
हर किसी का सपना होता है कि, उसका अपना घर हो, जिसे वह अपने तरीके से सजाये-संवारे। इसके लिए इन्सान दिन रात मेहनत करता है और घर बनवाता या खरीदता है, लेकिन कई बार घर में निगेटिव एनर्जी होने की वजह से वहां रहने वालों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ज्योतिष कहते हैं, घर की नींव हमेशा शुभ मुहूर्त में और विधि विधान से रखनी चाहिए, ताकि वहां हमेशा बरकत बनी रहे।
इसे भी पढ़ें- कोरोना मरीजों के लिए हरियाणा सरकार ने उठाया बड़ा कदम, ली सेना के डाक्टरों की मदद
भूमि पूजन का मुहूर्त
नए घर का निर्माण शुरू करना न केवल एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट है, बल्कि यह एक धार्मिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया भी मानी जाती है। वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि, घर की नींव डालने से पहले भूमि पूजन और शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है, क्योंकि यह घर में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और स्थिरता लाने का आधार बनाता है।

वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि नींव डालने की प्रक्रिया यदि सही नियमों से की जाए, तो घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं हो पाता है और उसमें रहने वाला परिवार लंबे समय तक खुशहाल रहता है। घर में हमेशा लक्ष्मी का वास होता है।
नींव डालने की शुरुआत
हाल के वर्षों में लोग वास्तु और ज्योतिष को ज्यादा महत्व दे रहे हैं, जिससे भूमि पूजन और नींव स्थापना के रिवाज फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं। वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि, नींव डालने की शुरुआत ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा से होनी चाहिए। यह दिशा देवताओं का स्थान मानी जाती है और यहां से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सबसे मजबूत होता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि, खुदाई हमेशा ईशान कोण से शुरू करनी चाहिए, उसके बाद आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व), वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) और अंत में नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में की जानी चाहिए। इसके बाद पूर्व, उत्तर, पश्चिम और दक्षिण दिशाओं में क्रम से खुदाई पूरी की जाती है।
इसे भी पढ़ें- वास्तु टिप्स: आपकी किस्मत बदल सकता है घर का कूड़ादान, बस जान लें रखने की सही दिशा
नींव की गहराई के नियम
वास्तुशास्त्र के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम में नींव सबसे गहरी होनी चाहिए, जबकि उत्तर-पूर्व में सबसे कम गहरी। यह असंतुलन घर में स्थिरता और ऊर्जा संतुलन बनाए रखता है।
भूमि पूजन से पहले सबसे महत्वपूर्ण है शुभ मुहूर्त का चयन कर लेना चाहिए। वास्तु और ज्योतिष के जानकर कहते हैं कि, मुहूर्त घर के मालिक की जन्म राशि, लग्न, चल रही महादशा और अंतर्दशा के आधार पर निकाला जाता है। मुहूर्त में चंद्रमा घर मालिक की जन्म राशि से चतुर्थ, अष्टम या द्वादश भाव में नहीं होना चाहिए।
अन्य ग्रहों के गोचर का भी ध्यान रखा जाता है। सामान्य रूप से जून, नवंबर और दिसंबर महीने घर निर्माण की शुरुआत के लिए सबसे उत्तम माने जाते हैं, क्योंकि इन महीनों में ग्रह स्थिति अनुकूल रहती है। हालांकि, व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार मुहूर्त अलग-अलग हो सकता है।
कलश में रखें ये चीजें
वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही मुहूर्त निकलवाना चाहिए, साथ ही भूमि शयन (भूमि के आराम करने का समय) का भी ध्यान रखें। शुभ मुहूर्त में ही नींव की खुदाई शुरू करें और विधिवत पूजन करें। भूमि पूजन की विधि में एक तांबे के कलश में गंगाजल, सिक्के, हल्दी, कौड़ी, पान के पत्ते, सुपारी, नारियल, फल, गुड़, पंचरत्न, पंचधातु, जनेऊ और अन्य शुभ सामग्री रखी जाती है। कलश का मुख लाल कपड़े से बांधकर ईशान कोण में नींव में स्थापित किया जाता है। यह कलश लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और घर में धन-समृद्धि लाता है। नकारात्मक ऊर्जा से बचाव और घर की रक्षा के लिए चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा भी नींव में रखा जाता है।
शेषनाग पाताल लोक के स्वामी हैं और उनकी कृपा से घर स्थिर और सुरक्षित रहता है। नाग-नागिन का मुंह शुभ दिशा में होना चाहिए, जिस पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन देते हैं। ये वस्तुएं घर में सुख-शांति और लंबे समय तक स्थायित्व सुनिश्चित करती हैं।
ये माना जाता है गंभीर दोष
ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि, नींव डालने के बाद भी वास्तु नियमों का पालन चाहिए। घर का नक्शा पास करवाते समय आर्किटेक्ट के साथ-साथ वास्तु विशेषज्ञ से भी परामर्श लेना चाहिए। ईशान कोण में पूजाघर या मंदिर होना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। वहीं, ईशान कोण में शौचालय या बाथरूम बनाना सबसे गंभीर वास्तु दोष में गिना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा दोष घर में स्वास्थ्य समस्याएं, धन हानि, पारिवारिक कलह और नकारात्मक ऊर्जा की वजह बनता है। अगर ईशान कोण दूषित हो जाए, तो समय के साथ रोग-बीमारी बढ़ सकती है और सकारात्मक शक्तियां कमजोर पड़ सकती हैं, इसलिए नक्शा डिजाइन करते समय ईशान कोण की शुद्धता पर विशेष ध्यान दें। अन्य कमरों की स्थिति भी वास्तु के अनुसार तय करें, जैसे- रसोई आग्नेय कोण में, मास्टर बेडरूम नैऋत्य में आदि।
सदियों पुराने हैं वास्तु के नियम
बता दें कि, वास्तु शास्त्र के ये नियम सदियों पुराने हैं और आज भी लोग इन पर भरोसा करते हैं। वास्तु न केवल निर्माण का विज्ञान है, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने का माध्यम भी है। अगर आप नया घर बनवा रहे हैं, तो पहले वास्तु और ज्योतिष विशेषज्ञ से परामर्श लें, शुभ मुहूर्त निकलवाएं और विधिवत भूमि पूजन करें। इससे घर मजबूत बनेगा और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहेगी।
इसे भी पढ़ें- वास्तु के इन नियमों के अनुसार कराए घर का निर्माण, नहीं झेलनी पड़ेगी आर्थिक तंगी



