टेक्सास में 90 फुट ऊंची हनुमान मूर्ति को लेकर फिर उठा विवाद, भारतीय बोले- अपने पैसे से बनवाया है, तुम्हें…

वॉशिंगटन। अमेरिका के टेक्सास प्रांत में स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची विशाल प्रतिमा को लेकर एक बार फिर से विवाद शुरू हो गया है। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ के नाम से फेमस ये प्रतिमा उत्तरी अमेरिका में सबसे ऊंची मूर्ति है। दरअसल, हाल ही में एक कंजर्वेटिव एक्टिविस्ट और रिपब्लिकन समर्थक ने इसे ‘थर्ड वर्ल्ड एलियंस’ द्वारा अमेरिकी जमीन को कब्जाने की कोशिश बताया, लेकिन अब भारतीय मूल के अमेरिकियों ने इस आरोप का करार जवाब दिया है।

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फूटा भारतीयों का गुस्सा

 टेक्सास

रिपोर्ट के अनुसार, विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब टेक्सास के एक प्रमुख कंजर्वेटिव एक्टिविस्ट कार्लोस टर्सियोस जो MAGA (Make America Great Again) समर्थक हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मूर्ति का वीडियो शेयर करते हुए एक पोस्ट लिखी। उन्होंने एक्स पर लिखा, थर्ड वर्ल्ड के एलियंस धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं, अमेरिका के लोगों को इस कब्जे को रोकने के लिए सामने आना चाहिए। टर्सियोस ने इसे भारतीय आप्रवासियों और H-1B वीजा से जोड़ते हुए सांस्कृतिक आक्रमण का आरोप लगाया। कार्लोस टर्सियोस इस पोस्ट को देखते ही भारतीय-अमेरिकियों का गुस्सा फूट पड़ा  और उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी।

आप सालों पहले हार चुके हैं कल्चर वॉर 

एक यूजर ने लिखा, हिंदुओं ने अपनी निजी जमीन पर, अपने पैसे से मंदिर और मूर्ति बनाई है, तुम्हें क्या दिक्कत है, हिंदुओं ने पैसे लगाए हैं, तुम क्यों परेशान हो रहे हो,  एक अन्य यूजर ने लिखा, आपका दावा पूरी तरह गलत है। यह निजी संपत्ति है, हिंदू समुदाय ने अपनी मेहनत की कमाई से इसे बनवाया है। आप कल्चर वॉर सालों पहले हार चुके हैं, अब मिडटर्म इलेक्शन में भी हारने वाले हैं। आपका अमेरिका फर्स्ट सिर्फ नस्लभेदी रवैया है।

एक अन्य यूजर में आंकड़ों का सहारा लेते  हुए लिखा, अमेरिका में 4 करोड़ घर स्पैनिश बोलते हैं, लेकिन टॉप 10 भाषाओं में कोई भारतीय भाषा नहीं है। घर की भाषा घुलने-मिलने का सबसे मजबूत संकेत है, इसलिए आपके ग्रुप को भारतीय-अमेरिकियों के इंटीग्रेशन लेवल तक पहुंचने में अभी बहुत समय लगेगा। ये जवाब दिखाते हैं कि, भारतीय समुदाय ने न सिर्फ धार्मिक भावनाओं की रक्षा की, बल्कि अमेरिका में अपनी सफल एकीकरण की कहानी भी बयां की।

2024 में हुआ था प्राण प्रतिष्ठा समारोह

रिपोर्ट में बताया गया है कि टेक्सास में श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर, शुगर लैंड (ह्यूस्टन के पास) में स्थित है। यहां पर 90 फुट ऊंची पंचलोहा अभय हनुमान मूर्ति का उद्घाटन अगस्त 2024 में एक भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह के साथ हुआ था।

यह मूर्ति स्टैच्यू ऑफ यूनियन के नाम से जानी जाती है, क्योंकि भगवान हनुमान ने रामायण में श्री राम और सीता को मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह मूर्ति शक्ति, भक्ति, निस्वार्थ सेवा और एकता का प्रतीक है। मूर्ति के निर्माण लगभग 8 मिलियन डॉलर की लागत लगी थी। ये अमेरिका में तीसरी सबसे ऊंची मूर्ति है (स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के बाद)। वहीं, उत्तरी अमेरिका में ये हनुमान की सबसे बड़ी मूर्ति है। मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के समय यहां हजारों लोग जुटे थे, जिसमें स्थानीय अधिकारी भी शामिल थे।

पहले भी उठ चुके हैं विरोध के स्वर

ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब इस मूर्ति को लेकर विवाद हुआ है। उद्घाटन के तुरंत बाद सितंबर 2024 में भी पास के एक चर्च से जुड़े लोगों ने इसका विरोध किया था, जिसके चलते मंदिर को सुरक्षा बढ़ानी पड़ी थी। साथ ही कैमरे की संख्या और गार्ड्स की ड्यूटी में इजाफा किया गया था। 2025 में भी कुछ रिपब्लिकन नेताओं जैसे अलेक्जेंडर डंकन ने इसे ‘false Hindu God’ कहकर हमला किया और अमेरिका को ‘Christian nation’ बताया।

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ऐसे कमेंट्स पर हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने GOP से शिकायत की। कुछ लोगों ने इसे ‘demon’ या ‘Planet of the Apes’ का कैरेक्टर तक कहा।

तेजी से बढ़ रहे भारतीय मूल के लोग 

टेक्सास

मालूम हो कि, अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। वे शिक्षा, टेक, मेडिसिन और बिजनेस में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। H-1B वीजा के जरिए अमेरिका आये कई भारतीय अब अमेरिकी नागरिक हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में अपना अहम योगदान दे रहे हैं। श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर और हनुमान जी की मूर्ति का निर्माण निजी फंडिंग से हुआ, जो अमेरिकी संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है।

भारतीय-अमेरिकियों का कहना है कि, ऐसे हमले नस्लवाद और दूसरे देशों के प्रति घृणा को दर्शाते हैं, जबकि वे पूरी तरह अमेरिकी मूल्यों में घुल-मिल चुके हैं।

शांति का प्रतीक है मूर्ति

यह विवाद अमेरिका में बढ़ते धार्मिक और सांस्कृतिक तनाव को उजागर करता है। जहां एक तरफ विविधता और धार्मिक स्वतंत्रता की बात होती है। वहीं कुछ कंजर्वेटिव ग्रुप इसे सांस्कृतिक आक्रमण मान रहे हैं, लेकिन अधिकांश अमेरिकी समाज में ऐसे मंदिर और मूर्तियां सकारात्मक रूप से देखी जाती हैं, जो देश की बहुलता को मजबूत करती हैं।

श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर के प्रतिनिधियों का कहना है कि, मूर्ति शांति और एकता का प्रतीक है, न कि किसी विवाद का। श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर और हनुमान जी की मूर्ति को लेकर उठे विवाद का भारतीय समुदाय ने एकजुट होकर जवाब दिया, जिससे दिखता है कि वे अपनी संस्कृति और अमेरिकी पहचान दोनों पर गर्व करते हैं।

 

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