
नई दिल्ली। आज विश्व मिर्गी दिवस (International Epilepsy Day) मनाया जा रहा है। ये दिवस हर साल फरवरी के दूसरे सप्ताह सोमवार को मनाया जाता है। इस वर्ष 9 फरवरी को पड़ने वाले इस दिवस का उद्देश्य मिर्गी (एपिलेप्सी) के बारे में जागरूकता फैलाना, सामाजिक कलंक को खत्म करना और समय पर इलाज की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।
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लोगों के बीच फैला है अंधविश्वास
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में करीब 5 करोड़ लोग मिर्गी की बीमारी से पीड़ित हैं। वहीं, भारत में यह संख्या 1.5 करोड़ से अधिक है। भारत के ग्रामीण इलाकों में मिर्गी को शर्मनाक बीमारी के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि, लोग इसके बारे में खुलकर बात नहीं करते और न ही वे इसका इलाज कराने के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं।

इसे लेकर छोटे शहरों और गांव के लोगों में अंधविश्वास और गलत धारणाएं हैं। अगर किसी को मिर्गी की समस्या है, तो वह इस बारे किसी को बताने से बचता है या यूं कहें की वह इसे लेकर शर्म महसूस करता है।
दौरे पड़ने पर आते हैं झटके
एक्सपर्ट्स का कहना है कि, मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें दिमाग के इलेक्ट्रिकल सिग्नल अचानक असामान्य हो जाते हैं, जिससे दौरे पड़ने की समस्या होने लगती है। डॉक्टर्स का कहना है कि, मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति को जब दौरे पड़ते हैं, तो उसे झटके आते हैं, जिससे वह गिर सकता है, बेहोश हो सकता है या कुछ सेकंड के लिए खाली नजरों से देख सकता है। डॉक्टर कहते हैं कि, हालांकि, कुछ दौरे हल्के होते हैं, जो कुछ सेकंड में खत्म हो जाते हैं और मरीज सामान्य हो जाता है। वहीं, कुछ दौर गंभीर होते हैं, जिसमें मरीज को ठीक होने में समय लगता है।
मुंह में कपड़ा या चम्मच डालना जानलेवा
हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, मिर्गी, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी क्रॉनिक बीमारी है, इसका नियमति और गंभीरता से इलाज कराना आवश्यक है। एक्सपर्ट्स ने इसे लेकर लोगों के बीच फैली भ्रांतियों का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा, ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे भूत-प्रेत या काले जादू से जोड़ कर देखते हैं। कई परिवारों में ये भ्रान्ति है की ये बीमारी छूने से फैलती है या जिस व्यक्ति को मिर्गी की समस्या है वह पढ़ाई, नौकरी या शादी नहीं कर सकता है। एक सबसे खतरनाक धारणा यह है कि लोग दौरे पड़ने पर मरीज के मुंह में चम्मच, चाबी या कपड़ा डाल देते हैं।
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…तो अस्पताल लेकर जाएं
डॉक्टरों का कहना है कि, ऐसा करने से जीभ कट सकती है, दांत टूट सकते हैं या गला घुट सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। दौरा पड़ने पर दौरान मरीज को सुरक्षित जगह पर लिटाना, सिर के नीचे कुछ नरम तकिया टाइप का रखना और समय नोट करना चाहिए। अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले या लगातार आए, तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।

न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि, मिर्गी की पहचान अक्सर देर से होती है, क्योंकि हर दौरे में झटके नहीं आते। कुछ दौरे सिर्फ खालीपन, भ्रम, ध्यान भटकना या अचानक व्यवहार में बदलाव आना जैसे होता है। इस बीमारी से हर उम्र के लोग प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन डर और गलत जानकारी के चलते मरीज बहुत देर से डॉक्टर तक पहुंचते हैं। न्यूरोलोजिस्ट का कहना है कि, अगर समय से इलाज शुरू कर दिया जाये तो ज्यादातर मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं।
चर्चा करने से भी बचते हैं मरीज
उन्होंने कहा, दवाओं से नियंत्रित न होने वाली मिर्गी (ड्रग-रेजिस्टेंट एपिलेप्सी) में सर्जरी एक प्रभावी विकल्प है। भारत में आधुनिक न्यूरो-सर्जरी, एडवांस इमेजिंग और रोबोटिक तकनीकों से सर्जरी के परिणाम बहुत अच्छे हो रहे हैं। इस तरीके से इलाज करने से मरीजों में दौरे पूरी तरह बंद हो सकते हैं या काफी कम हो जाते हैं। भारत में मिर्गी की बीमारी एक बड़ी समस्या है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, अंधविश्वास और सामाजिक बहिष्कार के डर से इस बीमारी से पीड़ित लोग आमतौर छिप कर रहते हैं। परिवार वाले भी इस बारे में किसी से बात करते से बचते हैं। इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद कई बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं, युवा नौकरी नहीं कर पाते और महिलाओं की शादी नहीं होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि, जागरूकता अभियान, स्कूलों में शिक्षा और मुफ्त दवाओं की उपलब्धता से स्थिति को सुधार जा सकता है।
चलाये जा रहे कैंपेन

विश्व मिर्गी दिवस पर #EpilepsyPledge जैसे कैंपेन चलाये जा रहे हैं, जो जागरूकता से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई पर जोर देते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, मिर्गी को मानसिक बीमारी न समझा जाए। यह एक इलाज योग्य न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। समय पर डॉक्टर से संपर्क करें, नियमित दवाएं लें और सामाजिक कलंक को खत्म करें। ये कोई छिपाने वाली बीमारी नहीं है। अंध विश्वासे से दूर रहें और दौरा पड़ने पर डॉक्टर से सपंर्क करें। मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति पढ़ाई, नौकरी, ड्राइविंग (दौरे नियंत्रित होने पर) और शादी कर सकते हैं और इलाज व डॉक्टरी परामर्श से सामान्य जीवन जी सकता है।
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