
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा शुरू होने से ठीक पहले एक बड़ी घोषणा की है। राज्य सरकार ने उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ और चमोली जिले के गौचर हवाई पट्टियों (एयरस्ट्रिप्स) का संचालन भारतीय वायुसेना (IAF) को सौंपने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि, ये दोनों हवाई पट्टियां सामरिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह कदम सीमा क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत करने के साथ-साथ चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुविधा और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने में सहायक साबित होगा।
बेहतर होगा रखरखाव
मुख्यमंत्री धामी ने इस घोषणा को राज्य की सुरक्षा और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियां न केवल चारधाम यात्रा के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये सीमावर्ती क्षेत्रों में सामरिक महत्व रखती हैं। वायुसेना के हाथ में आने से इनका बेहतर रखरखाव, उन्नयन और दोहरे उपयोग (सैन्य और नागरिक) संभव होगा। यह फैसला राज्य कैबिनेट की बैठक में पहले से ही मंजूर हो चुका है, जहां रक्षा मंत्रालय के साथ उच्च स्तरीय सहमति के आधार पर एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) के रूप में इन पट्टियों को लीज पर सौंपने की मंजूरी दी गई थी।
चीन सीमा से सटे हैं दोनों इलाके
चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी) और गौचर (चमोली) हवाई पट्टियां राज्य के दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों में स्थित हैं। ये दोनों स्थान चीन सीमा से सटे हैं और सामरिक रूप से संवेदनशील माने जाते हैं। चारधाम यात्रा (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) के दौरान इनका उपयोग हेलीकॉप्टर सेवाओं, आपातकालीन मेडिकल इवैक्यूएशन और पर्यटन के लिए किया जाता है। वर्तमान में इनका संचालन राज्य की सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) के पास है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण इनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था। वायुसेना के संचालन में आने से इन पट्टियों का तकनीकी उन्नयन, बेहतर रखरखाव और 24×7 ऑपरेशन संभव होगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह निर्णय दोहरे उद्देश्यों को पूरा करेगा।
श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सेवाएं
एक तरफ सैन्य तैयारियां मजबूत होंगी, दूसरी तरफ चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर हवाई सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा, सीमांत प्रदेश होने के नाते उत्तराखंड में हवाई नेटवर्क का विस्तार रणनीतिक आवश्यकता है। वायुसेना के साथ सहयोग से ये पट्टियां नागरिक उपयोग के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बनेंगी। धामी ने पिथौरागढ़ एयरपोर्ट को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के हवाले करने और उसके उन्नयन पर भी जोर दिया, जिसके लिए 450 करोड़ रुपये का बजट पहले ही मंजूर हो चुका है। चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं।
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‘डबल इंजन’ सरकार की रणनीति का हिस्सा
मुख्यमंत्री ने हाल ही में विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि, यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, स्वास्थ्य, ट्रैफिक और हेली सेवाओं को मजबूत किया जाए। पिछले सालों में यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं में देरी और मौसम संबंधी समस्याएं सामने आई थीं। इन हवाई पट्टियों का वायुसेना द्वारा संचालन इन मुद्दों को हल करने में मदद करेगा। विशेष रूप से गौचर और चिन्यालीसौड़ से हेलीकॉप्टर उड़ानें केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे दुर्गम धामों तक पहुंच आसान बनाएंगी। यह फैसला राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार की रणनीति का हिस्सा है, जहां विकास और सुरक्षा को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि, केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय से उत्तराखंड में हवाई कनेक्टिविटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जा रहा है। पंतनगर और देहरादून एयरपोर्ट्स को अंतरराष्ट्रीय बनाने की प्रक्रिया तेज है। चिन्यालीसौड़ और गौचर का यह हस्तांतरण सीमा क्षेत्र में पर्यटन और सुरक्षा दोनों को बढ़ावा देगा।
तेजी से हो रहा विकास
सीएम के इस ऐलान से LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) के पास भारत की सैन्य तैनाती को मजबूत करेगा। वायुसेना इन पट्टियों को ALG के रूप में इस्तेमाल कर सकेगी, जहां छोटे विमान और हेलीकॉप्टर ऑपरेट हो सकेंगे। नागरिक उपयोग में भी चारधाम यात्रा के दौरान इन्हें पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए खोला जाएगा।
चारधाम यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। 2025 में रिकॉर्ड संख्या में यात्री पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026 में यात्रा को और सुरक्षित, सुगम और आधुनिक बनाने के लिए सभी विभाग अलर्ट मोड पर हैं। हवाई पट्टियों का वायुसेना को सौंपना इसी दिशा में बड़ा कदम है। यह घोषणा राज्यवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं के लिए सकारात्मक संदेश है। सुरक्षा और धार्मिक महत्व दोनों को संतुलित करते हुए उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
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