
उत्तर कोरिया। दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी नजर आ रही है और शांति की हर कोशिश धुंधली पड़ती जा रही है। एक तरफ मध्य पूर्व में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़ा संघर्ष अपने सबसे भीषण और विनाशकारी दौर में पहुंच चुका है, जहां मिसाइलों की गूंज ने पूरी मानवता को सहमा दिया है। ठीक इसी भयावह माहौल के बीच, एशिया के सुदूर पूर्वी छोर पर उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग-उन ने बैलिस्टिक मिसाइल दागकर वैश्विक सनसनी फैला दी है।
इसे भी पढ़ें- रूस-युक्रेन की जंग में अब उत्तर कोरिया ने की एंट्री, दक्षिण कोरिया ने दुनिया को दे डाली बड़ी चेतावनी
अमेरिका के खिलाफ खोल सकता है मोर्चा!

यह परीक्षण महज एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि जलते हुए वैश्विक हालातों के बीच जलती आग में घी डालने जैसा है। जब पूरी दुनिया की नजरें गाजा और लेबनान की सरहदों पर टिकी थीं, तब किम जोंग-उन ने प्रशांत महासागर के आसमान में आग का गोला छोड़कर यह साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के लिए एक नया और कहीं अधिक घातक मोर्चा खोलने को तैयार हैं। ‘फ्रीडम शील्ड’ की धमक के बीच उत्तर कोरिया का यह आक्रामक कदम इस बात का संकेत है कि प्योंगयांग अब किसी भी बड़े टकराव से पीछे हटने के मूड में नहीं है।
कूटनीति के गलियारों में खलबली
जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय से आई एक आपातकालीन सूचना ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में खलबली मचा दी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उत्तर कोरिया ने संभवतः एक शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसका रुख सी ऑफ जापान की ओर था। इस लॉन्च के तुरंत बाद जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं।
यह मिसाइल लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने अपना 11 दिवसीय वार्षिक सैन्य अभ्यास फ्रीडम शील्ड शुरू किया है। उत्तर कोरिया दशकों से इन अभ्यासों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ एक डेथ वारंट और सीधे हमले की तैयारी मानता आया है। हालांकि सियोल और वाशिंगटन का बार-बार यही तर्क रहता है कि ये अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक हैं, लेकिन किम जोंग-उन के शासन के लिए यह सीधे तौर पर युद्ध का निमंत्रण है।
किम यो-जोंग ने जारी किया तीखा बयान
इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा कुछ दिन पहले ही लिखी जा चुकी थी, जब किम जोंग-उन की बेहद प्रभावशाली और शक्तिशाली बहन किम यो-जोंग ने एक तीखा बयान जारी किया था। उन्होंने इस सैन्य अभ्यास की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिका और दक्षिण कोरिया अपनी इन उकसावे वाली हरकतों से बाज नहीं आए, तो उन्हें ऐसे अकल्पनीय और भयानक परिणामों का सामना करना पड़ेगा जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। आज का यह मिसाइल परीक्षण किम यो-जोंग की उसी धमकी का जमीन पर उतरा हुआ हिस्सा जान पड़ता है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया अब केवल शब्दों से नहीं, बल्कि सक्रिय सैन्य कार्रवाई से अपनी बात कहने की रणनीति अपना चुका है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि उत्तर कोरिया ने यह समय बहुत ही चालाकी से चुना है। वर्तमान में मिडिल ईस्ट के हालात बेहद नाजुक हैं और अमेरिका अपनी पूरी सैन्य ताकत वहां झोंक चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की मिसाइलों को रोकने के लिए दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को हटाकर मिडिल ईस्ट भेज दिया गया है।
अमेरिका की यह मजबूरी दक्षिण कोरिया की सुरक्षा दीवार में एक बड़ा छेद कर चुकी है। किम जोंग-उन इसी कमजोरी को भांप चुके हैं। रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि यदि इस समय उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया के खिलाफ कोई भी सैन्य अभियान शुरू करता है, तो वह अत्यंत विध्वंसक रूप ले सकता है क्योंकि इस समय क्षेत्र में सुरक्षा कवच पहले की तुलना में कमजोर पड़ चुका है।
पूर्वी सागर की तरफ दागी मिसाइलें
प्योंगयांग का सरकारी मीडिया लगातार किम जोंग-उन की उन तस्वीरों को प्रसारित कर रहा है जिसमें वे नए और घातक हथियारों का निरीक्षण कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने चो ह्योन डिस्ट्रॉयर से रणनीतिक क्रूज़ मिसाइलों के परीक्षण का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण किया था और अपने जनरलों को आदेश दिया था कि देश के परमाणु युद्ध निवारक को हर हाल में विस्तार दिया जाए। उनके अनुसार, एक शक्तिशाली परमाणु मारक क्षमता ही एकमात्र तरीका है जिससे अमेरिका जैसे देशों को झुकाया जा सकता है। इससे पहले जनवरी के अंत में भी उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर की ओर छोटी दूरी की कई मिसाइलें दागी थीं, जिन्हें एक नए और बड़े कैलिबर वाले मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का हिस्सा बताया गया था।
बिगड़ सकता है वैश्विक शक्ति संतुलन
कुल मिलाकर, उत्तर कोरिया का यह कदम वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ने की एक बड़ी कोशिश है। एक तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध और दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट का महासंग्राम पहले से ही विश्व शांति को पटरी से उतार चुके हैं। अब एशिया के इस हिस्से में किम जोंग-उन की सक्रियता यह स्पष्ट कर रही है कि वे अमेरिका को हर मोर्चे पर घेरने की योजना पर काम कर रहे हैं। यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो ‘फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास के खत्म होने से पहले ही कोरियाई प्रायद्वीप में किसी बड़े सैन्य टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, जो न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक तबाही का मंजर लेकर आएगा। दुनिया अब इस डर में है कि क्या यह तीसरी विश्व युद्ध की आहट है।
इसे भी पढ़ें- अमेरिका से निपटने के लिए उत्तर कोरिया ने सेना को दिए परमाणु संपन्न 250 मिसाइल लॉन्चर



