
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में एक बयान में संकेत दिया कि, दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) पर जल्द ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच आर्थिक, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग नए स्तर पर पहुंच रहा है। राजदूत सर्जियो गोर ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मौके पर मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो बहुत जल्द भारत का दौरा करेंगे।
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जल्द होगी मोदी-ट्रंप की बैठक

उन्होंने कहा, हम भारत-अमेरिका संबंधों को अगले स्तर पर ले जा रहे हैं। गोर ने यह भी संकेत दिया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और इसे जल्द ही पूरा किया सकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि समझौते में अमेरिकी टैरिफ में कमी, ऊर्जा सहयोग और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नई दिशा देने जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। गोर ने आगे कहा कि, जब उचित समय आएगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक भी होगी। जब उन्हें पूछा गया कि ये बैठक कब तक हो सकती है, तो उन्होंने उत्साहपूर्ण अंदाज में कहा, थोडा इंतजार कीजिये, मुझे विश्वास है कि यह सही समय पर होगी।
बता दें कि, इससे पहले दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात 13 फरवरी 2025 को वाशिंगटन डीसी में हुई थी, जहां राष्ट्रपित ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की आधिकारिक कार्य यात्रा की मेजबानी की। 2025 के दौरान दोनों नेताओं के बीच व्यापार वार्ताओं को लेकर नियमित संवाद बना रहा, जिसने वर्तमान समझौते की नींव रखी।
मार्च में हो सकता है हस्ताक्षर
इससे पहले फरवरी 2026 की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) की घोषणा की थी, जिसमें अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करने का फैसला किया। इसके बदले भारत ने रूसी तेल की खरीद को कम करने और अमेरिकी उत्पादों की खरीद बढ़ाने का वादा किया, जिसमें 5 वर्षों में 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी उत्पादों की खरीद शामिल है।
यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही टैरिफ विवादों को सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, समझौते के कानूनी पाठ को अंतिम रूप देने के लिए 23 फरवरी 2026 से अमेरिका में तीन दिवसीय बैठकें शुरू हो रही हैं और मार्च 2026 तक पूर्ण हस्ताक्षर की उम्मीद है।
पैक्स सिलिका में शामिल होने का ऐलान
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान एक और महत्वपूर्ण घटना घटी, जब भारत ने औपचारिक रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका (Pax Silica) पहल में शामिल होने की घोषणा की। यह पहल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित सप्लाई चेन सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई है।
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समिट के साइडलाइन पर भारत और अमेरिका के बीच पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें भारत की तरफ से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और सचिव एस. कृष्णन मौजूद थे, जबकि अमेरिकी पक्ष से आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग और राजदूत गोर उपस्थित रहे।
भारत-अमेरिका संबंधों में नये अध्याय की शुरुआत
गोर ने इस अवसर पर कहा, पैक्स सिलिका क्षमताओं का एक गठबंधन है। भारत की एंट्री सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक और आवश्यकता है। उन्होंने इसे फ्री सोसाइटीज के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था के कमांडिंग हाइट्स पर नियंत्रण सुनिश्चित करने वाला कदम बताया। यह समझौता चीन पर निर्भरता कम करने और विश्वसनीय देशों के बीच टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन मजबूत करने का हिस्सा है।

भारत की भागीदारी से सेमीकंडक्टर डिजाइन, चिप मैन्युफैक्चरिंग और क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग में नई संभावनाएं खुलेंगी। राजदूत गोर ने समिट को बहुत प्रभावशाली बताते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग के व्यापक अवसर मौजूद हैं। दोनों देश इन अवसरों पर सक्रिय रूप से आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को असीम संभावनाओं वाला करार दिया और नए द्विपक्षीय व्यापार समझौते का उल्लेख किया, जिसमें ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग को नई दिशा मिलेगी। यह सब घटनाक्रम भारत-अमेरिका संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत दर्शाता है।
समझौते को मजबूत बनाएगा मार्को रुबियो का दौरा
ट्रंप प्रशासन के तहत संबंधों में रीसेट हुआ है, जहां व्यापार विवादों के बाद अब सहयोग पर जोर है। पैक्स सिलिका में शामिल होना भारत को AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक खिलाड़ी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में भारी वृद्धि की उम्मीद है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि, अमेरिका विदेश मंत्री मार्को रुबियो का आगामी दौरा और मोदी-ट्रंप की संभावित बैठक इन समझौतों को और मजबूत बनाएगा। भारत के लिए यह अवसर है कि वह वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करे और आर्थिक विकास को नई गति दे। अमेरिका के लिए भारत एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभर रहा है, जो रणनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर महत्वपूर्ण है।
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