सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पोस्टर लगाने पर 24 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता वकील को एक हफ्ते में एफआईआर का ब्योरा दाखिल करने का निर्देश दिया। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि याचिकाकर्ता को सिर्फ अखबार पढ़कर ही याचिका दाखिल नहीं करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में दर्ज याचिका में की गई मांग
याचिकाकर्ता वकील प्रदीप कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई अपनी याचिका में कहा है कि दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और लक्षद्वीप में पुलिस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ पोस्टर लगाने के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। तब कोर्ट ने कहा कि अखबार हम भी पढ़ते हैं। लक्षद्वीप का विवाद दूसरा है। जिस महिला के खिलाफ केस किया गया उसे जमानत मिल चुकी है। आप दिल्ली और दूसरी जगहों पर दर्ज एफआईआर की जानकारी दीजिए। कोर्ट ने इस मामले में कोई भी दिशा-निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया।
दायर याचिका में प्रधानमंत्री मोदी की कोरोना रोधी वैक्सीन के मामले में आलोचना करनेवाले पोस्ट लगाने पर दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस को दिशा-निर्देश दिया जाए कि वे इस मामले में अब कोई नया एफआईआर दर्ज नहीं करे।
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याचिकाकर्ता का कहना है कि ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। उन्होंने 2015 में श्रेया सिंघल के उस मामले का जिक्र किया जिसमें कोर्ट ने इंफॉर्मेशन टेक्टनोलॉजी एक्ट की धारा 66ए को निरस्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बावजूद कम से कम 25 एफआईआर दर्ज किए गए हैं। ये एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 269 के तहत दर्ज किए गए हैं।
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