यरूशलम। इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भ्रष्टाचार के मामले में क्षमादान देने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बार-बार की गई मांग पर कड़ा रुख अपनाया है। हर्ज़ोग ने स्पष्ट किया कि इजराइल की ‘गरिमा, स्वतंत्रता और संप्रभुता’ किसी भी कीमत पर बिकाऊ नहीं है। यह बयान ट्रंप द्वारा हर्ज़ोग पर किए गए उन मौखिक हमलों के जवाब में आया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्षमादान जारी न करने पर उन्हें “कमजोर” बताया था। हर्ज़ोग ने इन टिप्पणियों को इजराइली शासन और संप्रभुता के प्रतीकों पर सीधा हमला करार देते हुए कहा कि वह किसी भी दबाव या शोर-शराबे के बिना, स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से इस मामले पर विचार करेंगे।
दूसरी ओर, इस विवाद ने इजराइली राजनीति के भीतर भी तनाव पैदा कर दिया है। राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू को ट्रंप के इन हस्तक्षेपकारी बयानों के खिलाफ स्टैंड लेना चाहिए था। हालांकि, नेतन्याहू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने दिल की बात कहने का पूरा अधिकार है। नेतन्याहू ने अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे को राजनीतिक उत्पीड़न और बेतुका तमाशा बताते हुए हर्ज़ोग से खुद ही क्षमादान की अपील की है। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने ट्रंप से हस्तक्षेप के लिए संपर्क किया था, लेकिन यह जरूर माना कि ट्रंप जो कह रहे हैं, वह उनके मन की बात है। ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच उपजा यह आंतरिक संवैधानिक टकराव अब इजराइल और अमेरिका के कूटनीतिक संबंधों में एक नई बहस छेड़ चुका है।



