
कानपुर। कानपुर में यातायात की बढ़ती समस्या को दूर करने और शहर के आसपास सुगम, तेज परिवहन व्यवस्था स्थापित करने के लिए कानपुर रिंग रोड परियोजना ने अब तेज रफ्तार पकड़ ली है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारियों ने शुक्रवार को प्रोजेक्ट साइट का निरीक्षण किया और पुष्टि की कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्ष 2028 तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगी। इस रिंग रोड से कानपुर शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आएगा।
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4 चरणों में बंटी है परियोजना

NHAI के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल और परियोजना निदेशक पंकज यादव ने बताया कि कानपुर आउटर रिंग रोड कुल 93-94 किलोमीटर लंबी है और यह 6 लेन की हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगी। परियोजना को चार मुख्य पैकेजों (या चरणों) में बांटा गया है, जिससे निर्माण कार्य व्यवस्थित और तेजी से हो सके। अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण (पैकेज-1) का काम सबसे तेजी से चल रहा है और सितंबर 2026 तक इसके पूरा होने की संभावना है। शेष तीन पैकेजों का निर्माण 2027 के अंत तक पूरा जाएगा, जबकि अंतिम पैकेज (या पूरा प्रोजेक्ट) अप्रैल 2028 तक यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
पूरा हो चुका है 25 प्रतिशत काम
अभी तक परियोजना का करीब 25 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। विभिन्न पैकेजों में अलग-अलग प्रगति है। पैकेज-1 (सचेंडी से मंधना तक लगभग 23.325 किमी) में 50 प्रतिशत तक काम हो चुका है, जबकि अन्य पैकेजों में निर्माण शुरू हो चुका है। कुल लागत लगभग 5800 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस रोड पर वाहनों की अधिकतम गति 100 किमी/घंटा होगी, जिससे यात्रा समय में काफी कमी आएगी। परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में गंगा नदी पर बन रहा पुल शाल है।
ट्रैफिक को मिलेगी रफ्तार
बिठूर में गंगा पर 3300 मीटर लंबा पुल बन रहा है, जो परियोजना की सबसे बड़ी कड़ी मानी जा रही है। इसके अलावा चकेरी में 1100 मीटर लंबा पुल भी निर्माणाधीन है। कुल मिलाकर 6 बड़े पुल बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा चकेरी एयरपोर्ट को रिंग रोड से जोड़ने के लिए 1.45 किलोमीटर लंबी 4-लेन लिंक रोड भी बनाई जा रही है, जो पैकेज-3 में शामिल है। इस रिंग रोड के बनने से कानपुर शहर में ट्रैफिक की रफ्तार तीन गुना तक बढ़ने का अनुमान है।
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वर्तमान में हमीरपुर, बुंदेलखंड और अन्य दिशाओं से लखनऊ जाने वाले वाहनों को शहर के बीच से गुजरना पड़ता है, जिससे जाम, प्रदूषण और समय की बर्बादी होती है। रिंग रोड बनने के बाद ये वाहन शहर के बाहर से ही जाम-मुक्त रास्ते से गुजर सकेंगे। ये परियोजना उन्नाव और कानपुर देहात जिलों से होकर गुजरेगी।
इन रिंग रोड से होगा कनेक्ट
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को उन्नाव में रिंग रोड से जोड़ा जाएगा। कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को रमईपुर में कनेक्ट किया जाएगा। इससे 5 राष्ट्रीय राजमार्गों और 2 राज्य राजमार्गों को बेहतर जुड़ाव मिलेगा।

इसके साथ ही लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (NE-6) का भी अपडेट मिला है। NHAI अधिकारियों ने बताया कि इस पर केवल 105 मीटर का काम बाकी है, जिसे तेजी से पूरा किया जा रहा है। उम्मीद है कि 20 मार्च 2026 तक निर्माण समाप्त हो जाएगा और अप्रैल 2026 की पहली सप्ताह से यातायात शुरू हो जाएगा। एक्सप्रेसवे पर दोनों तरफ रेस्ट एरिया बनाए जा रहे हैं, जिनके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। यह एक्सप्रेसवे कानपुर और लखनऊ के बीच यात्रा समय को 3 घंटे से घटाकर 45-60 मिनट कर देगा, जिससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
विकास के द्वार खोलेगी परियोजना
यह न केवल स्थानीय ट्रैफिक को 60 प्रतिशत तक कम करेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, व्यापार, पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा देगी। NHAI की टीम नियमित निरीक्षण कर रही है ताकि समयसीमा पर काम पूरा हो। अधिकारियों का दावा है कि सभी चुनौतियों के बावजूद प्रोजेक्ट ट्रैक पर है और 2028 तक कानपुरवासियों को यह विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर मिल जाएगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति का हिस्सा है, जहां एक्सप्रेसवे और रिंग रोड्स से कनेक्टिविटी बढ़ रही है। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर के लिए यह विकास नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा।



