
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने शासन, प्रशासन और पार्टी संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए एक नई और प्रभावी व्यवस्था लागू की है। अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में समन्वय समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी कमान जिले के प्रभारी मंत्री के हाथों में होगी। इस कदम को आगामी चुनौतियों और कार्यकर्ताओं की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
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समन्वय समिति गठित
नई व्यवस्था के तहत हर जिले में एक समन्वय समिति काम करेगी। इस समिति की बैठक हर महीने अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी, जिसमें जिले के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और बीजेपी जिलाध्यक्ष मुख्य रूप से शामिल होंगे। शासन ने वर्ष 2026 के लिए एक गोपनीय मार्गदर्शिका भी जारी की है, जिसमें सरकारी सेवाओं और समस्याओं के निस्तारण के लिए समय-सीमा तय कर दी गई है।

7 दिनों के भीतर स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, स्थानीय विवाद और थाना-तहसील से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना अनिवार्य होगा। वहीं 15 दिनों के भीतर बजट और तकनीकी स्वीकृति से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं पर कार्रवाई पूरी करनी होगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी जाएगी रिपोर्ट
प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए एक कोर कमेटी का गठन किया जाएगा, जो मुख्य बैठक से पहले एजेंडा तय करेगी और लंबित परियोजनाओं की बारीकी से समीक्षा करेगी। बैठक में लिए गए सभी निर्णयों की रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी, ताकि विकास कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सके।
क्यों पड़ी इस व्यवस्था की जरूरत
योगी सरकार के पिछले कुछ वर्षों के कार्यकाल में यह शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं कि, सत्ता के गलियारों में बीजेपी कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि, कई विधायक और सांसदों को अपने ही कार्यकर्ताओं की समस्याओं के लिए धरने पर बैठना पड़ा था। पार्टी के भीतर की इस नाराजगी और कार्यकर्ताओं व प्रशासन के बीच की दूरी को पाटने के लिए सरकार ने यह ‘समन्वय कार्ड’ खेला है।
सपा ने उठाए सवाल
हालांकि इस नई व्यवस्था के लागू होते ही प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। राजनीतिक दल इस तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि, उत्तर प्रदेश पहले से ही पुलिस स्टेट बन चुका है। अब बीजेपी पदाधिकारियों को पुलिस की बैठकों में शामिल करने के निर्देश से पुलिस और अधिक बेलगाम हो जाएगी, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे।
बीजेपी ने किया बचाव
सपा के इस आरोप पर बीजेपी नेता राकेश त्रिपाठी ने बचा करते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, सपा की सरकार में पुलिस का काम केवल भैंस खोजने तक सीमित था। बीजेपी सरकार में जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान हमारी प्राथमिकता है। पार्टी और सरकार मिलकर काम कर रहे हैं ताकि जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
यह व्यवस्था जहां एक ओर कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर नौकरशाही पर लगाम कसने की एक कोशिश भी है। सीएम कार्यालय द्वारा सीधे निगरानी रखने से यह साफ है कि आने वाले समय में अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। क्या यह नया ‘समन्वय’ यूपी की राजनीति में बीजेपी के प्रति कार्यकर्ताओं के असंतोष को खत्म कर पाएगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
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