
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सोमवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अखिलेश के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को चुनावी ढकोसला बताया। राज्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि, यह नारा जनकल्याण के लिए नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने की सीढ़ी है।
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कन्नौज की जनता ने अखिलेश को सांसद चुनकर बड़ी गलती की है। ढाई साल से अधिक का समय बीत गया, लेकिन एक भी रात वे अपने संसदीय क्षेत्र में नहीं रुके। वह सिर्फ औपचारिकता निभाने आते हैं। एक्सप्रेसवे पर गाड़ी रोकते हैं, कुछ खास चंद कार्यकर्ताओं से मिलते हैं और फिर लखनऊ वापस लौट जाते हैं।
खाली कुर्सियों ने खोली सपा की पोल
कन्नौज में सपा के पीडीए सम्मेलन में पसरे सन्नाटे और खाली कुर्सियों के बाद जिला कार्यकारिणी भंग किए जाने पर मंत्री ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि, सम्मेलन की तस्वीरें सपा के जमीनी जनाधार का सच्चा आईना हैं। कार्यक्रम में सपा कार्यकर्ताओं की गैरमौजूदगी और जनता की बेरुखी कोई हैरानी की बात नहीं, जो बिखराव आज कन्नौज में दिख रहा है, वही पूरे प्रदेश में सपा की असली तस्वीर है।
मुद्दों पर चुप्पी, सिर्फ कुर्सी की चाह
असीम अरुण ने सवालिया लहजे में कहा कि, चुनाव करीब आते ही अखिलेश को पीडीए याद आने लगता है, पर उनका असली एजेंडा क्या है? वह मुख्यमंत्री तो बनना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि सत्ता में आने के बाद वे क्या करेंगे। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और भ्रष्टाचार जैसे बुनियादी मुद्दों पर वह चुप्पी साध लेते हैं। वे महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा पर भी मौन रहते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस दल के पास न स्पष्ट विजन है, न ठोस नीति और जिसका एकमात्र मकसद परिवार को सत्ता का लाभ दिलाना हो, उसकी ऐसी ही दुर्गति तय है। सपा को वैचारिक रूप से खोखला बताते हुए उन्होंने कहा कि यह दल नीति और नैतिकता, दोनों पैमानों पर दिवालिया हो चुका है।
नीति और नैतिकता के रास्ते पर भाजपा
सपा की राजनीति से भाजपा के कामकाज की तुलना करते हुए असीम अरुण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन सरकार में भाजपा विकास के नए कीर्तिमान रच रही है। लोककल्याणकारी नीतियों और ऊंची राजनीतिक नैतिकता की नींव पर भाजपा जनता के भरोसे के साथ लगातार आगे बढ़ रही है। सपा जैसे विपक्षी दल सिर्फ अवसरवादी नारों के सहारे अपनी सियासी जमीन तलाशने को बेचैन हैं।
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