
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ हर साल की तरह इस साल भी गोरखपुर में रहकर पारंपरिक तरीके से होली का त्यौहार मनाएंगे। यहां गोरक्षपीठ की सहभागिता से आयोजित होने वाली दो प्रमुख शोभायात्राएं होलिकादहन के दिन भक्त प्रह्लाद की शोभायात्रा और होली के दिन भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा सामाजिक समरसता, उल्लास और एकता का प्रतीक बनती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दोनों शोभायात्राओं में बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर शामिल होंगे।
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82 साल से निकाली जा रही शोभायात्रा
आपको बता दें कि, इन शोभायात्राओं की शुरुआत लगभग 82 वर्ष पूर्व नानाजी देशमुख ने की थी। इन दोनों शोभयात्राओं में गोरक्षपीठ का गहरा नाता होने से गोरखपुर का रंगपर्व दशकों से विशिष्ट बना हुआ है।

गोरखपुर का रंगपर्व दशकों से विशिष्ट रहा है, जहां होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि छुआछूत, जातीय भेदभाव और ऊंच-नीच की खाई को पाटने का माध्यम बन चुका है। गोरक्षपीठ के मूल संदेश लोक कल्याण, समता और नाथपंथ की भावना को इन शोभायात्राओं के माध्यम से फैलाया जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व्यस्ततम कार्यकाल के बावजूद इस परंपरा को जीवंत रखते हैं, जो गोरक्षपीठ के अभियान का अभिन्न अंग है।
रंगों में सराबोर होकर रथ पर बैठेंगे योगी
इस वर्ष होलिका दहन के दिन यानी 2 मार्च दिन सोमवार की शाम को पांडेयहाता से होलिकादहन उत्सव समिति की तरफ से भक्त प्रह्लाद की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस शोभायत्रा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। दूसरी शोभायात्रा 4 मार्च दिन बुधवार को सुबह घंटाघर से निकाली जाएगी। ये भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा आरएसएस की तरफ से निकाली जाएगी। इस शोभायात्रा में भी सीएम योगी बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर शामिल होंगे। इस दौरान वे रथ पर बैठकर, रंगों में सराबोर होकर बिना किसी भेदभाव के लोगों से शुभकामनाओं आदान-प्रदान करेंगे।
ये शोभा यात्राएं समतामूलक समाज का जीवंत प्रतिबिंब प्रस्तुत करती हैं। इनमें सभी वर्गों के लोग जैसे किसान, मजदूर, व्यापारी, युवा, महिलाएं और बच्चे एक साथ शामिल होते हैं, हर्षोल्लास के साथ होली का पर्व मनाते हैं। इस शोभायात्रा में पथ नियोजन आरएसएस कार्यकर्ता करेंगे, जबकि गोरक्षपीठ का आशीर्वाद और नेतृत्व इसे आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
भगवान नृसिंह रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरुआत 1944 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने गोरखपुर में की थी। नानाजी ने गोरखपुर में संघ कार्य विस्तार के दौरान फूहड़ता दूर करने और होली को सकारात्मक रूप देने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया था। गोरखनाथ मंदिर में होलिका दहन की राख से होली मनाने की पुरानी परंपरा को उन्होंने संगठित रूप दिया। नानाजी के अनुरोध पर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने महंत अवेद्यनाथ को शोभायात्रा में पीठ का प्रतिनिधित्व करने का निर्देश दिया। तब से यह गोरक्षपीठ की होली का अभिन्न अंग बन गई।
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1996 से योगी कर रहे यात्रा का नेतृत्व
नानाजी देशमुख ने गोरखपुर में 250 से अधिक संघ शाखाएं स्थापित कीं और शिक्षा के क्षेत्र में भारत का पहला सरस्वती शिशु मंदिर भी यहीं शुरू किया। उनकी दूरदर्शिता से यह उत्सव सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया। 1996 से योगी आदित्यनाथ ने शोभायात्रा का नेतृत्व संभाला और इसे पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता का प्रमुख पर्व बना दिया। इसकी ख्याति अब मथुरा-वृंदावन की होली के समकक्ष हो गई है। लोग विशेष रूप से योगी की अगुवाई वाली नृसिंह शोभायात्रा का इंतजार करते हैं।

कोरोना महामारी के दौरान 2020 और 2021 में योगी जी ने जनता की सुरक्षा के लिए ये भागीदारी टाली, लेकिन 2022 से सफल कोरोना प्रबंधन के बाद वे फिर से शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में इस परंपरा को बनाए रखते हैं, जो उनके व्यक्तित्व की सादगी और जड़ों से जुड़ाव को दर्शाता है। गोरक्षपीठ की होली छुआछूत और जातिवाद से मुक्त समाज का संदेश देती है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ ने इस अभियान को विस्तार दिया, जिसकी पताका अब योगी आदित्यनाथ फहरा रहे हैं। रंगों के माध्यम से उमंग और उल्लास फैलाते हुए यह पर्व विभेदों को मिटाने का माध्यम बनता है।
भक्तों के साथ गाते हैं भजन
शोभायात्राओं में भगवान नृसिंह के रथ पर सवार होकर योगी भक्तों के साथ भजन गाते हैं, रंग लगाते हैं और एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह दृश्य सामाजिक सद्भाव का जीवंत उदाहरण है। गोरखपुर का यह रंगपर्व अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है, जहां लाखों लोग शामिल होते हैं और देशभर से श्रद्धालु आते हैं।
इन शोभायात्राओं की सुरक्षा और सुचारु संचालन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग विशेष तैयारी कर रहा है। यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य सुविधाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री की उपस्थिति से उत्सव की भव्यता में चार चांद लगेगा, लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। गोरखपुर की होली इस वर्ष भी सामाजिक समरसता, भक्ति और उल्लास का अनुपम संगम होगी। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की सहभागिता से यह पर्व न केवल स्थानीय, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एकता का संदेश देगा।
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