शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ी, संतों ने की शांति की अपील

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में माघ मेला जोर-शोर से चल रहा है। यहां मौनी अमावस्या पर संगम स्नान लेकर हुए विवाद के बाद से धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत आज अचानक से बिगड़ गई है। वे पिछले छह दिनों से हड़ताल पर हैं। इस दौरान उन्होंने मेला प्रशासन से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ तक पर निशाना साधा।

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बुखार से पीड़ित हुए शंकराचार्य

 शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

बताया जा रहा है कि, शंकराचार्य बुखार से पीड़ित हैं। उन्होंने दिन में सिर्फ दो बार पालकी में यात्रा की है। इसके बाद से वे अपनी गाड़ी में आराम कर रहे हैं। मौनी अमावस्या पर पालकी और जुलूस के साथ संगम स्नान करने पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के बर्ताव पर नाराजगी जताई और तब से वे अपने कैंप में वापस नहीं लौटे हैं। इधर, संत समाज ने उनसे शांति और सयंम की अपील की है। उनकी बिगड़ती सेहत की खबर से उनके शिष्यों और समर्थकों में चिंता की लहर दौड़ गई है। प्रशासन भी हालात पर नज़र रखे हुए है।

बातचीत से सुलझाएं विवाद

नासिक में संत महंत रामस्नेही दास और गुरु नित्यानंद गोपाल दास के शिष्य महंत बैजनाथ ने कहा, महंत बैजनाथ ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों को टकराव से नहीं, बल्कि सम्मानजनक बातचीत से सुलझाना चाहिए। बैजनाथ ने कहा, शंकराचार्य मठ बेहद सम्मानित आध्यात्मिक गुरु हैं।” उनके नाम को लेकर इस तरह का विवाद ठीक नहीं है। लोगों को उम्मीद होती है कि, आध्यात्मिक गुरु जो भी चर्चा करते हैं वह स्वस्थ और समाज के हित में होती है। उनके विचार जनता को मार्ग दर्शन देने वाले होते हैं।

संत बैजनाथ ने कहा, ब्राह्मण बच्चों के साथ जो हुआ वह गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए था, लेकिन शंकराचार्य सीनियर और अनुभवी व्यक्ति हैं, उन्हें अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए और अपने शिष्यों व भक्तों को सही दिशा दिखानी चाहिए। इस बीच, महंत रामस्नेही दास ने भी विवाद को बढ़ाने के बजाय शांति से निपटारे की सलाह दी है।

संतों को विनम्र रहना चाहिए

उन्होंने कहा, “माघ मेला सिर्फ़ रोज़ नहाने तक सीमित नहीं है। इस दौरान हम संतों से भी मिलते हैं और मंदिरों में सेवा का काम करते हैं। माघ मेले में संत और आयोजक उन भक्तों को चुनते हैं जिन्हें गंगा में पवित्र डुबकी लगवाई जाती है।” महंत रामस्नेही दास ने कहा कि संतों को हमेशा विनम्र रहना चाहिए और हर मामले में अपने निजी हितों को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए।

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किसी भी विवाद को बढ़ने न दें

उन्होंने अपील की, कि महाराज जी किसी भी विवाद को बढ़ने न दें और शांति का रास्ता अपनाएं। दोनों संतों ने यह भी कहा कि आध्यात्मिक परंपराओं की गरिमा बनाए रखना सबकी ज़िम्मेदारी है।

 शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

समाज मार्गदर्शन के लिए संतों की ओर देखता है, इसलिए उनके आचरण और शब्दों का दूरगामी असर होता है। इसलिए हर कदम सोच-समझकर और संयम से उठाना चाहिए। प्रयागराज में संगम घाट पर हुई घटना के बाद पूरे देश में इस मुद्दे पर चर्चा तेज़ हो गई है। संतों की यह अपील ऐसे समय में आई है जब भक्त और समाज दोनों ही शांति और स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं।

योग गुरु स्वामी रामदेव का बयान

इधर स्वामी रामदेव ने भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों को तीर्थ स्थलों पर आपसी झगड़े से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि, मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रयागराज डिविजनल कमिश्नर सौम्या अग्रवाल से तीखी बहस हुई थी। हाथापाई की तस्वीरें सामने आने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सौम्य गुप्ता के पति और आईपीएस अधिकारी मोहित गुप्ता पर बच्चों के बाल पकड़कर उन्हें पीटने का आरोप लगाया।

इस घटना से आहत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने कैंप के बाहर धरने पर बैठ गये। उन्होंने सबके सामने मोहित गुप्ता का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों ने मर्यादा तोड़ी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में होम सेक्रेटरी और डिविजनल कमिश्नर शंकराचार्य से बहस करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं।

 

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