जनता के लिए जल्द खुलेगा गंगा एक्सप्रेसवे, कम होगी मेरठ से प्रयागराज की दूरी

मेरठ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे जल्द ही धरातल पर उतरने जा रहा है। प्रयागराज से मेरठ को जोड़ने वाले इस 594 किलोमीटर लंबे विशालकाय एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। रविवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (STC) के सीईओ मनोज कुमार ने मेरठ में एक्सप्रेसवे का सघन निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। निरीक्षण के बाद सीईओ ने संकेत दिए कि, यह एक्सप्रेसवे अब शीघ्र ही आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच की दूरी महज कुछ घंटों में सिमट जाएगी।

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निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

बता दें कि, गत दिवस यानी रविवार को मेरठ सीईओ मनोज कुमार मेरठ पहुंचे और उन्होंने मंडलायुक्त भानुचंद्र गोस्वामी और जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह के साथ एक्सप्रेसवे के निर्माण की गतिविधियों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे औद्योगिक गलियारे के विस्तार और अत्याधुनिक टोल प्लाजा तकनीक पर विशेष चर्चा की। खड़खड़ी टोल प्लाजा पर वृक्षारोपण करते हुए उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे के तीसरे चरण में केवल साइड की दीवारों का मामूली फिनिशिंग कार्य शेष है, जिसे अगले एक महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

Ganga Expressway

गौरतलब है कि मेरठ जिले के दायरे में आने वाला 22 किमी का हिस्सा अक्टूबर 2025 में ही पूर्ण हो चुका था।  बताया जा रहा है कि, गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका का अत्याधुनिक ‘बैरियर-लेस’ टोल सिस्टम। बिजौली के निकट खड़खड़ी में बने टोल प्लाजा पर वाहनों का परीक्षण सफल रहा है।

आईआरबी के मुख्य महाप्रबंधक अनूप सिंह ने बताया कि, यहां वाहनों के प्रवेश के लिए कोई शारीरिक बैरियर नहीं होगा, जिससे वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा और न ही टोल पर लंबी लाइनें लगेंगी। आने वाले समय में निकास द्वार पर भी इसी तकनीक से ऑटोमैटिक टोल कटौती की जाएगी। 6-लेन के इस एक्सप्रेसवे को भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे आसानी से 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।

बन रहीं हवाई पट्टियां

सामरिक दृष्टि से भी यह एक्सप्रेसवे भारत की सुरक्षा पंक्ति को मजबूत करेगा। एक्सप्रेसवे पर केवल गाड़ियां ही नहीं दौड़ेंगी, बल्कि आपातकाल की स्थिति में यह भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के लिए रनवे का काम भी करेगा। पूरे एक्सप्रेसवे पर चार स्थानों पर विशेष हवाई पट्टियां बनाई जा रही हैं। इनमें से शाहजहांपुर के जलालाबाद में 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी पूरी तरह से तैयार कर ली गई है। इसके साथ ही वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार की सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जो इसे देश के सबसे तेज एक्सप्रेसवे में से एक बनाती है। मेरठ से बदायूं तक के पहले सेक्टर की प्रगति पर गौर करें तो 130 किलोमीटर में से 129 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है।

एक्सप्रेसवे के निर्माण के साथ ही उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में भी बड़ा बदलाव आने वाला है। सीईओ मनोज कुमार ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विशाल औद्योगिक गलियारा आकार लेने लगा है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का अधिकांश काम पूरा हो चुका है और वैश्विक स्तर की कई विदेशी कंपनियां यहां अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए रुचि दिखा रही हैं। यह गलियारा न केवल प्रदेश की जीडीपी में इजाफा करेगा, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल से आने वाले समय में प्रदेश एक ‘उद्योग प्रदेश’ के रूप में अपनी नई पहचान बनाएगा।

सुगम होगा परिवहन

निरीक्षण के दौरान यूपीडा (UPEIDA) के परियोजना निदेशक राकेश मोघा और संचालन एजेंसी के अधिकारियों ने एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत रिपोर्ट पेश की। गंगा एक्सप्रेसवे का संचालन शुरू होने से न केवल परिवहन सुगम होगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन (मेरठ, हस्तिनापुर से प्रयागराज) को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास की नई ‘लाइफलाइन’ साबित होगा, जो गांवों और कस्बों को सीधे देश की राजधानी और मुख्य आर्थिक केंद्रों से जोड़ेगा।

 

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