
लखनऊ। मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव का असर अब भारत पर भी पड़ने लगा है। यहां क्रूड ऑयल और एलपीजी गैस की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। दरअसल, ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को बुरी तरह से प्रभावित किया है। नतीजतन आयत निर्यात में काफी बाधा आ रही है।
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एलपीजी के 60% हिस्सा आयात करता है भारत
आपको बता दें कि, भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है, जिसमें से 85-90 प्रतिशत आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती है। ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष के चलते इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही या तो बाधित हो गई है या बहुत धीमी हो गई है। ऐसे में गैस की खेप भारत काफी देर से पहुंच रही है, परिणाम स्वरूप देश के कई हिस्सों समेत उत्तर प्रदेश में गैस की भारी किल्लत देखने को मिल रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदेश के विभिन्न जिलों में गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही सिलेंडर लेने के लिए लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि, लोग तड़के 3 बजे से ही अपने सिलेंडर लेकर एजेंसियों के बाहर डेरा डाल रहे हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ, नोएडा, बाराबंकी, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, उन्नाव, चंदौली, बुलंदशहर और देवरिया जैसे बड़े शहरों में यह समस्या अब एक विकराल रूप ले चुकी है।
दो युवकों में हुई मारपीट
गोरखपुर के पीपीगंज स्थित आशी इंडेन गैस एजेंसी के बाहर बुधवार को एक बेहद शर्मनाक वाकया सामने आया, यहां सिलेंडर बांटने के दौरान कतार लगे में लगे दो युवकों के बीच जबरदस्त मारपीट हो गई। लाइन में आगे घुसने के विवाद पर दोनों ने पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ही एक-दूसरे पर लात-घूंसे चलाए, जिसके बाद पुलिस को दोनों को हिरासत में ले लिया। सिद्धार्थनगर और महराजगंज की एजेंसियों पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। यहां भी भीड़ को नियंत्रित करना स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
महराजगंज के एक युवक का कहना है कि, वे सुबह 7 बजे गैस एजेंसी पर पहुंच गये थे, लेकिन तब तक 400 से अधिक लोग लाइन में खड़े थे। शादी-विवाह के इस सीजन में कामकाज छोड़कर सिलेंडर के लिए घंटों भटकना आम आदमी की मजबूरी बन गया है और कई लोग पिछले दस दिनों से गैस के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
लेना पड़ रहा लकड़ी के चूल्हे का सहारा
कानपुर के जाजमऊ स्थित समृद्धि गैस एजेंसी के बाहर भी महिलाएं घंटों इंतजार के बाद थक-हारकर जमीन पर बैठ गईं, जिनका कहना है कि, उन्हें कर्मचारी सिर्फ टाल-मटोल वाला जवाब दे रहे हैं। सरसौल एजेंसी के मालिक उमेश ने स्पष्ट किया कि उनके पास स्टॉक खत्म हो चुका है और ऊपर से सप्लाई न मिलने के कारण वे असमर्थ हैं।
उन्नाव में भी उपभोक्ताओं का कहना है कि, ऑनलाइन बुकिंग और ओटीपी के चक्र में फंसने के बाद भी उन्हें अंत में सिलेंडर खत्म का बोर्ड ही देखने को मिल रहा है, जिससे परेशान होकर कई लोगों ने लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। बाराबंकी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी इस स्थिति के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और सरकार पर अपनी विफलता का आरोप लगाया है।
होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे पर पड़ रहा असर
इस संकट का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग व्यवसाय पर भी पड़ रहा है, क्योंकि तेल कंपनियों ने स्टॉक घटने के कारण कॉमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी पर अघोषित रोक लगा दी है। राज्य में प्रतिदिन औसतन 5-6 लाख सिलेंडरों की खपत है और इस किल्लत के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि, प्रदेश में आपूर्ति सामान्य है और अफवाह फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी ओर, इंडियन ऑयल, भारत गैस और एचपी गैस जैसी कंपनियों ने मैसेज जारी कर उपभोक्ताओं से घबराहट में खरीदारी न करने की अपील की है।
डिलीवरी में देरी दे बढ़ी दिक्कत
इधर, कंपनियों का कहना है कि, उनके पर स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन डिलीवरी में देरी होने की वजह समस्या आ रही है। केंद्र सरकार ने भी रिफाइनरियों को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन गाजीपुर, फतेहपुर और मऊ जैसे जिलों में अब भी उपभोक्ता सिलेंडर के ऊपर बैठकर घंटों इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन भले ही स्थिति नियंत्रण में होने का दावा कर रहा हो, लेकिन धरातल पर अभी भी अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है, जिससे आम जनमानस की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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