नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को जबरदस्त कोहराम देखने को मिला। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की कमर तोड़ दी। सेंसेक्स 1065.71 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 82,180.47 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 353 अंकों की भारी कमजोरी के साथ 25,232.50 पर फिसल गया। बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की चिंता बढ़ती नजर आ रही है।

गिरावट के पीछे क्या हैं बड़ी वजहें
शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नए टैरिफ वॉर को लेकर बढ़ती चिंताओं ने ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल बना दिया है। इसके अलावा, शेयर बाजार से पैसा निकालकर निवेशकों का सोने-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करना और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।
सेंसेक्स में सिर्फ एक शेयर हरे निशान में
मंगलवार को सेंसेक्स की 30 में से सिर्फ एक ही कंपनी का शेयर बढ़त के साथ बंद हो पाया। एचडीएफसी बैंक का शेयर 0.38 फीसदी की तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ, जबकि बाकी की सभी 29 कंपनियों के शेयर लाल निशान में रहे। निफ्टी 50 की हालत भी कुछ ऐसी ही रही, जहां 50 में से केवल 3 शेयरों में ही तेजी देखने को मिली और 47 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
सबसे ज्यादा नुकसान में ये बड़े शेयर
आज के कारोबार में जोमैटो की पैरेंट कंपनी एटरनल के शेयर सबसे ज्यादा टूटे और 4.02 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके अलावा बजाज फाइनेंस 3.88 फीसदी, सन फार्मा 3.68 फीसदी, इंडिगो 3.04 फीसदी और ट्रेंट 2.89 फीसदी गिरकर बंद हुए। एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील और अडाणी पोर्ट्स जैसे दिग्गज शेयरों में भी 2 से 3 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
आईटी, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर पर भी दबाव
आईटी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में टीसीएस 1.74 फीसदी, इंफोसिस 1.35 फीसदी और एचसीएल टेक 1.48 फीसदी टूटे। बैंकिंग सेक्टर में एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई जैसे शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे हैवीवेट शेयरों ने भी बाजार की गिरावट को और गहरा किया।
निवेशकों की नजर आगे की चाल पर
बाजार में आई इस तेज गिरावट के बाद निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, अमेरिकी नीतिगत फैसलों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर टिकी है। जानकारों का मानना है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितता कम नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
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