30% तक सस्ता किराया और जीरो कमीशन मॉडल! भारत टैक्सी एप ने ओला-उबर की बढ़ाई टेंशन, जानें कैसे बदल रहा गेम

नई दिल्ली। टैक्सी और कैब सर्विस के बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस महीने की शुरुआत में केंद्र की सहकारी पहल के तहत भारत टैक्सी एप लॉन्च किया गया है, जो सीधे तौर पर ओला, उबर और रैपिडो जैसी निजी कंपनियों को चुनौती दे रहा है। कम किराया, जीरो या बेहद कम कमीशन और ड्राइवरों को ज्यादा कमाई—यही इस नए प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत बनकर उभरी है।

ड्राइवरों की कमाई में बड़ा फर्क
अब तक ओला, उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म ड्राइवरों की कमाई से 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन काट लेते थे, जिससे ड्राइवरों को नुकसान उठाना पड़ता था। इसके मुकाबले भारत टैक्सी एप जीरो कमीशन या बेहद कम फीस वाले मॉडल पर काम कर रहा है। इसका सीधा फायदा ड्राइवरों को मिल रहा है और उनकी कुल कमाई का करीब 80 से 100 प्रतिशत हिस्सा उन्हीं के पास रह रहा है।

कंपनियों पर निर्भरता होगी कम
भारत टैक्सी एप के आने से ड्राइवरों को दोहरा लाभ मिल रहा है। एक तरफ जहां उनकी आय बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर बड़ी प्राइवेट कंपनियों पर उनकी निर्भरता भी घट रही है। सहकारी मॉडल के चलते ड्राइवर खुद को ज्यादा सशक्त महसूस कर रहे हैं और उन्हें कंपनी में हिस्सेदारी का भी लाभ मिल रहा है।

ओला-उबर के मॉडल से कैसे अलग है भारत टैक्सी?
ओला-उबर और रैपिडो का बिजनेस मॉडल ड्राइवर के किराए से भारी कमीशन वसूलने पर आधारित है। इसके अलावा, डायनामिक या सर्ज प्राइसिंग के चलते मांग बढ़ते ही किराया आसमान छूने लगता है। इससे यात्रियों पर आर्थिक बोझ पड़ता है और किराया अस्थिर हो जाता है।
इसके उलट भारत टैक्सी एप बिना सर्ज प्राइसिंग के काम करता है। यहां किराया पारदर्शी और स्थिर रहता है, जिससे यात्रियों को महंगे किराए से राहत मिलती है और ड्राइवरों की कमाई भी सुरक्षित रहती है।

ड्राइवरों की मनमानी पर भी लगेगी लगाम
भारत टैक्सी एप को एक नए कैब एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है, ताकि ड्राइवरों और यात्रियों दोनों के हितों की रक्षा की जा सके। सस्ती दरें, बिना सर्ज प्राइसिंग और पारदर्शी सिस्टम के कारण यात्रियों को भरोसेमंद सेवा मिलती है, वहीं ड्राइवरों को अधिक कमाई और स्थिर कामकाज का मौका मिलता है।

देशभर में चरणबद्ध तरीके से होगी शुरुआत
फिलहाल भारत टैक्सी एप की सेवा दिल्ली में शुरू हो चुकी है और जल्द ही इसे देश के अन्य हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सहकारी मॉडल पर आधारित यह एप निजी कैब कंपनियों के हाई कमीशन सिस्टम को सीधी चुनौती दे रहा है और टैक्सी बाजार में नए बदलाव की नींव रख रहा है।

 

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