सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है रूमेटॉइड आर्थराइटिस का दर्द? डॉक्टर से जानें वजह और राहत के असरदार उपाय

नई दिल्ली: सर्दियों का मौसम रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) के मरीजों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी भरा होता है। जैसे-जैसे तापमान गिरता है, वैसे-वैसे जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न बढ़ने लगती है। कई मरीजों के लिए चलना-फिरना और रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है।

आकाश हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड–ऑर्थोपेडिक्स व जॉइंट रिप्लेसमेंट डॉ. आशीष चौधरी से जानते हैं कि आखिर ठंड के मौसम में रूमेटॉइड आर्थराइटिस का दर्द क्यों बढ़ जाता है और इससे राहत पाने के लिए क्या उपाय अपनाने चाहिए।

ठंड में क्यों बिगड़ जाते हैं रूमेटॉइड आर्थराइटिस के लक्षण?

रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है। ठंड के मौसम में रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे जोड़ों तक ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है। इसका सीधा असर सूजन और दर्द के रूप में दिखता है।

डॉ. आशीष चौधरी के मुताबिक, “ठंड के कारण ब्लड फ्लो कम होने से जोड़ों में अकड़न बढ़ जाती है। रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीजों में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है।”

सुबह की अकड़न क्यों हो जाती है ज्यादा?

रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीजों में सुबह उठते ही जोड़ों में जकड़न आम समस्या है। सर्दियों में यह अकड़न ज्यादा देर तक बनी रहती है। रातभर जोड़ों की मूवमेंट कम होने और ठंड के असर से सूजन बढ़ जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर सुबह की अकड़न एक घंटे से ज्यादा बनी रहे, तो यह बीमारी के एक्टिव होने का संकेत हो सकता है।

कम मूवमेंट भी बढ़ाता है दर्द

सर्दियों में लोग वॉक और एक्सरसाइज कम कर देते हैं। इससे जोड़ों की फ्लेक्सिबिलिटी घटती है और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। नतीजतन दर्द और सूजन बढ़ जाती है। नियमित हल्की फिजिकल एक्टिविटी जोड़ों को एक्टिव और लचीला बनाए रखती है।

इम्यून सिस्टम और मौसम का कनेक्शन

कुछ शोध बताते हैं कि ठंड और नमी के कारण इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया बदल सकती है, जिससे ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण ज्यादा उभरकर सामने आते हैं। हालांकि इसका असर हर मरीज पर अलग-अलग हो सकता है।

सर्दियों में रूमेटॉइड आर्थराइटिस से राहत के उपाय

  • जोड़ों को हमेशा गर्म रखें, खासकर सुबह और रात के समय
  • गर्म पानी से स्नान या गर्म सेक करें
  • हल्की स्ट्रेचिंग, योग और वॉक को दिनचर्या में शामिल करें
  • डॉक्टर की सलाह से दवाओं में बदलाव करें
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी और संतुलित डाइट लें

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी तरह का इलाज, दवा या जीवनशैली में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

 

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