नई दिल्ली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) ने गुरुवार को अपने 11 साल पूरे कर लिए। बीते एक दशक से अधिक समय में यह योजना देश की बेटियों के लिए सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय बचत योजनाओं में शुमार हो चुकी है। यह स्कीम न सिर्फ आर्थिक सुरक्षा देती है, बल्कि बेटियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर परिवारों को समय रहते योजना बनाने के लिए प्रेरित करती है।
22 जनवरी 2015 को हुई थी योजना की शुरुआत
सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत की गई थी। इसका मकसद केवल बचत को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि बेटियों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और भविष्य की आर्थिक जरूरतों को लेकर समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना भी था। समय के साथ यह योजना देशभर में भरोसे और जागरूकता का प्रतीक बन गई है।
11 साल में खुले 4.53 करोड़ से ज्यादा खाते
22 जनवरी 2026 को जब इस योजना के 11 साल पूरे हो रहे हैं, तब तक इसके तहत 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि अब माता-पिता बेटियों के भविष्य को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग और जिम्मेदार हो रहे हैं। दिसंबर 2025 तक इस योजना में कुल जमा राशि 3.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है।
फिलहाल 8.2 फीसदी सालाना ब्याज का फायदा
सुकन्या समृद्धि योजना पर इस समय 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है, जो बेटियों के लिए बनी सरकारी योजनाओं में सबसे अधिक दरों में शामिल है। इसमें जमा की गई राशि और उस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा सुरक्षित होता है, जिससे यह एक कम जोखिम और भरोसेमंद निवेश विकल्प बन जाता है।
पढ़ाई और शादी के खर्च में देती है मजबूत सहारा
यह योजना खास तौर पर बेटियों की उच्च शिक्षा और शादी जैसे बड़े खर्चों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके जरिए लड़कियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर भविष्य की नींव रखने में मदद मिलती है, जो महिला सशक्तीकरण के लक्ष्य को मजबूती देती है।
कौन खोल सकता है सुकन्या समृद्धि खाता
बेटी के माता-पिता या कानूनी अभिभावक किसी भी डाकघर या अधिकृत बैंक शाखा में सुकन्या समृद्धि खाता खोल सकते हैं। यह खाता बेटी के जन्म से लेकर 10 साल की उम्र तक खोला जा सकता है। हर बेटी के नाम पर केवल एक खाता खोला जाता है और एक परिवार में अधिकतम दो खाते खोलने की अनुमति होती है, हालांकि जुड़वां या तीन बच्चों के मामलों में विशेष छूट दी जाती है।
खाते से जुड़ी जरूरी शर्तें और दस्तावेज
सुकन्या खाता पूरे भारत में कहीं भी ट्रांसफर किया जा सकता है। 18 साल की उम्र तक इसे अभिभावक संचालित करते हैं, इसके बाद बेटी खुद खाता संभाल सकती है। खाता खोलने के लिए आवेदन फॉर्म, बेटी का जन्म प्रमाण पत्र, आधार नंबर और पैन कार्ड या फॉर्म 60 की जरूरत होती है।
न्यूनतम जमा से लेकर निकासी तक के नियम
इस योजना में सालाना न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं। खाता खुलने की तारीख से 15 साल तक इसमें निवेश किया जा सकता है। ब्याज की गणना मासिक आधार पर होती है और हर वित्तीय वर्ष के अंत में खाते में जोड़ दी जाती है। बेटी के 18 साल पूरे होने या 10वीं पास करने के बाद शिक्षा के लिए खाते से 50 प्रतिशत तक राशि निकाली जा सकती है, वह भी जरूरी दस्तावेज देने पर।
21 साल में होता है खाता परिपक्व
सुकन्या समृद्धि खाता 21 साल में परिपक्व होता है। कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे बेटी की शादी (18 साल के बाद) या मृत्यु की स्थिति में ही इसे समय से पहले बंद करने की अनुमति होती है। पहले पांच साल तक खाता बंद नहीं किया जा सकता।
उच्च ब्याज दर, टैक्स छूट और पढ़ाई के लिए आंशिक निकासी की सुविधा के चलते सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों के लिए सबसे बेहतर दीर्घकालीन बचत योजनाओं में गिनी जाती है और उनके सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव रखती है।
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