
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपना आखिरी पूर्ण बजट पेश करने जा रही है, जो राज्य के क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने और विकास की गति को तेज करने पर केंद्रित होगा। 11 फरवरी को विधानसभा में प्रस्तुत होने वाला यह बजट पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
37 जिलों को मिलेगा लाभ

सूत्रों के अनुसार, बजट में पूर्वांचल और बुंदेलखंड विकास निधि के लिए कुल 1900 करोड़ रुपये तक का आवंटन प्रस्तावित है, जो चालू वित्तीय वर्ष के 1200 करोड़ रुपये से करीब 700 करोड़ रुपये अधिक होगा। यह आवंटन राज्य के 37 पिछड़े जिलों को सीधा लाभ पहुंचाएगा, जिसमें पूर्वांचल के 30 जिले और बुंदेलखंड के 7 जिले शामिल हैं। प्रस्तावित वितरण के मुताबिक, पूर्वांचल विकास निधि के लिए 1400 करोड़ रुपये और बुंदेलखंड विकास निधि के लिए 500 करोड़ रुपये रखे जा सकते हैं।
यह कदम योगी आदित्यनाथ सरकार की ‘संतुलित क्षेत्रीय विकास’ नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूर्वी और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के जिलों में इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, कुल बजट का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा (लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये) सड़कों, पुलों, एक्सप्रेस-वे, लिंक एक्सप्रेस-वे, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जाएगा।
बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज करने के प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं, जिससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इसके अलावा, डिफेंस कॉरिडोर परियोजना को बड़ा बजटीय आवंटन मिलने की संभावना है। यह परियोजना पहले से ही बुंदेलखंड और आसपास के क्षेत्रों में निवेश और रोजगार सृजन का प्रमुख स्रोत बन चुकी है।
सरकार का लक्ष्य है कि इन परियोजनाओं से न केवल आर्थिक विकास हो, बल्कि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी मिलें।
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बजट का आकार
11 फरवरी को पेश होने वाला उत्तर प्रदेश का बजट 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होने का अनुमान है। यह राज्य की बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश और विकास योजनाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। बजट में विभिन्न सेक्टरों पर खर्च का अनुपात इस प्रकार रह सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर: 25%
शिक्षा: 15%
कृषि: 12%
स्वास्थ्य: 8%
सामाजिक सुरक्षा योजनाएं: 5%
पेंशन में बढ़ोत्तरी के आसार

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ाने की तैयारी है, ताकि ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध हों। महिलाओं, युवाओं और सामाजिक सुरक्षा पर राहत पैकेज, बजट में महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए कई राहत उपाय प्रस्तावित हैं। निराश्रित महिला पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन में बढ़ोतरी की संभावना है।
बेटियों को अधिक सहायता देने की तैयारी
आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में इजाफा किया जा सकता है। सरकार स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं की संख्या को 3 करोड़ तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही हैं। ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए अतिरिक्त फंड का प्रावधान भी संभव है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की सहायता राशि में बढ़ोतरी की उम्मीद है। 2017 में शुरू हुई इस योजना में सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के कारण मौजूदा राशि अपर्याप्त हो गई है, इसलिए इसे संशोधित कर जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को अधिक सहायता देने की तैयारी है।
राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह बजट योगी सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में विकास की कमी को लेकर अक्सर विपक्ष हमलावर रहता है। इस बजट के माध्यम से सरकार इन क्षेत्रों में संतुलित विकास का संदेश देना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 1900 करोड़ का अतिरिक्त आवंटन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस इन क्षेत्रों के मतदाताओं को आकर्षित कर सकता है।
11 फरवरी को पेश होगा बजट
बजट सत्र 9 फरवरी से शुरू हो चुका है, और 11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा बजट पेश किए जाने के बाद 16 से 18 फरवरी तक चर्चा होगी। राज्य सरकार का दावा है कि यह बजट न केवल आर्थिक दस्तावेज होगा, बल्कि विकास, कल्याण और क्षेत्रीय संतुलन का मजबूत रोडमैप भी साबित होगा।
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