नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच टी20 विश्व कप का बहुप्रतीक्षित मैच अब अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 15 फरवरी को कोलंबो में खेला जाएगा। पाकिस्तान सरकार ने बांग्लादेश और श्रीलंका के हस्तक्षेप और समझाने के बाद इस मैच के बहिष्कार का अपना पिछला फैसला वापस ले लिया है, जिससे टूर्नामेंट पर मंडरा रहे अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं। पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह निर्णय क्रिकेट की भावना को बनाए रखने और मित्र देशों के अनुरोध का सम्मान करने के लिए लिया गया है। इस फैसले के पीछे श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से हुई सीधी बातचीत और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अनुरोध को मुख्य वजह माना जा रहा है।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के प्रमुख मोहसिन नकवी ने इस मामले पर स्पष्ट किया कि उन्होंने आईसीसी और बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की थी। हालांकि पाकिस्तान शुरुआत में सुरक्षा कारणों से भारत में खेलने से इनकार करने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा था, लेकिन अब उसने क्रिकेट इकोसिस्टम के व्यापक हित में मैदान पर उतरने का निर्देश दिया है। दूसरी ओर, आईसीसी ने भी इस विवाद के बीच एक बड़ा नरम रुख अपनाया है। आईसीसी ने घोषणा की है कि भारत में खेलने से मना करने के कारण टूर्नामेंट से बाहर हुए बांग्लादेश पर कोई आर्थिक या प्रशासनिक दंड नहीं लगाया जाएगा। इसके बजाय, बांग्लादेश को भविष्य में (2028-2031 के बीच) एक आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी देने का आश्वासन दिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कुछ तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। पीसीबी चीफ मोहसिन नकवी ने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि पाकिस्तान ने आईसीसी के किसी दबाव या प्रतिबंध के डर से यह फैसला लिया है। हालांकि, पाकिस्तान ने आईसीसी के सामने द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली और बांग्लादेश के नुकसान की भरपाई के लिए त्रिकोणीय सीरीज जैसे प्रस्ताव रखे थे, जिन्हें फिलहाल आईसीसी के दायरे से बाहर बताकर या मौजूदा नियमों के तहत खारिज कर दिया गया है। फिलहाल, सभी की निगाहें अब 15 फरवरी के मैच पर टिकी हैं, क्योंकि इस कूटनीतिक जीत के बाद अब मैदान पर बल्ले और गेंद की जंग शुरू होगी।



