उत्तराखंड के समग्र विकास का मूल मंत्र ‘SANTULAN’: सीएम धामी

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के समग्र विकास का मूल मंत्र ‘SANTULAN’ बताते हुए कहा कि यह विचार समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में इस मंत्र को विस्तार से समझाया और बताया कि यह उत्तराखंड को आत्मनिर्भर, समावेशी और विकसित बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सीएम धामी ने 9 मार्च को गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया था। यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में 10.41 प्रतिशत अधिक है और इसे ‘संतुलन’ के आठ मूल मंत्रों पर आधारित बताया गया है।

मुख्यमंत्री ने खुद वित्त मंत्री के रूप में यह बजट पेश किया, जो राज्य के इतिहास में पहली बार बजट सत्र के पहले दिन ही प्रस्तुत किया गया।

‘SANTULAN’ मंत्र का विस्तार

सीएम धामी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, उत्तराखंड के समग्र विकास का मूल मंत्र ‘SANTULAN’ है। इस विचार के केंद्र में ऐसा विकास मॉडल है जिसमें समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि समावेशी विकास के माध्यम से अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय संसाधनों और सामर्थ्य को सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में निरंतर कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

नई सोच, नवाचार और आधुनिक तकनीक के साथ विकास को नई गति देने का प्रयास भी इसी दृष्टि का हिस्सा है।बजट भाषण और पोस्ट में ‘SANTULAN’ को अंग्रेजी शब्द ‘Balance’ (संतुलन) से जोड़कर आठ सूत्रीय मॉडल के रूप में परिभाषित किया गया है। प्रत्येक अक्षर एक प्रमुख सिद्धांत दर्शाता है

S – समावेशी विकास (Inclusive Development): समाज के हर वर्ग, विशेष रूप से गरीब, महिलाएं, युवा, किसान और पिछड़े क्षेत्रों के लोगों को साथ लेकर विकास।
A- आत्मनिर्भर: स्थानीय संसाधनों पर आधारित अर्थव्यवस्था, पर्यटन, कृषि और उद्योग को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता।
N – नई सोच: नवाचार, स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक और आधुनिक दृष्टिकोण से विकास की नई गति।
T – तीव्र विकास: इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन और आर्थिक वृद्धि दर को तेज करना।
U – उन्नत गांव एवं शहर: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संतुलित विकास, स्मार्ट गांव और शहरों का निर्माण।
L – लोक सहभागिता: जनता की भागीदारी से योजनाओं का क्रियान्वयन और पारदर्शिता।
A – आर्थिक शक्ति: राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना, निवेश आकर्षित करना।
N – न्यायपूर्ण व्यवस्था: सुशासन, पारदर्शिता और न्यायपूर्ण प्रशासन।

यह मॉडल बजट के हर प्रावधान में झलकता है, जहां सरकार ने विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया है।बजट का संदर्भ और महत्व9 मार्च को पेश बजट में मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि गठन के समय से राज्य की अर्थव्यवस्था 26 गुना बढ़कर 3.81 लाख करोड़ रुपये हो गई है। प्रति व्यक्ति आय 2,73,921 रुपये होने का अनुमान है। बजट में महिला सशक्तिकरण के लिए 19,692 करोड़ रुपये का जेंडर बजट, युवाओं की शिक्षा और कौशल विकास के लिए 12,457 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।

मुख्य क्षेत्रों में फोकस

स्वास्थ्य: अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के लिए 600 करोड़ रुपये।
आवास: पीएम आवास योजना के लिए 298.45 करोड़ रुपये।
पर्यटन, कृषि, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन पर विशेष जोर।
गड्ढा मुक्ति अभियान के लिए 400 करोड़ रुपये।
ग्रामीण विकास, पर्यटन और हरित ऊर्जा पर बड़े आवंटन।

सीएम धामी ने बजट को उत्तराखंड के भविष्य का रोडमैप बताया, जो केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि समग्र विकास की दिशा तय करने वाला है। उन्होंने कहा कि सरकार संकल्प से सिद्धि के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ रही है और विकल्प रहित संकल्प के साथ सबके विकास के लिए काम कर रही है।

सीएम धामी की एक्स पोस्ट को व्यापक समर्थन मिला है। कई यूजर्स ने इसे देवभूमि के लिए संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण बताया। यह पोस्ट बजट पेश होने के दो दिन बाद आई, जिससे विकास मॉडल पर जनता की राय और स्पष्ट हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘SANTULAN’ मॉडल उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए उपयुक्त है, जहां भौगोलिक चुनौतियां, प्रवास और संसाधनों की असमान वितरण बड़ी समस्या हैं। यह मॉडल समावेशी विकास से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, आत्मनिर्भरता से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत करने और नवाचार से युवाओं को जोड़ने पर केंद्रित है।

उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास राज्य को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ‘SANTULAN’ न केवल बजट का थीम है, बल्कि आने वाले वर्षों में राज्य की नीतियों का मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकता है। मुख्यमंत्री की इस सोच से उम्मीद है कि उत्तराखंड न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा, बल्कि सामाजिक न्याय और पर्यावरण संतुलन के साथ भी आगे बढ़ेगा।

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