यूपी विधानसभा में हंगामा: संजय निषाद ने सपा पर जातिसूचक शब्द का लगाया आरोप, हाथापाई की नौबत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र 2026 के दौरान बुधवार शाम को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हाथापाई तक पहुंच गई। मत्स्य विकास मंत्री और निषाद पार्टी अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के भाषण के दौरान सपा विधायकों के विरोध से सदन गरमा गया। विवाद इतना बढ़ा कि सपा सदस्यों ने मंत्री के हाथ से भाषण के कागज छीन लिए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प की नौबत आ गई। सदन में हंगामा मचने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को हस्तक्षेप करना पड़ा और दोनों पक्षों को शांत करवाया।

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विपक्ष के बदले तेवर 

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संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे मंत्री पर हमले की कोशिश करार देते हुए पीठ से शिकायत की। बजट पर चर्चा के दौरान डॉ. संजय निषाद अपनी बारी में उठे और प्रदेश सरकार के बजट की जमकर तारीफ की। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की उपलब्धियां गिनाईं तथा मत्स्य विभाग में हुई प्रगति का जिक्र किया, लेकिन बात विपक्ष पर पहुंचते ही तेवर बदल गए। निषाद ने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि निषाद समुदाय ने अंग्रेजों और मुगलों से लड़ाई लड़ी और पिछले 75 साल से कांग्रेस जैसे ‘बेईमानों’ से भी लड़ रहा है। दाहिने तरफ बैठे सपा सदस्यों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि 30 साल की सत्ता में सपा ने मछुआ समाज के लिए एक रुपया भी नहीं दिया। मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 67 साल में पूरे देश के लिए 3000 करोड़ रुपये दिए, लेकिन यूपी सरकार ने एक रुपया भी नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि सपा ने मछुआरों के एक पद को उर्दू अनुभाग में भर्ती कर दिया। क्या निषाद उर्दू पढ़ता है या मछली उर्दू पढ़ती है? ये मछुआरों के मगरमच्छ हैं। दिल्ली से आए पैसे भी खा गए, निषाद ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि पिछली सरकारों ने निषादों को ‘केवटवा, मल्लावा, बिंदवा’ कहकर मारा और नौकरी-रोजी-रोटी लूट ली। गोरखपुर में आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाज ने उन्हें सदन में भेजा है ताकि इनका पर्दाफाश करें।

नेता प्रतिपक्षा पर साधा निशान 

विवाद तब भड़का जब निषाद ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय पर निशाना साधा। उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण पर पांडेय के वक्तव्य में इस्तेमाल जातिसूचक शब्द का जिक्र किया और कहा कि अपने नेता से कहिए कि माफी मांगें। अगर नहीं मांगते हैं तो एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया जाएगा, जो जातिसूचक शब्द कहे, वह सम्मानित शब्द है? निषाद ने पूछा।

उन्होंने सामाजिक न्याय रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछड़ों का 27 प्रतिशत आरक्षण एक खास वर्ग ने हड़प लिया और 23 प्रतिशत दूसरे ने। इस बयान से आक्रोशित सपा विधायक वेल में पहुंच गए और विरोध जताने लगे। सदन में टोकाटोकी तेज हो गई। निषाद ने कहा कि यहां पहले अंग्रेज बैठते थे, निषादों ने उनसे लड़ाई लड़ी तभी आज आप सदन में बैठे हैं। इसी बीच कुछ सपा सदस्य मंत्री की तरफ बढ़े और उनके हाथ से भाषण के कागज छीन लिए।

विधानसभा अध्यक्ष ने कराया शांत

निषाद पार्टी के विधायक उग्र हो गए और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे मंत्री पर हमले की कोशिश बताया और पीठ से शिकायत की। हंगामा बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को सदन में आना पड़ा। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत करवाया और कहा कि सदन जैसे चलता रहा है वैसे ही चलने दिया जाए।

अध्यक्ष ने बहस को सामान्य करने की अपील की। हालांकि, विवाद थमने में समय लगा।यह घटना बजट सत्र में सियासी तनाव का नया उदाहरण है। सपा ने इसे सरकार की असफलता और आरक्षण पर बहस से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे विपक्ष की असहिष्णुता करार दिया। संजय निषाद के बयानों ने निषाद समुदाय और आरक्षण के मुद्दे को फिर से गरमा दिया है। सत्र में ऐसे हंगामे जारी रहने की आशंका है।

 

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