
दक्षिण भारतीय सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री कीर्ति सुरेश ने बायोपिक ‘महानती’ में दिग्गज अदाकारा सावित्री का किरदार निभाकर दर्शकों और समीक्षकों की खूब वाहवाही बटोरी थी। फिल्म सफल रही और उनके अभिनय की चर्चा हर तरफ हुई। इसके बावजूद उनके पास नए प्रोजेक्ट्स की लाइन नहीं लगी, जिसकी उम्मीद आमतौर पर ऐसी कामयाबी के बाद की जाती है। हालात ऐसे बने कि उन्हें करीब छह महीने तक घर पर ही बैठना पड़ा। अब उन्होंने खुद इस दौर पर खुलकर बात की है।
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आखिर क्यों नहीं मिल रहे थे ऑफर?
एक इंटरव्यू में कीर्ति ने बताया कि, ‘महानती’ में उनके काम ने फिल्म निर्माताओं की सोच ही बदल दी थी। अब वे उन्हें पहले जैसे साधारण किरदारों में देखने को तैयार नहीं थे। उन्हें लगने लगा था कि, कीर्ति के लिए कोई बड़ा और दमदार किरदार ही लिखा जाना चाहिए। यही वजह रही कि लोग तुरंत उनके पास प्रस्ताव लेकर नहीं पहुंचे।

कीर्ति ने इस पूरे अनुभव को बेहद दिलचस्प बताया। उनके मुताबिक, उन्हें फिल्में इसलिए नहीं मिल रही थीं क्योंकि लोग तय नहीं कर पा रहे थे कि उन्हें किस तरह के किरदारों में कास्ट किया जाए। ‘महानती’ के बाद वे उन्हें उस नजरिए से नहीं देख पा रहे थे, जिससे पहले देखते आए थे। उन्हें एहसास था कि अब कीर्ति को कोई असरदार भूमिका देनी पड़ेगी। अभिनेत्री ने कहा कि यह उनके लिए अच्छा एहसास था और उन्होंने इसे सकारात्मक ढंग से लिया।
लगातार काम के बाद चाहिए था ठहराव
कीर्ति ने यह भी स्वीकार किया कि उस समय उन्हें खुद भी ब्रेक की जरूरत थी। वे कई साल से लगातार एक के बाद एक फिल्में कर रही थीं और रुककर सोचने का वक्त ही नहीं मिला था। उन्होंने बताया कि, जब तक उन्हें यह महसूस नहीं हुआ कि उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है, तब तक वे खुश थीं, लेकिन उन छह महीनों में उन्होंने कुछ अच्छे काम शुरू किए।
इस खाली समय ने उन्हें अपने करियर और निजी जीवन, दोनों के बारे में गंभीरता से सोचने का मौका दिया। कई चीजों को उन्होंने नए नजरिए से समझा और आगे की राह को लेकर अपनी प्राथमिकताएं तय कीं, जिस दौर को बाहर से देखने वाले शायद उनके करियर का मुश्किल समय मानते रहे, वह उनके लिए आत्ममंथन का दौर साबित हुआ।
‘महानती’ से पहले और बाद का फर्क
कीर्ति के करियर को देखें तो ‘महानती’ से पहले वे ज्यादातर कमर्शियल फिल्मों में नजर आती थीं। इन फिल्मों में उनके हिस्से अक्सर आम लड़की वाले किरदार आते थे। ऐसा किरदार, जो कहानी में आता है, थोड़ा-बहुत काम करता है और फिर चला जाता है। कीर्ति ने खुद माना कि ‘महानती’ से पहले उन्होंने बहुत दमदार अभिनय वाले किरदार नहीं निभाए थे।
यही वजह है कि ‘महानती’ उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि करियर का मोड़ साबित हुई। सावित्री जैसी महान अभिनेत्री का किरदार निभाना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी चुनौती होता है और कीर्ति ने इसे बखूबी निभाया। इसी भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला। इस फिल्म के बाद इंडस्ट्री में उन्हें देखने का नजरिया बदल गया। हालांकि इस बदलाव का पहला असर यह हुआ कि उनके पास काम की रफ्तार थोड़ी थम गई।
अब ‘अक्का’ में दिखेगा नया अवतार
अब कीर्ति सुरेश राधिका आप्टे के साथ ‘अक्का’ में नजर आएंगी। यह एक गैंगस्टर ड्रामा सीरीज है, जो 30 अक्तूबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रही है। इसे धर्मराज शेट्टी ने लिखा और निर्देशित किया है, जो इस सीरीज के साथ निर्देशन में डेब्यू कर रहे हैं। निर्माण वाईआरएफ एंटरटेनमेंट का है और आदित्य चोपड़ा कार्यकारी निर्माता हैं।
कहानी 1980 के दशक के दक्षिण भारत की पृष्ठभूमि में बुनी गई है। यह एक ऐसे साम्राज्य की कहानी है, जिसे महिलाओं की पीढ़ियों ने खड़ा किया, चलाया और संभाला। इस काल्पनिक राज्य का नाम पेरुनुरु है, जहां कीर्ति भवानी और राधिका रुद्र के किरदार में हैं। दोनों शक्तिशाली महिलाओं की महत्वाकांक्षाएं और सोच एक-दूसरे से अलग हैं, जो उन्हें कड़ी प्रतिद्वंद्विता की ओर ले जाती हैं। सीरीज में सत्ता, विरासत और बदले जैसे विषयों को केंद्र में रखा गया है।

कीर्ति और राधिका के साथ तन्वी आजमी, महेश मांजरेकर, अंशुमान पुष्कर और मोनिका पंवार जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं। कीर्ति ने इससे पहले कहा था कि वे इस दुनिया की ओर खिंची चली आईं और चाहती थीं कि यह उनका पहला हिंदी प्रोजेक्ट बने। साथ ही उन्होंने राधिका आप्टे को बेहतरीन कलाकार बताते हुए उनके साथ काम करने को अपने लिए खास अनुभव कहा।
मजबूत किरदारों की ओर बढ़ता सफर
कीर्ति के लिए ‘अक्का’ इसलिए भी खास मानी जा रही है कि यह उन्हें एक बार फिर ऐसे किरदार में पेश करती है, जिसकी तलाश वे ‘महानती’ के बाद से कर रही थीं। छह महीने का वह इंतजार शायद इसी तरह के दमदार मौकों की भूमिका था। कीर्ति खुद भी मानती हैं कि उस दौर ने उन्हें सिखाया कि करियर में हर ठहराव नुकसान नहीं होता। कई बार वही ठहराव अगले बड़े कदम की तैयारी बन जाता है।
अब दर्शकों की निगाहें 30 अक्तूबर पर टिकी हैं, जब यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘अक्का’ में कीर्ति का नया अंदाज उनके करियर को किस ऊंचाई तक ले जाता है।
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