4 दिन से मंदिर की परिक्रमा कर रहा भूखा-प्यासा कुत्ता, गांव में उमड़ी आस्था की भीड़; डॉक्टर की दलील पर भारी पड़े श्रद्धालु

बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना क्षेत्र स्थित नंदपुर गांव में इन दिनों आस्था और हैरानी से जुड़ा एक अनोखा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव के मंदिर परिसर में एक कुत्ता बीते चार दिनों से लगातार भगवान की मूर्तियों की परिक्रमा करता नजर आ रहा है। उसकी इस असामान्य गतिविधि को देखकर ग्रामीणों ने उसे दैवीय संकेत मान लिया है और पूजा-पाठ शुरू कर दिया है। देखते ही देखते मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी और माहौल किसी धार्मिक आयोजन जैसा बन गया।

बिना अन्न-जल किए लगातार परिक्रमा, ग्रामीण हैरान

स्थानीय लोगों के अनुसार यह कुत्ता पिछले चार से पांच दिनों से बिना खाए-पिए लगातार मंदिर में चक्कर लगा रहा है। पहले तीन दिन उसने हनुमान जी की प्रतिमा की परिक्रमा की और इसके बाद वह मंदिर परिसर में स्थापित मां दुर्गा की मूर्ति के चारों ओर घूमता रहा। लोगों ने उसके सामने दूध, रोटी और पानी भी रखा, लेकिन कुत्ते ने किसी चीज को हाथ तक नहीं लगाया। चौबीस घंटे परिक्रमा करने के बाद गुरुवार को उसने कुछ समय आराम किया, जिसके लिए ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में गद्दा भी बिछा दिया। थोड़ी देर बैठने के बाद वह फिर से परिक्रमा करने लगा।

भैरव का स्वरूप मानकर कर रहे पूजा

कुत्ते की इस स्थिति को देखकर गांव में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मंदिर पहुंचकर उसके सामने माथा टेक रहे हैं। कुछ ग्रामीण इसे भगवान भैरवनाथ का स्वरूप बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि इसमें किसी साधु या ऋषि की आत्मा का वास है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के चलते मंदिर के बाहर अस्थायी दुकानें भी लग गई हैं और प्रसाद से लेकर खिलौनों तक की बिक्री शुरू हो गई है। पूरा इलाका मेले जैसा नजर आने लगा है।

डॉक्टरों ने बताया बीमारी, ग्रामीणों ने किया इनकार

मामले की जानकारी मिलने पर पशु चिकित्सकों की एक टीम मंदिर पहुंची और कुत्ते की जांच की। डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के सिर में चोट लगने से उसका न्यूरोलॉजिकल संतुलन बिगड़ गया है, इसी कारण वह एक ही दिशा में गोल-गोल घूम रहा है। हालांकि, ग्रामीण डॉक्टरों की इस रिपोर्ट को मानने को तैयार नहीं हैं। उनका तर्क है कि कोई भी जानवर सिर की चोट के बावजूद बिना भोजन और पानी के इतने दिनों तक सक्रिय नहीं रह सकता। ग्रामीणों के अनुसार यह किसी दैवीय शक्ति का प्रभाव है। फिलहाल नंदपुर गांव का यह मंदिर आस्था, अंधविश्वास और विज्ञान के बीच बहस का केंद्र बना हुआ है।

 

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