रामपुर में सपा का ही दांव चलने की तैयारी में भाजपा, क्या आजम की विरासत भी नहीं बचेगी?

आजम खान की विधायकी जाने के बाद भाजपा अब रामपुर सीट पर भी अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। रामपुर को सपा का गढ़ माना जाता है और वह खुद यहां से 10 बार विधायक रहे हैं। लेकिन भाजपा इस बार आजम के मैदान से हटने का फायदा उठाते हुए जीत की उम्मीद पाले हुए हैं। चर्चा है कि भाजपा की ओर से रामपुर में किसी मुस्लिम उम्मीदवार को उतारा जा सकता है। यहां 5 दिसंबर को मतदान होना है। मंगलवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने भी इसके संकेत दिए हैं। रामपुर के अलावा खतौली विधानसभा सीट और मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली मैनपुरी लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव होना है।

भूपेंद्र चौधरी ने रामपुर को लेकर कहा, ‘रामपुर में टिकट को लेकर कई नामों पर विचार चल रहा है। हालांकि भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता विचार कर रहे हैं कि मुस्लिम उम्मीदवार को उतारा जाए। पार्टी ने फिलहाल सभी विकल्पों को खुला रखा है।’ यदि कोई उम्मीदवार मजबूत होता है तो हम उसे उतारेंगे। इसके लिए उसकी जाति या फिर धर्म मायने नहीं रखता है। हेट स्पीच के मामले में एमपी/एमएलए कोर्ट ने आजम खान को तीन साल की सुनाई थी। इसके चलते उनकी रामपुर सीट से सदस्यता समाप्त हो गई है। बता दें कि इसी साल रामपुर लोकसभा सीट पर भी जून में उपचुनाव हुआ था, जिसमें भाजपा के घनश्याम लोधी को बड़ी जीत मिली थी।

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रामपुर के अलावा खतौली सीट पर भी कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। यह सीट भाजपा विधायक विक्रम सैनी को एमपी-एमएलए कोर्ट से दो साल की सजा के बाद खाली हुई है। इसके चलते उनकी विधायकी चली गई है। यह सीट राकेश टिकैत परिवार का गृह क्षेत्र है। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा को यहां जीत मिलती है या फिर सपा और रालोद के कैंडिडेट को समर्थन मिलता है। वहीं मैनपुरी की बात करें तो सपा की ओर से यादव परिवार से ही किसी को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि रामपुर में किसे टिकट दिया जाए, इसमें आजम खान की अहम भूमिका होगी। भाजपा ने रामपुर में जिला और क्षेत्रीय इकाई से नाम मंगाए हैं। इस लिस्ट के आधार पर ही फैसला लिया जाएगा।

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