
तेहरान/तेल अवीव। मध्य पूर्व एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस्राइल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर बड़े पैमाने पर हमला किये हैं। इसकी पुष्टि खुद इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने की। काटज ने कहा, इस्राइल ने ईरान के खिलाफ प्री-एम्प्टिव अटैक लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य इस्राइल को किसी भी खतरे से सुरक्षित रखना है। हमले के बाद तेहरान में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दी। शहर के डाउनटाउन इलाके से घना धुआं भी उठता देखा गया। धमाकों की पुष्टि ईरानी मीडिया ने की। हालांकि हमले की वजह के बारे के जानकारी नहीं दी गई।
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परमाणु समझौते पर विफल बातचीत का परिणाम

ईरानी मीडिया ने भी धमाकों की पुष्टि की है, हालांकि हमले की वजह पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। यह हमला अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते की बातचीत विफल होने के बाद हुआ है। फरवरी में जेनेवा और अन्य स्थानों पर हुई दोनों देशों के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ताओं में कोई सकारात्मक समझौता नहीं हो सका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को चेतावनी दी थी और परमाणु कार्यक्रम रोकने की बात कही थी। वहीं, इस्राइल बार-बार कह रहा था कि, ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी है।
जून 2025 में भी हुआ था संघर्ष
बता दें कि, जून 2025 में हुए 12-दिवसीय इस्राइल-ईरान युद्ध के बाद यह दूसरा बड़ा प्रत्यक्ष हमला है। जून 2025 में इस्राइल ने ईरान की परमाणु सुविधाओं और मिसाइल उत्पादन स्थलों को निशाना बनाया था। इस बार भी इस्राइल ने मिसाइलों से तेहरान पर हमला किया, जिसमें मेहराबाद एयरपोर्ट सहित कई जगहों को निशाना बनाया गया। ईरानी राज्य मीडिया ने बताया कि तेहरान में धमाकों की आवाजें सुनाई दीं और आसमान में धुआं फैल गया।
कुछ रिपोर्टस में दावा किया गया है कि, हमला सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालयों के निकट हुआ। हालांकि, खामेनेई की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई। इस्राइल की तरफ से हमले का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें रॉकेट दागते हुए दिखाया गया है। ईरान पर यह हमला “प्री-एम्प्टिव” बताया जा रहा है यानी दुश्मन के हमले की आशंका से पहले ही किया गया, ताकि ईरान को कमजोर किया जा सके। इस्राइल की सेना (आईडीएफ) ने कहा कि ईरान से जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका है। इसी कारण पूरे इस्राइल में सायरन बजाए गए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और घरों से काम करने की सलाह दी गई है।
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इस्राइल में आपातकाल घोषित
रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने पूरे देश में आपातकाल घोषित कर दिया है। सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। हवाई सीमाएं पूरी तरह से सील कर दी गई हैं। उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। आईडीएफ ने चेतावनी दी है कि, ईरान बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से हमला कर सकता है। पिछले युद्ध में ईरान ने 550 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और 1,000 से ज्यादा एकतरफा हमला ड्रोन दागे थे, जिनमें से अधिकांश को इस्राइल ने इंटरसेप्ट कर लिया था और हवा में ही नेस्तनाबूद कर दिया था। इस बार भी इजराइल-ईरान के हमले पर प्रतिक्रिया देने को पूरी तरह से तैयार है।
अमेरिका ने इस हमले पर तत्काल टिप्पणी नहीं की, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शून्य संवर्धन की मांग की थी। पहले की वार्ताओं में अमेरिका ने फोर्डो, नतांज और इस्फहान जैसी सुविधाओं को नष्ट करने और यूरेनियम अमेरिका को सौंपने की मांग की थी, जबकि ईरान ने सभी प्रतिबंध हटाने और न्यूनतम संवर्धन की मांग की थी। ओमान के विदेश मंत्री ने महत्वपूर्ण प्रगति का दावा किया था, लेकिन कोई समझौता नहीं हुआ।
मध्य एशिया में बड़े युद्ध की आशंका
इजराइल का ईरान पर ये हमला जून 2025 के युद्ध के बाद हुआ है। 2025 में इजराइल के साथ अमेरिका ने भी ईरान की तीन परमाणु साइटों पर हमला किया था। ईरान ने तब कतर में अमेरिकी बेस पर मिसाइल दागी थी। हालांकि, 12 दिनों के संघर्ष के बाद युद्धविराम हो गया था। अब स्थिति एक बार फिर से बिगड़ गई है। ईरान रूस और चीन से हथियार खरीद रहा है, जिसमें मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम और एंटी-शिप मिसाइल शामिल हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धाभ्यास भी किया है, जहां से तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

ईरान पर इजराइल की ये कार्रवाई मध्य पूर्व को बड़े युद्ध की तरफ धकेल सकती है। अगर ईरान जवाबी हमला करता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो सकता है, जिससे वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं। ईरान के प्रॉक्सी जैसे हिजबुल्लाह, हमास और इराकी मिलिशिया सक्रिय हो सकते हैं। इस्राइल ने पहले ही लेबनान और सीरिया में हिजबुल्लाह को कमजोर किया है।
जानकारों का कहना है कि, सीमित हमला हो सकता है या फिर युद्ध लंबा हो सकता है। अमेरिका ने क्षेत्र में बड़ी सैन्य तैनाती की है। ट्रंप ने कहा है कि, अगर समझौता नहीं हुआ तो स्थिति खराब हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तनाव कम करने की अपील की है, लेकिन स्थिति बेकाबू लग रही है।
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