गोल्ड खरीदते समय बिल तो ले लिया, पर उसमें चेक क्या-क्या करना है, जरूर जानें

फिजिकल सोना आप किसी भी रूप में खरीदें, चाहे वो गोल्ड बार या सिक्का या आभूषण हो, आपको हमेशा उस पर हॉलमार्क के साथ बिल लेना चाहिए। यह भी कंफर्म करें कि ज्वेलरी ने आपको जो बिल दिया है उसमें सारी अहम जानकारी शामिल हो। दरअसल ये बिल आइंदा किसी भी लेन-देन को लेकर होने वाले विवाद या परेशानी को खत्म कर सकता है। बशर्ते उसमें सारी सटीक जानकारी हो।

जरूरी है बिल लेना

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार रिटेलर/ज्वेलर से हॉलमार्क आर्टिकल का ऑथेंटिक बिल/इनवॉयस लेना आवश्यक है। यह किसी भी विवाद/दुरुपयोग/शिकायत पर सुनवाई के लिए आवश्यक है। सवाल यह है कि बिल पर कौन-कौन सी जानकारी होनी चाहिए।

9 चीजों का बिल में होना जरूरी

आइटम का नाम और वो भी डिस्क्रिप्शन के साथ – जैसे कि गोल्ड रिंग

क्वांटिटी – 1, 2 या 3 आदि

वजन – ग्राम

प्योरिटी लेवल : 22 कैरेट या जो भी है

खरीद और मेकिंग चार्ज की तारीख पर सोने का मौजूदा रेट

हॉलमार्किंग चार्जेस

किसी भी जेम या हीरे की वैल्यू (यदि हो तो)

बिल में पत्थरों (कीमती पत्थर) की कीमत और वजन का अलग से जिक्र हो

खरीदार द्वारा देय की गई कुल राशि

क्या है बीआईएस का नियम

ज्वेलरी/रिटेलर की तरफ से जारी किए गए बिल में खरीदे गए हॉलमार्क वाले आइटम की डिटेल होनी चाहिए। उसमें हर आइटम की डिटेल, कीमती धातु का शुद्ध वजन, कैरेट में शुद्धता और फाइननेस, और हॉलमार्किंग शुल्क का बिल या हॉलमार्क वाली कीमती धातु की बिक्री के इनवॉयस में उल्लेख होना चाहिए।

साथ ही कंज्यूमर किसी भी BIS मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग (Assaying & Hallmarking) या एएंडएच केंद्र से हॉलमार्क किए गए आभूषणों/आर्टिफैक्ट्स की प्योरिटी वेरिफाई करवा सकता है। टेस्टिंग के लिए मामूली चार्ज लिया जाएगा।

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