
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इस्राइल दौरे पर कांग्रेस ने शनिवार को तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने पीएम की यात्रा को ‘गलत समय’ पर किया गया बताते हुए इसे ‘शर्मनाक’ करार दिया। खुर्शीद ने कहा कि यह दौरा सैन्य तनाव बढ़ाने के लिए राजनीतिक समर्थन की धारणा पैदा करता है, जो भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था के विपरीत है।
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जयराम रमेश बोले- नैतिक कायरता

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी पीएम पर निशाना साधा। रमेश ने कहा कि, यात्रा के दो दिन बाद ही इस्राइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू कर दिए, जो पहले से अपेक्षित था। रमेश ने इसे नैतिक कायरता का उदाहरण बताया। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ऐलान किया कि, इस्राइल की ओर से शुरूआती हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान में बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है।
ट्रंप ने कहा कि यह अभियान ईरान की आक्रामकता का जवाब है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है। इस घोषणा ने पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंका को और बढ़ा दिया है, जहां पहले से ही तेल कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक बाजार प्रभावित हो रहे हैं।
आक्रामक कार्रवाई का मौन समर्थन
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने अपने बयान में कहा कि, 25 और 26 फरवरी के बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, टकराव की शुरुआत और व्यापक संघर्ष के स्पष्ट खतरे के बीच पीएम मोदी की इस्राइल यात्रा कांग्रेस को गहराई से चिंतित करती है। खुर्शीद ने जोर देकर कहा कि यह यात्रा पक्षपाती झुकाव और बिना उकसावे के आक्रामक कार्रवाई को मौन समर्थन की धारणा बनाती है, जिसके गंभीर रणनीतिक नतीजे हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा से वसुधैव कुटुंबकम, महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत, जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता नीति और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 में निहित है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संधियों के सम्मान का निर्देश देता है।कांग्रेस नेता ने कहा कि, यह दौरा किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग पर प्रतिबंध और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांत के खिलाफ है।
पहले से अपेक्षित था हमला
उन्होंने राष्ट्रीय चुनावों से पहले किसी मौजूदा सरकार को समर्थन का संदेश देने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस ने कहा कि पीएम की यात्रा ने भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया है, जो हमेशा से फिलिस्तीन मुद्दे पर संतुलित रुख रखता आया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने और भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मोदी की इस्राइल यात्रा का जश्न मनाने के दो दिन बाद ही इस्राइल और अमेरिका ने ईरान पर मिलकर हमले शुरू कर दिए।
रमेश ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में उनके (अमेरिका-इस्राइल) सैन्य जमावड़े को देखते हुए यह पूरी तरह अपेक्षित था। इसके बावजूद मोदी इस्राइल गए, जहां उन्होंने सबसे ज्यादा नैतिक कायरता दिखाई। रमेश ने आरोप लगाया कि भारत इस्राइल के साथ खड़ा है और इसके लिए खुद को एक पुरस्कार भी दिलवाया। उन्होंने कहा, यह इस्राइल यात्रा शर्मनाक थी और अब जब मोदी के ‘दो अच्छे मित्रों’ ने युद्ध शुरू किया है, तो यह और भी शर्मनाक यात्रा हो गई है।
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पश्चिम एशिया में तनाव चरम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25-26 फरवरी को इस्राइल का दौरा किया, जहां उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। इस दौरे में रक्षा सहयोग, तकनीकी इनोवेशन और व्यापार बढ़ाने पर चर्चा हुई। मोदी ने कहा कि, भारत और इस्राइल की दोस्ती मजबूत है और दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं, लेकिन यह दौरा ऐसे समय हुआ जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर था।

ईरान और इस्राइल के बीच पहले से ही मिसाइल हमलों की धमक थी और अमेरिका ने भी ईरान पर सख्त रुख अपनाया हुआ था। दौरे के दौरान पीएम मोदी ने इस्राइल की सेना की तारीफ की और रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर किए, लेकिन कांग्रेस ने इसे राजनीतिक लाभ के लिए किया गया दौरा बताया। पार्टी का कहना है कि जब क्षेत्र में युद्ध की आशंका थी, तब भारत को तटस्थ रहना चाहिए था। कांग्रेस ने कहा कि यह दौरा भारत की गुटनिरपेक्ष नीति को कमजोर करता है और अरब देशों के साथ संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
ट्रंप ने किया सैन्य अभियान का ऐलान
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान पर बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की। ट्रंप ने कहा कि, इस्राइल की तरफ से शुरूआती हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान की सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि, ईरान की आक्रामकता को रोकना जरूरी है अन्यथा क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी। यह अभियान अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त कार्रवाई है, जिसमें ड्रोन, मिसाइल और एयर स्ट्राइक्स शामिल हैं।
पिछले कई हफ्तों से राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ कूटनीति और बातचीत का दिखावा कर रहे थे। लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और स्वयं अमेरिका के भीतर मौजूद युद्ध समर्थक समूहों के उकसावे पर उन्होंने अब सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से एक सैन्य आक्रमण शुरू कर दिया है।
भारतीय…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) February 28, 2026
ट्रंप ने कहा कि, यह अभियान सीमित होगा, लेकिन अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई की तो और सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह घोषणा मोदी की यात्रा के ठीक बाद आई, जिससे कांग्रेस की आलोचना को बल मिला। कांग्रेस ने कहा कि पीएम की यात्रा ने इस्राइल-अमेरिका को हमले के लिए राजनीतिक कवर प्रदान किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि भारत हमेशा से शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है।
2027 के चुनाव के लिए अहम प्रतिक्रिया
कांग्रेस की यह आलोचना 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी पीएम मोदी की विदेश नीति को मुद्दा बनाकर युवा और मुस्लिम वोटर्स को लुभाने की कोशिश कर रही है। 2024 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने यूप में पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से अच्छा प्रदर्शन किया था। अब विदेश नीति पर हमला कर कांग्रेस सत्ताधारी बीजेपी को घेरने की रणनीति अपनाती हुई नजर रही है। इधर बीजेपी ने कांग्रेस की आलोचना को खारिज किया है। पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि पीएम का दौरा रक्षा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए था, जो भारत के हित में है। पात्रा ने कहा कि कांग्रेस की बातें आधारहीन हैं और वे केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही हैं।
Statement on Prime Minister Modi’s visit to Israel and attack on Iran, by the Foreign Affairs Department, @INCIndia. pic.twitter.com/dWLs6wvSc0
— Salman Khurshid (@salman7khurshid) February 28, 2026
क्या बोले-पूर्व राजनयिक
पश्चिम एशिया में यह तनाव वैश्विक स्तर पर असर डाल रहा है। तेल कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे भारत जैसे आयातक देश प्रभावित हो रहे हैं। भारत ने हमेशा ईरान और इस्राइल दोनों से अच्छे संबंध रखे हैं, लेकिन मोदी की यात्रा ने भारत को इस्राइल के करीब दिखाया है, जिससे ईरान के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं। पूर्व राजनयिकों का कहना है कि भारत को संतुलित नीति अपनानी चाहिए, क्योंकि ईरान से भारत को तेल और चाबहार पोर्ट का लाभ मिलता है।
कांग्रेस ने कहा कि भारत की विदेश नीति को राजनीतिक लाभ के लिए जोखिम में नहीं डाला जाना चाहिए। खुर्शीद ने कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करनी चाहिए। यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ रहा है। भारत की सरकार ने अभी तक ट्रंप की घोषणा पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने क्षेत्र में शांति की अपील की है।
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