नई दिल्ली। सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में दर्द, कमर में जकड़न और हल्की सी ठोकर में हड्डी टूटने का डर—अब तक इसे मेनोपॉज के बाद उम्र का स्वाभाविक असर माना जाता रहा है। लेकिन एम्स के नए शोध ने इस सोच को बदलने वाला बड़ा संकेत दिया है। अध्ययन के मुताबिक, हड्डियों की कमजोरी सिर्फ कैल्शियम या हार्मोन की कमी से नहीं, बल्कि इसकी असली वजह आंतों यानी गट में होने वाली सूजन भी हो सकती है।

एम्स के वैज्ञानिकों का कहना है कि मेनोपॉज के बाद जब शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन घटता है, तो इसका असर आंतों की प्रतिरक्षा प्रणाली पर पड़ता है। इससे गट में सूजन बढ़ती है और यही सूजन धीरे-धीरे हड्डियों को अंदर से खोखला कर देती है। इस प्रक्रिया में अच्छे बैक्टीरिया यानी प्रोबायोटिक्स की भूमिका बेहद अहम मानी गई है।
फ्रैक्चर का खतरा क्यों बढ़ता है?
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) की ट्रांसलेशनल ऑस्टियोइम्यूनोलॉजी एंड इम्यूनोपोरोसिस लैब के एडीशनल प्रोफेसर डॉ. रूपेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में यह शोध किया गया। डॉ. श्रीवास्तव बताते हैं कि अगर आंतों की सूजन नियंत्रित न हो, तो शरीर हड्डियों के क्षरण की प्रक्रिया को रोक नहीं पाता। ऐसे में मामूली गिरने या चोट से भी फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस का नया नजरिया
शोध में सामने आया है कि ऑस्टियोपोरोसिस केवल हड्डियों की बीमारी नहीं, बल्कि यह इम्यून सिस्टम से भी जुड़ी है। इसे वैज्ञानिकों ने ‘इम्यूनोपोरोसिस’ नाम दिया है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में हड्डियों का इलाज सिर्फ कैल्शियम, हार्मोन या दवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गट माइक्रोबायोम और इम्यून बैलेंस भी इलाज की अहम कड़ी बनेंगे।
प्रोबायोटिक्स निभा सकते हैं बड़ी भूमिका
अध्ययन के मुताबिक, लैक्टोबैसिलस एसिडोफिलस जैसे अच्छे बैक्टीरिया आंतों की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। ये प्रोबायोटिक्स आंतों में प्रतिरक्षा कोशिकाओं का संतुलन सुधारते हैं, जिसका सीधा असर हड्डियों की मजबूती, इम्युनिटी और ओवरऑल हेल्थ पर पड़ता है।
हड्डियों को मजबूत रखने के उपाय
- रोज सुबह 15–20 मिनट धूप में बैठें (विटामिन-D के लिए)
- तिल, रागी, सोयाबीन और मूंगफली को डाइट में शामिल करें
- दही जैसे प्रोबायोटिक फूड्स का सेवन करें
- दूध, छाछ और पनीर रोजाना लें
- हल्का-फुल्का व्यायाम नियमित करें
- हल्दी वाला दूध सूजन और दर्द में फायदेमंद
- नमक और चीनी का सेवन सीमित रखें
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
- दिनभर पर्याप्त पानी पिएं
इन बातों का रखें खास ध्यान
- 50 साल के बाद हड्डियों की जांच जरूर कराएं
- दर्द को उम्र का असर मानकर नजरअंदाज न करें
- घर में गिरने से बचाव के उपाय अपनाएं
- संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाएं
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