
दीवाली नजदीक आते ही बाजारों में पटाखों की खरीदारी तेज हो जाती है, लेकिन इस बार आतिशबाजी का शौक लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है। दरअसल, कच्चे माल की कीमतों में आई तेजी और पटाखा फैक्ट्रियों पर बढ़ी सख्ती की वजह से इस साल पटाखों के दाम 15 से 20 फीसदी तक बढ़ने की आशंका है। त्योहार की खरीदारी करने वाले ग्राहकों को इसका सीधा असर झेलना पड़ सकता है।
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भारत में पटाखा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र तमिलनाडु का शिवकाशी है। यहां तैयार पटाखे देश के कई हिस्सों में पहुंचते हैं। उद्योग से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, देश में बिकने वाले ज्यादातर पटाखे, करीब 90 फीसदी, यहीं से आते हैं। ऐसे में शिवकाशी में लागत बढ़ने या उत्पादन प्रभावित होने का असर पूरे देश के बाजारों में दिखता है।
रसायनों के दाम में उछाल
इस बार उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की कीमतें बढ़ने से निर्माताओं की लागत चढ़ गई है। पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, सल्फर का दाम एक समय 75 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 140 रुपये तक पहुंच गया था। बाद में इसमें कुछ गिरावट आई और कीमत करीब 100 रुपये प्रति किलो रह गई, फिर भी यह शुरुआती भाव से काफी ऊपर है।

सिर्फ सल्फर ही नहीं, पटाखे बनाने में काम आने वाला एल्युमिनियम, सोडियम नाइट्रेट और अन्य जरूरी सामग्री भी लगभग 30 फीसदी महंगी हो चुकी है। इन सामग्रियों के बिना पटाखों का निर्माण संभव नहीं है, इसलिए निर्माताओं के पास लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचता।
आपूर्ति में देरी ने बढ़ाई मुश्किल
निर्माताओं के सामने सिर्फ महंगे कच्चे माल की समस्या नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग से जुड़ी बाधाओं के कारण सल्फर और चिपकाने वाले पदार्थों की आपूर्ति में भी देरी हुई है। सामान पहुंचने में ज्यादा समय लगने से उत्पादन खर्च और बढ़ रहा है। कारोबारियों का अनुमान है कि, इन सभी वजहों से पटाखे बनाने की लागत में करीब 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है।
त्योहारी सीजन में समय पर माल तैयार करना निर्माताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। कच्चे माल की देरी का मतलब है कि उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, जबकि मांग इसी समय सबसे ज्यादा होती है।
सुरक्षा जांच से उत्पादन पर दबाव
प्रशासन ने पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा नियमों की जांच तेज कर दी है। पिछले 10 महीनों में 24 हादसों में 41 लोगों की मौत हुई और 39 लोग घायल हुए। इसके बाद 700 से ज्यादा इकाइयों का निरीक्षण किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि, खतरनाक सामग्री से जुड़े कारोबार में सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है।
जांच का मकसद श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन इसका असर उत्पादन पर भी पड़ा है। निरीक्षण के दौरान नियमों की कमी पाई जाने वाली इकाइयों में काम प्रभावित हो सकता है, जिससे बाजार में आपूर्ति सीमित होने की आशंका रहती है।
कारोबार का आकार भी बड़ा
शिवकाशी में एक हजार से ज्यादा पटाखा फैक्ट्रियां चलने का अनुमान है। तमिलनाडु फायरवर्क्स ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार पिछली दीवाली पर यहां करीब 7,000 करोड़ रुपये के पटाखे बिके थे, जो उससे पिछले साल के 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा था। इतने बड़े कारोबार में लागत का थोड़ा सा बदलाव भी देशभर की कीमतों को प्रभावित कर देता है।
बाजार में क्या हैं मौजूदा दाम
अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में बाजार में 10 बड़े अनार के पैकेट की कीमत करीब 55 रुपये बताई गई थी। 10 स्पेशल ग्राउंड स्पिनर के लिए 80 रुपये और पांच दो-आवाज वाले रॉकेट के लिए 70 रुपये चुकाने पड़ रहे थे। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर इन कीमतों में और उछाल आ सकता है।
कारोबारियों के अनुसार बढ़ी हुई लागत के चलते इस बार ग्राहकों को पटाखे खरीदने के लिए ज्यादा बजट रखना पड़ सकता है। यानी जो परिवार हर साल एक तय रकम में आतिशबाजी करते थे, उन्हें इस बार या तो खर्च बढ़ाना होगा या खरीदारी में कटौती करनी पड़ेगी।
जांच पर उद्योग की चिंता
इस बीच जांच के तरीके को लेकर उद्योग जगत से चिंता भी सामने आई है। अगस्त में तमिलनाडु के एक पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया था कि सुरक्षा जांच के नाम पर लाइसेंसधारी इकाइयों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नियम तोड़ने वाली अवैध इकाइयों पर सख्त कार्रवाई जायज है, लेकिन वैध इकाइयों को अनावश्यक दबाव का सामना नहीं करना चाहिए। यह आरोप है और सरकार का पक्ष अलग हो सकता है।
ग्राहकों के लिए क्या हैं विकल्प
बाजार जानकारों का मानना है कि ऐसे में ग्राहकों को खरीदारी में समझदारी दिखानी चाहिए। मांग बढ़ने से पहले जरूरत का सामान खरीदना, सीमित मात्रा में पटाखे लेना और लाइसेंस वाले विक्रेताओं से ही सामान खरीदना बेहतर रहता है। पटाखों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है, खासकर तब जब फैक्ट्रियों में हादसों के कारण सुरक्षा का मुद्दा चर्चा में है।
मजदूरों की सुरक्षा बड़ा सवाल
हादसों में हुई मौतें बताती हैं कि पटाखा उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा कितना गंभीर मुद्दा है। जांच तेज होने से उम्मीद है कि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होगा, लेकिन निर्माता यह भी चाहते हैं कि कार्रवाई से जायज कारोबार प्रभावित न हो। यही संतुलन आने वाले दिनों में उत्पादन और कीमतों की दिशा तय करेगा।
दीवाली नजदीक है और मांग बढ़ने के साथ बाजार में तेजी आना तय है। ऐसे में पटाखों की कीमतें सल्फर जैसे रसायनों के दाम, आपूर्ति की स्थिति और सुरक्षा जांच के असर पर निर्भर करेंगी। फिलहाल कारोबारियों का अनुमान है कि, दाम पिछले साल के मुकाबले 15 से 20 फीसदी तक ऊपर रहेंगे। ग्राहकों के लिए सलाह यही है कि खरीदारी से पहले अलग-अलग दुकानों के दाम की तुलना कर लें और बढ़ती कीमतों की चर्चा के बीच घबराहट में जरूरत से ज्यादा सामान न खरीदें।
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