नेताजी के परपोते ने अश्विनी वैष्णव को लिखा पत्र, ‘फौजी’ का टीजर बैन करने की मांग

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास की अपकमिंग फिल्म ‘फौजी’ का टीजर रिलीज होते ही विवादों में आ गया है। स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिजनों ने फिल्म में नेताजी के चित्रण पर कड़ा ऐतराज जताया है। नेताजी के परपोते चंद्र कुमार बोस ने इस विषय में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म के टीजर को तुरंत सभी प्लेटफॉर्म्स से हटाने और इसके प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) की कार्यप्रणाली और इसकी मंजूरी प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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23 अक्टूबर को जारी हुआ था टीजर

उल्लेखनीय है कि, 23 अक्टूबर को अभिनेता प्रभास के जन्मदिवस के अवसर पर फिल्म निर्माताओं द्वारा ‘फौजी’ का पहला टीजर आधिकारिक रूप से जारी किया गया था। इस फिल्म का निर्देशन चर्चित निर्देशक हनु राघवपुडी कर रहे हैं। टीजर जारी होने के बाद से ही इसमें दिखाए गए कुछ दृश्यों और ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई थीं।

fauji movie

टीजर की रिलीज की तारीख का जिक्र करते हुए चंद्र कुमार बोस ने अपने पत्र में लिखा कि, जिस दिन यह टीजर जारी किया गया, उसी दिन महान क्रांतिकारी नेता और नेताजी के करीबी सहयोगी भगवती चरण पाणिग्रही का 83वां ‘बलिदान दिवस’ भी था। ऐसे दिन पर ऐतिहासिक तथ्यों और राष्ट्रीय नायकों के चरित्र के साथ इस तरह का प्रयोग बेहद चिंताजनक है।

ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ का आरोप

सेंसर बोर्ड और केंद्रीय मंत्री को भेजे गए पत्र में चंद्र कुमार बोस ने टीजर के विशेष दृश्यों का उल्लेख करते हुए गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। पत्र के अनुसार, टीजर में अविभाजित भारत के पहले अंतरिम सरकार के प्रमुख और ‘इंडियन नेशनल आर्मी’ (INA) के सुप्रीम कमांडर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर से बातचीत करते हुए दिखाया गया है। इस दौरान वे हिटलर के सामने फिल्म के काल्पनिक मुख्य पात्र ‘फौजी’ (जिसका किरदार प्रभास निभा रहे हैं) का परिचय देते नजर आ रहे हैं।

नेताजी के परिवार का कहना है कि, नेताजी जैसे महान व्यक्तित्व और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को इस प्रकार किसी काल्पनिक कहानी और पात्र को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल करना पूरी तरह से गलत और आपत्तिजनक है। इससे न केवल ऐतिहासिक तथ्यों का तोड़-मरोड़ होता है, बल्कि देशवासियों और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के प्रति सम्मान को भी ठेस पहुंचती है।

सेंसर बोर्ड की भूमिका पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की कार्यशैली पर खड़ा हुआ है। चंद्र कुमार बोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने पत्र की प्रति साझा करते हुए लिखा, “हमें यह समझ से परे लग रहा है कि, सेंसर बोर्ड ने इस प्रकार की ऐतिहासिक रूप से गलत और आपत्तिजनक सामग्री को बिना किसी जांच-परख के सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए मंजूरी कैसे दे दी?”

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उन्होंने मंत्री अश्विनी वैष्णव से आग्रह किया है कि, वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को निर्देशित करें कि ऐतिहासिक हस्तियों के चित्रण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। परिवार की मांग है कि, जब तक टीजर से नेताजी से जुड़े विवादित दृश्यों को हटाया नहीं जाता, तब तक इस टीजर को सभी डिजिटल और ब्रॉडकास्ट माध्यमों से तुरंत बैन किया जाए।

सोशल मीडिया पर बहस तेज

चंद्र कुमार बोस द्वारा यह पत्र सार्वजनिक किए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया पर भी आम जनता और सिनेमा प्रेमियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। एक वर्ग जहां ऐतिहासिक तथ्यों की प्रामाणिकता और राष्ट्रीय नायकों के सम्मान की बात करते हुए बैन की मांग का समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे सिनेमाई स्वतंत्रता और काल्पनिक कहानी का हिस्सा मान रहा है।

हाल के दिनों में ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित फिल्मों को लेकर विवादों के मामले लगातार बढ़े हैं। ऐसे में प्रभास की फिल्म ‘फौजी’ को लेकर शुरू हुआ यह नया विवाद आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेता है और इस पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय या सेंसर बोर्ड की क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिल्म निर्माताओं की तरफ से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

 

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