लखनऊ में आरएसएस का भव्य हिन्दू सम्मेलन, सामाजिक समरसता और एकता का संदेश

लखनऊ । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में लखनऊ विभाग के चारों भागों में रविवार को भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इन सम्मेलनों में सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्यों जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे गए। कार्यक्रमों में सभी जाति-बिरादरी के महिला, पुरुष, बालक और युवाओं की व्यापक सहभागिता देखने को मिली।

लखनऊ दक्षिण भाग की आनंद बस्ती में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन जी ने कहा कि समाज को मिलजुलकर साथ रहना सीखना होगा। हमारा व्यवहार परस्पर आत्मीयता और समरसता से भरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज को जोड़कर चलने की आवश्यकता है, क्योंकि समाज को तोड़ने के निरंतर प्रयास हो रहे हैं। हिन्दू समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने गंगोत्री इन्क्लेव में आयोजित सम्मेलन में कहा कि देश के तथाकथित राजनेताओं द्वारा हिन्दू समाज को टुकड़ों में बांटने का कार्य किया जा रहा है। देवी-देवताओं और महापुरुषों को जातियों में बांटने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों ने सर्व समाज के हित में कार्य किया और सभी को मिलकर उनकी जयंती मनानी चाहिए। अनिल जी ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ‘शिक्षित बनो, संगठित बनो’ का संदेश पूरे समाज के लिए दिया था, न कि किसी एक जाति के लिए।

कृष्णानगर की इंद्रलोक कॉलोनी स्थित इंद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित सम्मेलन में क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने हिन्दू समाज की एकता, संगठन और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का आह्वान किया। वहीं अलीगंज स्थित सरस्वती विद्या मंदिर सेक्टर-क्यू में आयोजित सम्मेलन में इतिहास संकलन समिति के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री संजय श्रीहर्ष ने कहा कि संघ स्थापना काल से ही हिन्दू समाज की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए कार्य कर रहा है और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव को आत्मसात करता आया है।

उत्तर भाग के लवकुशनगर और सुभाष नगर सहित विभिन्न बस्तियों में आयोजित सम्मेलनों में वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए संगठित और जागरूक समाज की आवश्यकता पर बल दिया। सामाजिक समरसता गतिविधि के प्रांत प्रमुख राजकिशोर ने कहा कि मंदिरों को जन-जागृति का केंद्र बनना चाहिए और पंच परिवर्तन को व्यक्ति, परिवार और समाज के आचरण में उतारना होगा।

लखनऊ के उत्तर, दक्षिण, पश्चिम और पूरब भागों में कुल मिलाकर लगभग 11,500 से अधिक स्वयंसेवकों और नागरिकों ने सम्मेलनों में सहभागिता की। सह विभाग कार्यवाह ब्रजेश जी ने बताया कि यह प्रथम चरण है और 31 जनवरी तक लखनऊ की सभी बस्तियों में हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों के दौरान अनुशासन, एकता और देशभक्ति की अद्भुत झलक देखने को मिली। सम्मेलनों की शुरुआत सामूहिक वंदे मातरम् और समापन भारत माता की आरती के साथ किया गया।

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