
नई दिल्ली। खगोल प्रेमियों और ज्योतिष शास्त्र में विश्वास रखने वालों के लिए 17 फरवरी का दिन विशेष महत्व रखता है। कल सूर्य ग्रहण होगा। ये साल का पहला सूर्य ग्रहण है, जो एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। दुनिया भर में इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इसमें चंद्रमा सूर्य के केंद्र को ढक लेता है और सूर्य का बाहरी हिस्सा एक चमकदार आग के छल्ले की तरह नजर आता है। हालांकि, यह खूबसूरत नजारा भारत से नहीं दिखाई देगा, लेकिन इसका वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व बरकरार है।
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ग्रहण का समय

खगोलीय गणना के अनुसार, ग्रहण की प्रक्रिया भारतीय समयानुसार दोपहर से शुरू होकर शाम तक चलेगी। आंशिक ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:26 बजे से होगी, ये वलयाकार अवस्था शाम 5:12 बजे से शुरू होगी। ग्रहण का पीक टाइम शाम लगभग 5:43 बजे से 6:12 बजे तक रहेगा।
ये है समय
वलयाकार अवस्था समाप्त: शाम 6:12 बजे
ग्रहण पूर्ण समापन: रात 7:57 बजे
ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 31 मिनट रहेगी, जबकि ‘रिंग ऑफ फायर’ का मुख्य चरण केवल 2 मिनट 20 सेकंड तक रहेगा। यह घटना अमावस्या तिथि पर फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ रही है।
भारत में दिखेगा या नहीं?
हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। वैज्ञानिकों और नासा के अनुसार ग्रहण का मुख्य पथ दक्षिणी गोलार्ध में है, खासकर अंटार्कटिका पर केंद्रित है। भारत की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां सूर्य नीचे रहने या छाया न पहुंचने से कोई आंशिक या वलयाकार दृश्य नहीं होगा। भारत पूरी तरह ग्रहण की छाया से बाहर है।
कहां-कहां दिखेगा ‘रिंग ऑफ फायर’?
यह अद्भुत दृश्य मुख्य रूप से अंटार्कटिका में पूर्ण वलयाकार रूप में दिखेगा। आंशिक ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, जिम्बाब्वे, मॉरीशस, दक्षिणी दक्षिण अमेरिका (अर्जेंटीना, चिली के कुछ हिस्से) और प्रशांत, अटलांटिक, हिंद महासागर के दक्षिणी क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारत के लोग इसे NASA के यूट्यूब चैनल या अन्य लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर देख सकते हैं।
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ज्योतिषीय महत्व और राशि प्रभाव
ज्योतिष के अनुसार, यह ग्रहण कुंभ राशि में और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है। कुंभ राशि के स्वामी शनि हैं, जो वर्तमान में कुंभ में ही संचरित हैं, इसलिए प्रभाव गहरा होगा। धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल है, जिससे जमीन-जायदाद, अग्नि, तकनीक और ऊर्जा से जुड़े क्षेत्रों में बदलाव संभव हैं। सूर्य-राहु की युति से ‘ग्रहण योग’ बन रहा है, जो लगभग 37 साल बाद ऐसा संयोग है। प्रभावित राशियां: कुंभ: स्वास्थ्य, वाहन और मानसिक शांति पर असर; ‘ॐ नमः शिवाय’ जाप करें।
मेष: आय के नए स्रोत, मान-सम्मान वृद्धि।
वृषभ: कार्यस्थल पर विवाद संभव, शांत रहें।
सिंह: वैवाहिक जीवन में तनाव, बड़े फैसले टालें।
मकर: आर्थिक लाभ, रुका धन वापस मिल सकता है।
सूतक काल और धार्मिक नियम
धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक लगता है, लेकिन नियम है, जहां ग्रहण दिखाई न दे, वहां सूतक मान्य नहीं। चूंकि भारत में दृश्य नहीं दिखेगा। ऐसे में मंदिरों के पट खुले रहेंगे, पूजा-पाठ भी सामान्य तरीके से होता रहेगा। फिर भी, परंपरावादी लोग ग्रहण काल में सावधानी बरत सकते हैं।
क्या करें और क्या न करें?
मान्यता है कि सूतक काल में गर्भवती महिलओं को धारदार वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
मंत्र जाप: ‘ॐ सूर्याय नमः’ या महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जाप शुभ।
ग्रहण समाप्ति के बाद काले तिल, गुड़ या तांबे का दान कुंभ दोष निवारण के लिए अच्छा।
वैज्ञानिक दृष्टि से: कभी भी नंगी आंखों से सूर्य न देखें, विशेष फिल्टर या ग्लासेस का उपयोग करें (भारत में न दिखने से लागू नहीं)।
यह ग्रहण विज्ञान और ज्योतिष दोनों में महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक रूप से यह सूर्य-चंद्रमा की स्थिति का दुर्लभ उदाहरण है, जबकि ज्योतिष में कुंभ राशि में बदलावों का संकेत देता है।
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