

यह घटना कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में जमीन विवादों की गंभीर समस्या को उजागर करती है। कई बार छोटी-छोटी जमीन के टुकड़ों को लेकर दशकों पुरानी दुश्मनी चली आती है। कोर्ट के फैसले के बावजूद कब्जे और स्वामित्व को लेकर झगड़े होते रहते हैं। राजनीतिक संरक्षण, स्थानीय गुटबंदी और आर्थिक हित भी इन विवादों को जटिल बनाते हैं। विजयपुरा जिला कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां जमीन न सिर्फ आजीविका का साधन है बल्कि सम्मान और पहचान का प्रतीक भी मानी जाती है। ऐसे में छोटा सा विवाद भी कभी-कभी बड़े खूनखराबे का कारण बन जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि, पिछले कई वर्षों से इस जमीन को लेकर दोनों परिवारों के बीच अनबन चली आ रही थी। कई बार मध्यस्थता के प्रयास भी हुए, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। निराले परिवार ने जब कानूनी तरीके से जमीन खरीदकर कब्जा लेने की कोशिश की, तो विरोधी पक्ष ने इसे अपनी संपत्ति पर हमला मान लिया।

इलाके में भय का माहौल

इस घटना ने पूरे जिले में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह विभाग ने भी घटना पर नजर रखी हुई है। उच्च स्तर पर रिपोर्ट मांगी गई है।

पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तरह की अफवाहों पर नियंत्रण रखा जाए और सांप्रदायिक या जातीय रंग न दिया जाए। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस घटना ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया है। कई परिवार रिश्तेदारी में जुड़े हैं, जिससे दुख की लहर पूरे इलाके में फैली हुई है। अस्पताल में घायलों से मिलने पहुंचे रिश्तेदार भावुक नजर आए। उन्होंने न्याय की मांग की है।

यह सामूहिक हत्याकांड न केवल एक आपराधिक घटना है बल्कि ग्रामीण भारत में लंबे समय से चले आ रहे जमीन-जायदाद विवादों की विकरालता का उदाहरण भी है। पुलिस की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल पूरा प्रशासन इस मामले पर सतर्क है। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना और दोषियों को सजा दिलाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

 

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