
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र आज सोमवार से शुरू हो गया है। यह सत्र राज्य की राजनीति और विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा, खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले। कुल 10-12 दिनों (9 फरवरी से 20 फरवरी तक) चलने वाले इस सत्र की शुरुआत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के संयुक्त सदन (विधानसभा और विधान परिषद) में अभिभाषण से हुई। अभिभाषण में योगी आदित्यनाथ सरकार बीते एक साल की उपलब्धियों, नीतियों और भविष्य की योजनाओं का खाका पेश करेगी।
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सीएम योगी ने की सर्वदलीय बैठक

सत्र के पहले दिन सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाएगी, जबकि विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, सत्र में कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) और अन्य जमीनी मुद्दों पर तीखी बहस होने के आसार हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वदलीय बैठक में सभी दलों से अपील की है कि सदन में स्वस्थ, सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा हो, ताकि प्रदेश का विकास तेज हो सके। उन्होंने कहा, “स्वस्थ चर्चा से ही जनता की समस्याओं का समाधान संभव है। सदन की कार्यवाही में किसी तरह की बाधा न आए, यह सभी की जिम्मेदारी है।”
राज्यपाल का संबोधन
सुबह 11 बजे विधान भवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। अभिभाषण में सरकार के प्रमुख एजेंडे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में प्रगति, महिला सशक्तिकरण, युवा रोजगार, किसान कल्याण और ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ विजन 2047 पर फोकस रहने की उम्मीद है। अभिभाषण के बाद हाल ही में पारित अध्यादेशों को सदन के पटल पर रखा जाएगा।
बजट सत्र (वित्तीय वर्ष 2026-27) के अंतर्गत मा. राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी का समवेत दोनों सदनों के समक्ष अभिभाषण…@anandibenpatel https://t.co/NIXrZ4Pw6x
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 9, 2026
मंगलवार (10 फरवरी) को विधानसभा की कार्यवाही केवल शोक प्रस्ताव तक सीमित रहेगी। हाल ही में दो विधायकों के निधन के कारण सदन में शोक सभा होगी और अन्य कार्यवाही नहीं होगी। यह परंपरा के अनुसार किया जाता है। 11 फरवरी को बजट पेश होगा। बजट सत्र का सबसे महत्वपूर्ण दिन 11 फरवरी (बुधवार) होगा। इससे पहले सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक होगी, जहां बजट प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगेगी। इसके बाद वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना विधानसभा में 2026-27 वित्तीय वर्ष का बजट पेश करेंगे।
9 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होगा बजट
अनुमान है कि यह बजट 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होगा, जिसमें पूर्वांचल-बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज, इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश और कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस रहेगा। बजट पेश होने के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा 12 और 13 फरवरी को होगी। 16 से 18 फरवरी तक बजट पर विस्तृत चर्चा होगी, जिसमें सामान्य चर्चा और विभागवार मांगों पर बहस शामिल होगी। 19 फरवरी से विभागवार बजट पास कराया जाएगा और 20 फरवरी को पूरे बजट पर मतदान होगा। सत्र की समाप्ति 20 फरवरी को प्रस्तावित है।
‘विकसित उत्तर प्रदेश की नींव’ मजबूत करेगा बजट

विपक्षी दल, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, इस सत्र में सरकार पर हमलावर रहने की तैयारी में हैं। वे एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान को चुनावी धांधली से जोड़कर उठा सकते हैं। इसके अलावा कानून-व्यवस्था की स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं और योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाएंगे। विपक्ष का कहना है कि, सरकार के दावों और हकीकत में बड़ा अंतर है, जिसे सदन में उजागर किया जाएगा। दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि यह बजट ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की नींव मजबूत करेगा। सीएम योगी ने कहा कि सदन में सभी दलों को बराबर मौका मिलेगा। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी सर्वदलीय बैठक में आश्वासन दिया कि चर्चा सुचारू और सभी पक्षों के लिए निष्पक्ष होगी।
अधूरे वादों को पूरा करने की होगी कोशिश
यह बजट सत्र योगी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट सत्र है, क्योंकि 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए इसमें अधूरे वादों को पूरा करने, महिलाओं, युवाओं, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़े ऐलान होने की संभावना है। पिछले बजट की तरह इस बार भी क्षेत्रीय संतुलन, इंफ्रास्ट्रक्चर (एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर), पेंशन बढ़ोतरी, सामूहिक विवाह योजना और स्वरोजगार पर फोकस रहेगा।
सख्त रहेगी सुरक्षा व्यवस्था
सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। विधान भवन के आसपास पुलिस और रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स (RRF) तैनात हैं, ताकि कार्यवाही सुचारू रूप से चले। कुल मिलाकर, यह बजट सत्र न केवल वित्तीय दस्तावेज पेश करने का माध्यम होगा, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच विचारों की टक्कर का मैदान भी बनेगा। जहां सरकार विकास और उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटेगी, वहीं विपक्ष जमीनी हकीकत पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करेगा। सत्र का नतीजा आने वाले चुनावों में भी असर डालेगा।
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