धर्म का अर्थ सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, संस्कारों को संजोना युवाओं की जिम्मेदारी

पुराना हनुमान मन्दिर अलीगंज में दो दिवसीय राम कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को कथा व्यास हरि ओम तिवारी (राघवचरणानुरागी) ने कहा कि युवा आध्यात्मिक संवाद युवाओं को अपने लक्ष्य निर्धारण के समय किसी श्रेष्ठ के साथ अवश्य चर्चा करनी चाहिये जिससे लक्ष्य प्राप्ति मे किसी भी प्रकार की रुकावट ना आये क्योकि श्रेष्ठजन का अनुभव लक्ष्य प्राप्ति मे सहायक बनता है।


राघवचरणानुरागी ने कहा कि भारतीय संस्कृत पूर्ण वैज्ञानिक है आज जब पूरा विश्व कोरोना महामारी की त्रासदी से पीड़ित है। इस कुसमय मे सिर्फ भगवान की भक्ति और विश्वास की हमको सम्बल देगा। हम स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष का अनुकरण करे न की किसी विदेशी महापुरुष का। उन्होंने कहा कि धर्म का अभिप्राय सिर्फ पूजा पाठ ही नही है धर्म और संस्कृत भिन्न है। संस्कृत का समवर्धन करना युवाओं की जिम्मेदारी है। आज हम सबको संकल्प लेना होगा कि हम अपने संस्कार को संजोये।

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कथा में मुख्य यजमान प्रदीप पाण्डेय, उमेश तिवारी, अमित शर्मा, सुनील शुक्ला समेत अन्य लोग मौजूद रहे। 

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