
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के विमानन क्षेत्र में एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत होने वाली है। यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रालि (YIAPL) के सीईओ क्रिस्टोफ स्नेलमैन के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के लिए एयरोड्रोम लाइसेंस प्राप्त होने की महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद हुई है। बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को हवाईअड्डे की वर्तमान प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना का विस्तृत ब्यौरा दिया।
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सीएम ने जताया संतोष
गौरतलब है कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से लाइसेंस मिलना इस परियोजना के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसने वाणिज्यिक उड़ानों के संचालन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। मुख्यमंत्री ने परियोजना की गति पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। जेवर एयरपोर्ट न केवल उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयां देगा, बल्कि इसे वैश्विक लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी हब के रूप में भी स्थापित करेगा। अब पूरा ध्यान आगामी चरणों और ट्रायल ऑपरेशन्स पर केंद्रित है, ताकि क्षेत्र के निवासियों का अंतरराष्ट्रीय उड़ान का सपना जल्द साकार हो सके।
जल्द होगा उद्घाटन

आपको बता दें कि, ये मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने 6-7 मार्च को जेवर एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस प्रदान किया था। इससे पहले ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) से सुरक्षा मंजूरी मिल चुकी है। अब एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत और औपचारिक उद्घाटन की तारीख तय करने की प्रक्रिया में जुटा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि, परियोजना समयसीमा के अनुसार पूरी हो और यात्रियों को विश्वस्तरीय, सुरक्षित एवं आधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
चेक-इन और बोर्डिंग प्रक्रिया होगी फास्ट
YIAPL के सीईओ क्रिस्टोफ स्नेलमैन ने मुख्यमंत्री को बताया कि, पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल भवन तैयार हो चुका है। टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.35 लाख वर्ग मीटर है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए अलग-अलग लाउंज विकसित किए जा रहे हैं। एयरपोर्ट में कुल 48 चेक-इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन, 9 इमिग्रेशन काउंटर और 10 एयरब्रिज तैयार हैं। रनवे पर प्रति घंटे 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है।
यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए एयरपोर्ट पर सेल्फ बैगेज ड्रॉप, डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग और बायोमेट्रिक सिस्टम लागू की जा रही है। इससे चेक-इन और बोर्डिंग प्रक्रिया तेज और सहज होगी। परिसर में 28 विमान पार्किंग स्टैंड और अत्याधुनिक लॉजिस्टिक हब भी तैयार हो रहे हैं। पहले चरण में एयरपोर्ट की वार्षिक क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में इसे 3 करोड़, जबकि तीसरे और चौथे चरण में 7 करोड़ यात्रियों तक बढ़ाया जाएगा।
हाई-स्पीड ट्रेन से सीधे जुड़ेगा एयरपोर्ट
जेवर एयरपोर्ट को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाया गया है। परिसर में सौर ऊर्जा प्लांट, वर्षा जल संचयन सिस्टम और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। यह एयरपोर्ट न केवल एनसीआर क्षेत्र की हवाई क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (दिल्ली) पर बढ़ते दबाव को भी कम करेगा। स्विस कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल की तकनीकी विशेषज्ञता से विकसित यह प्रोजेक्ट PPP मॉडल पर आधारित है।
जेवर एयरपोर्ट एक अनोखी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। यह हाई-स्पीड ट्रेन (बुलेट ट्रेन) से सीधे जुड़ने वाला भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनेगा। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) की टीम ने हाल ही में यमुना अथॉरिटी अधिकारियों के साथ बैठक की और एयरपोर्ट के आसपास भूमिगत स्टेशन बनाने, एलाइनमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर चर्चा की। प्रारंभिक सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली के सराय कालेखा से नोएडा एयरपोर्ट तक का 70 किलोमीटर का सफर केवल 21 मिनट में पूरा हो सकेगा।
स्टेशन एक्सप्रेसवे के डिवाइडर पर एलिवेटेड ट्रैक से जुड़ेगा और आगे यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटर (GTC) तक जाएगा। दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में जेवर एयरपोर्ट पर दो स्टेशन प्रस्तावित हैं, एक नोएडा सेक्टर 148 में और दूसरा एयरपोर्ट के GTC में भूमिगत। यह कनेक्टिविटी NCR, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के लिए क्रांतिकारी साबित होगी।
पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन
एयरपोर्ट का एयरोड्रोम सिक्योरिटी प्रोग्राम वर्तमान में BCAS के पास समीक्षा के लिए है। मंजूरी मिलते ही सभी एजेंसियों के साथ समन्वय कर उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय की जाएगी। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च 2026 के अंत में एयरपोर्ट का उद्घाटन कर सकते हैं, जबकि वाणिज्यिक उड़ानें अप्रैल-मई 2026 से शुरू हो सकती हैं। पिछले कुछ महीनों में कई बार समयसीमा में बदलाव आया है, लेकिन अब एयरोड्रम लाइसेंस मिलने से प्रोजेक्ट तेजी पकड़ रहा है।

यह एयरपोर्ट न केवल हवाई यात्रा को बढ़ावा देगा, बल्कि आसपास के इलाकों में औद्योगिक, लॉजिस्टिक और रियल एस्टेट विकास को गति देगा। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में हजारों नौकरियां पैदा होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में जोर दिया कि परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी हो और उत्तर प्रदेश को एक नया एयरपोर्ट हब बनाने का सपना साकार हो।जेवर एयरपोर्ट भारत की उड़ान योजना और आत्मनिर्भर भारत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह एनसीआर के लिए दूसरा बड़ा हवाई अड्डा बनेगा और वैश्विक कनेक्टिविटी में योगदान देगा।
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