निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए तीन आर्मी एविएशन ब्रिगेड बनीं, दो एलएसी पर तैनात

भारतीय सेना की एविएशन ब्रिगेड दिन-रात दुश्मन पर नजर रखती है।एविएशन बिग्रेड के रहते हुए सीमा पर कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ जारी गतिरोध के बीच भारतीय सेना ने अपना ध्यान आर्मी एविएशन को मजबूत करने पर केन्द्रित किया है। अपनी निगरानी क्षमता बढ़ाने के मद्देनजर सेना ने तीन एकीकृत विमानन ब्रिगेड की स्थापना की है, जिनमें से दो एलएसी के साथ हैं। आर्मी एविएशन में सुधार प्रक्रिया के तहत आने वाले महीनों में ड्रोन, हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर, अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, चीता और चेतक हेलीकॉप्टर पूर्वी लद्दाख में उड़ान भरते नजर आएंगे।

सेना की विमानन इकाई को एयर कॉर्प्स के रूप में जाना जाता है। नवम्बर, 1986 में स्थापित आर्मी एविएशन कॉर्प्स से ध्रुव उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर, चेतक, चीता और चीतल हेलीकॉप्टर संचालित होते हैं। आर्मी एविएशन कॉर्प्स में अब तक केवल पुरुष अधिकारियों को ही शामिल किया जाता था लेकिन आर्मी एविएशन में अब तक ग्राउंड ड्यूटी पर रहने वाली महिला ऑफिसरों को इस साल जुलाई से शुरू होने वाले कोर्स में शामिल किया जायेगा। यानी अब वायुसेना और नौसेना की तरह भारतीय सेना की महिलाएं भी एक साल का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लड़ाकू विमान उड़ाती नजर आएंगी। यह कॉर्प्स सियाचिन ग्लेशियर सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेना की तैनाती में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सूत्रों ने कहा कि चीन के साथ जारी गतिरोध के बीच एलएसी पर पैदल सेना के साथ ही अधिक समन्वित तरीके से चौबीसों घंटे निगरानी क्षमता की आवश्यकता महसूस की गई थी। बेहतर निगरानी क्षमता से ही दुश्मन की गतिविधियों पर पैनी नजर रखकर दुश्मन से युद्ध लड़ने को सफलता की कुंजी माना जाता है। इसीलिए एलएसी के साथ कई फॉरवर्ड हेलीकॉप्टर बेस स्थापित किए गए हैं जिससे न केवल निगरानी बल्कि सैनिकों और रसद की आवाजाही भी अधिक विकल्पों के साथ आसान हो रही है। भारतीय सेना ने अपना ध्यान आर्मी एविएशन को मजबूत करने पर केन्द्रित किया है। अपनी निगरानी क्षमता बढ़ाने के मद्देनजर सेना ने तीन एकीकृत विमानन ब्रिगेड की स्थापना की है, जिनमें से दो एलएसी के साथ हैं।

सेना की पूर्वी कमान के तहत एक और उत्तरी कमान के तहत दो एविएशन ब्रिगेड तैनात की गई हैं। इसके अलावा पश्चिमी कमान के तहत नए ऑर्डर ऑफ बैटल (ओआरबीएटी) स्थापित किया गया है। यह नई एविएशन ब्रिगेड विमानन परिसंपत्तियों का स्थानीय नियंत्रण करेगी, इसीलिए सभी ड्रोन संचालन को अब आर्टिलरी से एविएशन कॉर्प्स में स्थानांतरित कर दिया गया है। इन विमानन ब्रिगेडों को एकीकृत निगरानी और संचालन केंद्रों के साथ स्थापित किया गया है जो न केवल ड्रोन और हेलीकॉप्टरों द्वारा भेजे गए फ़ीड के माध्यम से बल्कि उपग्रहों के माध्यम से भी चौबीसों घंटे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी रखेंगे। सेना नए जमाने के पोर्टेबल हेलीपैड खरीदने की भी प्रक्रिया में है।

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भविष्य में होने वाले “ड्रोन युद्ध’ को देखते हुए सेना ने हाल ही में स्वार्म ड्रोन का ऑर्डर दिया है, जो रसद और हमले दोनों के लिए इस्तेमाल होंगे। सेना ने इजराइल से चार नए उपग्रह लिंक-सक्षम लंबी दूरी के निगरानी ड्रोन खरीदने के साथ-साथ कामिकेज़ ड्रोन का भी आदेश दिया है। भविष्य में एविएशन कॉर्प्स तोपखाने के बजाय उनकी देखभाल करने पर जोर दे रही है क्योंकि ड्रोन युद्ध बदल गया है। सूत्रों ने कहा कि आने वाले महीनों में एविएशन कॉर्प्स का विस्तार होगा क्योंकि सेना हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों, अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों, चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों के प्रतिस्थापन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। चीन के साथ मौजूदा गतिरोध के दौरान सेना ने अधिक हेलीकॉप्टरों को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भेजा है।

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