देश की GDP में काशी का बड़ा योगदान, ₹1.3 लाख करोड़ की हिस्सेदारी पर बोले सीएम योगी—‘अविनाशी काशी में PM मोदी के विजन से बदली तस्वीर’

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को वाराणसी दौरे पर पहुंचे। काशी विश्वनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने काशी के आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। सीएम योगी ने कहा कि काशी आज सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं रही, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी बड़ी भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि काशी का देश की जीडीपी में योगदान करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो इस ऐतिहासिक शहर के तेज विकास को दर्शाता है।

श्रद्धालुओं की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले या काशी विश्वनाथ धाम के भव्य विकास से पहले यहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या मात्र 5 हजार से 25 हजार के बीच रहती थी। आज वही काशी प्रतिदिन 1.25 लाख से 1.50 लाख श्रद्धालुओं का स्वागत कर रही है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की यह बढ़ती संख्या न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रमाण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यटन को भी नई मजबूती दे रही है।

पीएम मोदी के विजन से बदली काशी की तस्वीर
सीएम योगी ने कहा कि यह प्रदेश और देश का सौभाग्य है कि काशी का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में करते हैं। उन्होंने शुरू से ही यह संकल्प लिया कि काशी की प्राचीन और पुरातन विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक स्वरूप में देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए। इसी सोच के अनुरूप बीते 11 से 11.5 वर्षों में काशी में विकास योजनाओं की एक नई श्रृंखला शुरू हुई, जिसने शहर को नई पहचान दी।

55 हजार करोड़ से ज्यादा की योजनाएं, विकास को मिली रफ्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि काशी के समग्र विकास के लिए अब तक 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। इनमें से लगभग 36 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी होकर जनता को समर्पित की जा चुकी हैं, जबकि शेष योजनाएं तेजी से प्रगति पर हैं। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के जरिए काशी ने अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए भौतिक विकास के नए आयाम भी स्थापित किए हैं।

अविनाशी काशी, नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी अविनाशी है और हर भारतवासी के मन में इसके प्रति अपार श्रद्धा है। स्वतंत्र भारत में काशी को जो सम्मान और विकास मिलना चाहिए था, वह लंबे समय तक नहीं मिल पाया। लेकिन पिछले एक दशक में काशी ने अपनी विरासत को सहेजते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है और आज यह शहर आध्यात्मिकता के साथ-साथ आर्थिक प्रगति का भी मजबूत केंद्र बन चुका है।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया सरकारी मंथन के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...