नई दिल्ली: घर खरीदने के लिए लोग अक्सर 20, 25 या 30 साल की लंबी अवधि का होम लोन लेते हैं, लेकिन इस दौरान एक सच्चाई यह भी है कि शुरुआती वर्षों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में चला जाता है और मूल रकम यानी प्रिंसिपल बहुत धीरे-धीरे घटता है। यही वजह है कि कई बार लोन की कुल अवधि में आप जितना घर की कीमत चुकाते हैं, उससे कहीं ज्यादा रकम ब्याज के रूप में बैंक को दे देते हैं। हालांकि अगर सही समय पर एक आसान प्रीपेमेंट रणनीति अपना ली जाए, तो 25 साल का लोन 20 साल से भी पहले खत्म किया जा सकता है और लाखों रुपये की बचत संभव है।

50 लाख रुपये के होम लोन का पूरा गणित
मान लीजिए आपने 50 लाख रुपये का होम लोन 25 साल के लिए लिया है और ब्याज दर 8.5% है। इस स्थिति में आपकी मासिक EMI करीब 40,261 रुपये बनती है। पूरी अवधि में आप लगभग 70.78 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में चुका देते हैं और कुल भुगतान करीब 1.21 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। यानी ब्याज की रकम ही प्रिंसिपल से करीब 21 लाख रुपये ज्यादा हो जाती है।
प्रीपेमेंट से कैसे बचेंगे लाखों और कई साल
अगर आप लोन के दूसरे साल से हर साल सिर्फ एक अतिरिक्त EMI जमा करना शुरू कर दें, तो तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। यानी साल में एक बार 40,261 रुपये अतिरिक्त प्रिंसिपल में डाल दें। इस छोटे से कदम से करीब 18.31 लाख रुपये तक का ब्याज बच सकता है और लोन की अवधि लगभग 5 साल 5 महीने यानी करीब 65 महीने कम हो सकती है। उदाहरण के तौर पर यदि आपने जनवरी 2026 में लोन लिया और फरवरी 2027 से हर साल एक एक्स्ट्रा EMI देने लगे, तो शर्त यह है कि ब्याज दर पूरे समय समान बनी रहे।
शुरुआती सालों में प्रीपेमेंट क्यों है ज्यादा फायदेमंद
फाइनेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि होम लोन के शुरुआती वर्षों में किया गया प्रीपेमेंट सबसे ज्यादा असर दिखाता है। वजह यह है कि उस समय EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है। ऐसे में बोनस, सैलरी इन्क्रीमेंट या टैक्स रिफंड जैसी रकम से प्रीपेमेंट करना समझदारी भरा कदम माना जाता है।
फिक्स्ड, MCLR और रेपो लिंक्ड लोन में क्या फर्क
प्रीपेमेंट हर तरह के होम लोन में फायदेमंद होता है क्योंकि इससे सीधे प्रिंसिपल कम होता है। फ्लोटिंग रेट लोन, जैसे रेपो लिंक्ड या MCLR बेस्ड लोन में आमतौर पर प्रीपेमेंट पर कोई पेनल्टी नहीं लगती, जबकि फिक्स्ड रेट लोन में कुछ चार्ज लग सकते हैं। इसलिए प्रीपेमेंट से पहले अपनी लोन शर्तें जरूर जांच लें।
बैंक को कैसे और क्यों दें जानकारी
प्रीपेमेंट आप नेट बैंकिंग, ब्रांच विजिट या स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन के जरिए कर सकते हैं। इस बात का खास ध्यान रखें कि अतिरिक्त रकम प्रिंसिपल घटाने में लगे, न कि EMI कम करने में, क्योंकि अवधि घटने से ही असली बचत होती है।
प्रीपेमेंट की सही रणनीति क्या होनी चाहिए
सबसे पहले कम से कम 6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं, हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस जरूर लें और जरूरी निवेश जारी रखें। इसके बाद जो अतिरिक्त पैसा बचे, उससे होम लोन प्रीपेमेंट करें। बोनस, इन्क्रीमेंट और टैक्स रिफंड का इस्तेमाल इस काम के लिए सबसे आसान और सुरक्षित तरीका माना जाता है।
Sarkari Manthan Hindi News Portal & Magazine