खामेनेई की मौत पर यूपी में मातम, सड़कों पर उतरा सैलाब, ‘हर घर से हुसैनी निकलेगा’ के नारों से गूंजी राजधानी

लखनऊ। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने उत्तर प्रदेश के शिया बाहुल्य इलाकों में जबरदस्त आक्रोश और मातम पैदा कर दिया है। रविवार की खामेनेई सुबह जैसे ही इस खबर की पुष्टि हुई, राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक एक विशाल जनसैलाब में तब्दील हो गया।

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संवेदनशील हुई लखनऊ की स्थिति

लखनऊ के ऐतिहासिक पुराने शहर में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है, जहां हजारों की संख्या में शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए और अमेरिका व इजराइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस कदर था कि, उन्होंने सड़कों पर जंजीर का मातम किया और ‘हर घर से हुसैनी निकलेगा’ जैसे नारों से की गूंज सुनाई देने लगी।

खामेनेई

राजधानी लखनऊ में विरोध प्रदर्शन का केंद्र छोटा और बड़ा इमामबाड़ा रहा। रविवार रात को यहां शिया और सुन्नी दोनों समुदायों के  एक लाख से अधिक लोग एकत्र हुए और शोक मनाने लगे। छोटा इमामबाड़ा से घंटाघर, रूमी दरवाजा और टीले वाली मस्जिद तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में सिर्फ सिर ही सिर नजर आ रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में खामेनेई के पोस्टर ले रखे थे और ‘अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद’ के नारों के साथ कैंडल मार्च निकाला।

इस दौरान धार्मिक भावनाओं का ज्वार इस कदर था कि, युवाओं और बच्चों ने मुहर्रम की तर्ज पर खुद को जंजीरों से पीटकर मातम मनाया। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए तीन दिन के आधिकारिक शोक की घोषणा की है। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने समुदाय से अपील की है कि, वे अपने घरों पर काले झंडे लगाएं और तीन दिनों तक अपनी दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखें। इसी शोक के चलते लखनऊ के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल छोटा और बड़ा इमामबाड़ा को 3 मार्च तक के लिए पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

देर रात निकाला जुलूस

विरोध की यह आग सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रही, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी भारी तनाव देखा गया। बिजनौर के नगीना और अमरोहा में शिया समुदाय के लोगों ने देर रात जुलूस निकाला। यहां भी प्रदर्शनकारियों ने आत्म-पीड़न करते हुए जंजीरों से मातम किया और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। वाराणसी में भी स्थिति गमगीन बनी हुई है, जहां दफतर-ए-जुमा के मौलाना जफर हुसैनी ने सात दिनों के शोक का ऐलान किया है।

वाराणसी के शिवपुर इलाके में बड़ी संख्या में महिलाओं ने कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शन में शामिल महिलाएं बिलख-बिलख कर रोती दिखीं और उन्होंने अमेरिका व इजराइल की बर्बादी के लिए सामूहिक दुआएं कीं। प्रयागराज में भी हजारों की संख्या में लोग दरगाह हजरत अब्बास पर जमा हुए, जहां महिलाओं ने खामेनेई को ‘इंसानियत का फरिश्ता’ बताते हुए अंतिम विदाई दी। यहां प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पुतले फूंक कर अपना गुस्सा जाहिर किया।

खामेनेई

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में भी इस घटना की तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली। विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने कैंपस के भीतर नमाज-ए-जनाजा अदा की और उसके बाद बाब-ए-सैयद गेट तक कैंडल मार्च निकाला। अलीगढ़ में अंजुमन तंजीमुल अजा कमेटी ने 40 दिनों के सामूहिक शोक का आह्वान किया है, जिसके तहत विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिस और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी। आजमगढ़ में शिया कमेटी के चेयरमैन अजादार हुसैन ने भावुक होते हुए कहा कि, आज पूरा समुदाय खुद को यतीम महसूस कर रहा है। उन्होंने खामेनेई की मौत को एक व्यक्तिगत क्षति बताते हुए कहा कि यह दुख किसी पिता को खोने से भी बड़ा है।

सियासत भी गरमाई

इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की सियासत को भी गरमा दिया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भी जुबानी जंग तेज हो गई है। लखनऊ के सरोजनीनगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने इन प्रदर्शनों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने मानवाधिकारों के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि, जब ईरान में बाल विवाह की उम्र घटाने की बात होती है या अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तब इस तरह के संगठित विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं दिखाई देते?

उन्होंने प्रदर्शनों को ‘चयनात्मक मानवाधिकार दृष्टिकोण’ करार दिया। दूसरी ओर, मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी के नेता डॉ. एसटी हसन ने प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भावनाएं अपनी जगह हैं, लेकिन लोगों को जोश में होश नहीं खोना चाहिए और प्रदेश में अमन-चैन बनाए रखना चाहिए। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, ईरान भारत का पुराना और विश्वसनीय मित्र रहा है, ऐसे में सरकार को वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।

पर्यटक भी हुए निराश

धार्मिक और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, आम पर्यटकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से लखनऊ घूमने आए पर्यटक ऐतिहासिक इमारतों पर ताले लटके देखकर मायूस हैं। उड़ीसा से आए एक जोड़े ने बताया कि वे अपने प्री-वेडिंग शूट के लिए विशेष रूप से बड़ा इमामबाड़ा आए थे, लेकिन अचानक हुए बंद के कारण उनकी योजनाएं धरी की धरी रह गई हैं। पुराने लखनऊ के बाजार बंद होने से स्थानीय व्यापार पर भी असर पड़ा है। इमामबाड़ा के मुख्य द्वारों पर प्रदर्शनकारियों ने विरोध स्वरूप अमेरिका और इजराइल के झंडे पायदान की तरह बिछा दिए हैं, जिन पर चलकर लोग अंदर दाखिल हो रहे हैं।

सुरक्षा के लिहाज से उत्तर प्रदेश पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह ही वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक की और पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से लखनऊ, वाराणसी, मुरादाबाद और अलीगढ़ जैसे संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अफवाह से माहौल न बिगड़े।

धर्मगुरुओं ने की शांति की अपील

पुलिस प्रशासन ने धर्मगुरुओं से संवाद कर शांति बनाए रखने की अपील की है, हालांकि शिया समुदाय का कहना है कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और धार्मिक भावनाओं से प्रेरित है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कई हिस्से काले झंडों और मातम के साये में हैं, और आने वाले कुछ दिन राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने रहने वाले हैं।

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