पुलिस स्मृति दिवस: मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिसकर्मियों को दी श्रद्धांजलि, परिजनों से भी मिले

लखनऊ। पुलिस स्मृति दिवस 2026 के मौके पर लखनऊ की पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने बीते एक साल में शहीद हुए जवानों को नमन किया। कार्यक्रम में वे शहीदों के परिजनों से भी मिले, उन्हें सम्मानित किया और उनका हालचाल पूछा। परिजनों ने अपनी मांगें भी मुख्यमंत्री के सामने रखीं, जिस पर उन्होंने हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

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शहीदों के सम्मान में सजी पुलिस लाइन

Police Memorial Day

पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम का माहौल गंभीर और भावुक रहा। वर्दी में तैनात जवानों की मौजूदगी में शहीद पुलिसकर्मियों को याद किया गया। कर्तव्य के दौरान जान गंवाने वाले साथियों के सम्मान में पूरा पुलिस बल एकजुट दिखा। मुख्यमंत्री ने शहीदों के चित्रों के सामने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए और उनके साहस और समर्पण को नमन किया।

परिजनों से की मुलाकात

कार्यक्रम का अहम हिस्सा शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों से मुख्यमंत्री की मुलाकात रही। उन्होंने परिजनों को सम्मानित किया और उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान कई परिवारों ने अपनी जरूरतें और मांगें भी रखीं। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि, सरकार और पुलिस विभाग हर संभव सहायता के लिए उनके साथ खड़े हैं।

 मयूरी ने जताया आभार

शहीद प्रदीप कुमार की पत्नी मयूरी वर्मा भी कार्यक्रम में पहुंचीं। उन्होंने बताया कि उनके पति जालौन में तैनात थे और वर्ष 2026 में ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी। मयूरी ने कहा कि, इस कठिन समय में पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें लगातार सहयोग मिला है और इसके लिए उन्होंने विभाग का आभार जताया।

मयूरी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात कर आश्वासन दिया कि भविष्य में किसी भी परेशानी के समय उनके परिवार को पूरा सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पेंशन शुरू हो चुकी है, नौकरी के लिए आवेदन किया जा चुका है और सहायता राशि भी मिल गई है।

शहीद रोहित यादव की पत्नी बोलीं, परिवार को मिला सम्मान

शहीद रोहित यादव की पत्नी निशा यादव ने बताया कि उनके पति की मौत एक कंपनी में आग लगने की घटना में हुई थी। निशा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने शहीद परिवार को सम्मान दिया और उनकी पूरी बात ध्यान से सुनी। परिवारों के लिए यह मुलाकात इसलिए भी अहम रही कि उन्हें अपनी बात सीधे सरकार के मुखिया तक पहुंचाने का मौका मिला।

एक साल में देशभर में 154 जवान हुए शहीद

Police Memorial Day

पुलिस स्मृति दिवस पर हर साल उन पुलिसकर्मियों को याद किया जाता है, जिन्होंने बीते एक साल में कर्तव्य पालन के दौरान अपनी जान गंवाई। इस बार 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच देशभर में 154 पुलिसकर्मियों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। इनमें उत्तर प्रदेश के छह पुलिसकर्मी शामिल हैं। इनके नाम इस प्रकार हैं:

तीर्थपाल सिंह, फायर सर्विस चालक, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर
रोहित यादव, फायरमैन, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर
मोहित कुमार यादव, उपनिरीक्षक, जालौन
सत्यभान सिंह, उपनिरीक्षक, जालौन
अशोक कुमार, आरक्षी, जालौन
प्रदीप कुमार, आरक्षी, जालौन

कर्तव्य निर्वहन के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन पुलिसकर्मियों के साहस और समर्पण पर प्रदेश का पुलिस बल गौरवान्वित है।

क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस

देश में पुलिस स्मृति दिवस हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1959 की उस घटना से जुड़ी है, जब लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स इलाके में सीआरपीएफ की एक टुकड़ी पर हमला हुआ था और 10 जवान शहीद हो गए थे। उन्हीं जवानों की याद में यह दिन मनाया जाता है। इस दिन देश के सभी राज्यों और केंद्रीय पुलिस बलों में शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके परिवारों को सम्मान दिया जाता है।

सुरक्षा के पहरेदारों का बलिदान

पुलिस की ड्यूटी का स्वरूप ऐसा है कि, उसे हर मौसम और हर हालात में जनता की सुरक्षा के लिए तैनात रहना पड़ता है। कभी कानून-व्यवस्था संभालते हुए, कभी अपराधियों से मुकाबला करते हुए, तो कभी हादसों और आपदाओं में लोगों की जान बचाते हुए जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इस बार शहीदों की सूची में सड़क हादसे और आग लगने की घटना में जान गंवाने वाले जवान भी शामिल हैं। यह दिखाता है कि वर्दी में ड्यूटी निभाने वाले हर कर्मी के सामने हर पल जोखिम रहता है।

परिवारों के साथ खड़े रहने का संदेश

पुलिस स्मृति दिवस सिर्फ श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं, बल्कि शहीदों के परिवारों को यह भरोसा दिलाने का भी मौका है कि वे अकेले नहीं हैं। मुख्यमंत्री की मुलाकात और परिजनों को दिया गया आश्वासन इसी भरोसे का हिस्सा माना जा रहा है। पेंशन, नौकरी और आर्थिक सहायता जैसे मामलों में परिवारों को राहत मिले, यह बात इस कार्यक्रम में एक बार फिर सामने आई।

बलिदान को याद रखना हम सबकी जिम्मेदारी

शहीद जवानों ने अपने कर्तव्य के लिए जो कीमत चुकाई, उसे चुकाया नहीं जा सकता, लेकिन उनके परिवारों का सम्मान करना, उनकी जरूरतों को समझना और उनके साथ खड़े रहना समाज और सरकार, दोनों की जिम्मेदारी है। पुलिस लाइन में हुए इस कार्यक्रम ने यही संदेश दिया कि प्रदेश अपने शहीद पुलिसकर्मियों के बलिदान को भूला नहीं है और उनके परिवारों के साथ पूरी तरह खड़ा है।

 

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